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भारतीय रेलवे ने कवच 4.0 के लिए ₹170 करोड़ मंजूर किए, मुरादाबाद डिवीजन के 712 किमी ट्रैक पर होगी तैनाती

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भारतीय रेलवे ने कवच 4.0 के लिए ₹170 करोड़ मंजूर किए, मुरादाबाद डिवीजन के 712 किमी ट्रैक पर होगी तैनाती

सारांश

भारतीय रेलवे ने मुरादाबाद डिवीजन के 712 रूट किमी पर कवच 4.0 लगाने के लिए ₹170 करोड़ मंजूर किए हैं। ट्रेन दुर्घटनाएँ 2014–15 में 135 से घटकर 2025–26 में 16 रह गई हैं — और यह विस्तार उस सुरक्षा क्रांति की अगली कड़ी है।

मुख्य बातें

भारतीय रेलवे ने कवच 4.0 की तैनाती के लिए ₹170 करोड़ मंजूर किए।
उत्तरी रेलवे के मुरादाबाद डिवीजन के शेष 712 रूट किलोमीटर पर यह प्रणाली लगाई जाएगी।
ट्रेन दुर्घटनाएँ 2014–15 में 135 से घटकर 2025–26 में 16 रह गई हैं; चालू वर्ष में जून तक केवल 2 दुर्घटनाएँ।
कॉन्सिक्वेंशियल एक्सीडेंट इंडेक्स 0.11 से घटकर 0.01 — लगभग 91% की कमी।
सुरक्षा व्यय 2013–14 में ₹39,200 करोड़ से बढ़कर 2026–27 में ₹1,20,389 करोड़ ।
6,671 स्टेशनों पर इंटरलॉकिंग और 10,395 एलसी गेट्स पर सुरक्षा सुविधा लागू।

भारतीय रेलवे ने स्वदेशी कवच 4.0 ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम की तैनाती के लिए ₹170 करोड़ की राशि मंजूर की है। रेल मंत्रालय ने 1 सितंबर 2026 को जारी बयान में बताया कि यह राशि उत्तरी रेलवे के मुरादाबाद डिवीजन के शेष 712 रूट किलोमीटर पर कवच प्रणाली स्थापित करने के लिए स्वीकृत की गई है। यह कदम रेलवे के राष्ट्रव्यापी सुरक्षा आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा है।

कवच 4.0 क्या करता है

कवच भारत में विकसित एक ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) प्रणाली है, जो ट्रेन संचालन की सुरक्षा को कई स्तरों पर सुनिश्चित करती है। यह प्रणाली 'सिग्नल पासिंग एट डेंजर' (SPAD) जैसी खतरनाक स्थितियों को रोकती है, असुरक्षित परिस्थितियों में स्वचालित रूप से ब्रेक लगाती है, कठिन परिस्थितियों में ट्रेन की गति को नियंत्रित करती है और दो ट्रेनों के बीच टक्कर की आशंका को काफी हद तक समाप्त करती है।

रेल मंत्रालय के अनुसार, कवच 4.0 लागू होने से चिन्हित सेक्शन में ट्रेन संचालन के लिए सुरक्षा की एक उन्नत परत जुड़ेगी, जो मौजूदा सिग्नलिंग ढाँचे को और सशक्त बनाएगी।

रेलवे सुरक्षा में सुधार के आँकड़े

रेल मंत्रालय ने जुलाई में जारी आँकड़ों में बताया था कि ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या 2014–15 में 135 से घटकर 2025–26 में 16 रह गई है। चालू वर्ष में जून तक केवल 2 दुर्घटनाएँ दर्ज की गई हैं।

'कॉन्सिक्वेंशियल एक्सीडेंट इंडेक्स' — अर्थात प्रति मिलियन ट्रेन-किलोमीटर होने वाली दुर्घटनाओं का अनुपात — 2014–15 में 0.11 से घटकर 2025–26 में 0.01 हो गया है, जो लगभग 91 प्रतिशत की कमी दर्शाता है। गौरतलब है कि यह सुधार ऐसे समय में आया है जब रेलवे ने सुरक्षा व्यय में भी ऐतिहासिक वृद्धि की है।

