भारतीय रेलवे ने कवच 4.0 के लिए ₹170 करोड़ मंजूर किए, मुरादाबाद डिवीजन के 712 किमी ट्रैक पर होगी तैनाती
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रेलवे ने स्वदेशी कवच 4.0 ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम की तैनाती के लिए ₹170 करोड़ की राशि मंजूर की है। रेल मंत्रालय ने 1 सितंबर 2026 को जारी बयान में बताया कि यह राशि उत्तरी रेलवे के मुरादाबाद डिवीजन के शेष 712 रूट किलोमीटर पर कवच प्रणाली स्थापित करने के लिए स्वीकृत की गई है। यह कदम रेलवे के राष्ट्रव्यापी सुरक्षा आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा है।
कवच 4.0 क्या करता है
कवच भारत में विकसित एक ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) प्रणाली है, जो ट्रेन संचालन की सुरक्षा को कई स्तरों पर सुनिश्चित करती है। यह प्रणाली 'सिग्नल पासिंग एट डेंजर' (SPAD) जैसी खतरनाक स्थितियों को रोकती है, असुरक्षित परिस्थितियों में स्वचालित रूप से ब्रेक लगाती है, कठिन परिस्थितियों में ट्रेन की गति को नियंत्रित करती है और दो ट्रेनों के बीच टक्कर की आशंका को काफी हद तक समाप्त करती है।
रेल मंत्रालय के अनुसार, कवच 4.0 लागू होने से चिन्हित सेक्शन में ट्रेन संचालन के लिए सुरक्षा की एक उन्नत परत जुड़ेगी, जो मौजूदा सिग्नलिंग ढाँचे को और सशक्त बनाएगी।
रेलवे सुरक्षा में सुधार के आँकड़े
रेल मंत्रालय ने जुलाई में जारी आँकड़ों में बताया था कि ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या 2014–15 में 135 से घटकर 2025–26 में 16 रह गई है। चालू वर्ष में जून तक केवल 2 दुर्घटनाएँ दर्ज की गई हैं।
'कॉन्सिक्वेंशियल एक्सीडेंट इंडेक्स' — अर्थात प्रति मिलियन ट्रेन-किलोमीटर होने वाली दुर्घटनाओं का अनुपात — 2014–15 में 0.11 से घटकर 2025–26 में 0.01 हो गया है, जो लगभग 91 प्रतिशत की कमी दर्शाता है। गौरतलब है कि यह सुधार ऐसे समय में आया है जब रेलवे ने सुरक्षा व्यय में भी ऐतिहासिक वृद्धि की है।
सुरक्षा पर खर्च में भारी बढ़ोतरी
सुरक्षा संबंधी कार्यों पर रेलवे का व्यय 2013–14 में ₹39,200 करोड़ से बढ़कर 2026–27 में ₹1,20,389 करोड़ हो गया है। इसके अतिरिक्त, 6,671 स्टेशनों पर केंद्रीकृत संचालन वाले इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम स्थापित किए गए हैं और सभी स्टेशनों पर पूर्ण ट्रैक सर्किटिंग प्रणाली भी लगाई गई है।
लेवल क्रॉसिंग गेट्स पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए 10,395 एलसी गेट्स पर इंटरलॉकिंग की सुविधा प्रदान की गई है, जो मानव त्रुटि की संभावना को न्यूनतम करती है।
आगे की राह
रेल मंत्रालय के बयान में स्पष्ट किया गया है कि मुरादाबाद डिवीजन में कवच की यह तैनाती भारतीय रेलवे के नेटवर्क पर कवच का दायरा बढ़ाने और रेलवे सिग्नलिंग व ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम को आधुनिक बनाने की व्यापक रणनीति का अंग है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी गति से विस्तार जारी रहा, तो कवच जल्द ही देश के प्रमुख रेल गलियारों की सुरक्षा की रीढ़ बन सकता है।