सुरक्षा पर खर्च में भारी बढ़ोतरी

सुरक्षा संबंधी कार्यों पर रेलवे का व्यय 2013–14 में ₹39,200 करोड़ से बढ़कर 2026–27 में ₹1,20,389 करोड़ हो गया है। इसके अतिरिक्त, 6,671 स्टेशनों पर केंद्रीकृत संचालन वाले इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम स्थापित किए गए हैं और सभी स्टेशनों पर पूर्ण ट्रैक सर्किटिंग प्रणाली भी लगाई गई है।

लेवल क्रॉसिंग गेट्स पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए 10,395 एलसी गेट्स पर इंटरलॉकिंग की सुविधा प्रदान की गई है, जो मानव त्रुटि की संभावना को न्यूनतम करती है।

आगे की राह

रेल मंत्रालय के बयान में स्पष्ट किया गया है कि मुरादाबाद डिवीजन में कवच की यह तैनाती भारतीय रेलवे के नेटवर्क पर कवच का दायरा बढ़ाने और रेलवे सिग्नलिंग व ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम को आधुनिक बनाने की व्यापक रणनीति का अंग है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी गति से विस्तार जारी रहा, तो कवच जल्द ही देश के प्रमुख रेल गलियारों की सुरक्षा की रीढ़ बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि कवच का राष्ट्रव्यापी विस्तार किस गति से हो रहा है — क्योंकि भारतीय रेलवे का कुल नेटवर्क लगभग 68,000 रूट किलोमीटर का है और 712 किमी उसका एक छोटा हिस्सा है। दुर्घटना आँकड़ों में सुधार उत्साहजनक है, किंतु 2023 के ओडिशा बालासोर हादसे जैसी त्रासदियाँ याद दिलाती हैं कि सिग्नलिंग विफलता के परिणाम कितने भयावह हो सकते हैं। जब तक कवच हर उच्च-घनत्व रेल गलियारे पर तैनात नहीं हो जाता, तब तक यह सुरक्षा कवच अधूरा ही रहेगा। मंत्रालय को विस्तार की समयसीमा और बजट का पारदर्शी रोडमैप सार्वजनिक करना चाहिए।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कवच 4.0 सिस्टम क्या है और यह कैसे काम करता है?
कवच 4.0 भारत में विकसित एक स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) प्रणाली है जो ट्रेनों को खतरनाक सिग्नल पार करने से रोकती है, जरूरत पड़ने पर स्वचालित ब्रेक लगाती है और टक्कर की आशंका को काफी कम करती है। यह सिस्टम ट्रेन की गति को कठिन परिस्थितियों में भी नियंत्रित रखता है।
मुरादाबाद डिवीजन में कवच 4.0 के लिए कितनी राशि मंजूर की गई है?
रेल मंत्रालय ने उत्तरी रेलवे के मुरादाबाद डिवीजन के 712 रूट किलोमीटर पर कवच 4.0 लगाने के लिए ₹170 करोड़ मंजूर किए हैं। यह घोषणा 1 सितंबर 2026 को की गई।
भारतीय रेलवे में दुर्घटनाएँ कितनी कम हुई हैं?
रेल मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या 2014–15 में 135 से घटकर 2025–26 में 16 रह गई है। कॉन्सिक्वेंशियल एक्सीडेंट इंडेक्स 0.11 से 0.01 पर आ गया है, जो लगभग 91 प्रतिशत की कमी है।
रेलवे सुरक्षा पर सरकार का खर्च कितना बढ़ा है?
सुरक्षा संबंधी कार्यों पर व्यय 2013–14 में ₹39,200 करोड़ से बढ़कर 2026–27 में ₹1,20,389 करोड़ हो गया है। इसके अलावा 6,671 स्टेशनों पर इंटरलॉकिंग और 10,395 लेवल क्रॉसिंग गेट्स पर सुरक्षा प्रणाली लागू की गई है।
कवच प्रणाली का देशभर में विस्तार कब तक होगा?
रेल मंत्रालय ने कवच का दायरा पूरे नेटवर्क पर बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन अभी तक राष्ट्रव्यापी तैनाती की कोई निश्चित समयसीमा सार्वजनिक नहीं की गई है। मुरादाबाद डिवीजन की यह तैनाती उसी व्यापक विस्तार योजना की एक कड़ी है।
राष्ट्र प्रेस
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