1 सितंबर 2026
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जेवलिन मिसाइल को-प्रोडक्शन: टाटा-लॉकहीड-रेथियॉन में MoU, भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को नई ताकत

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जेवलिन मिसाइल को-प्रोडक्शन: टाटा-लॉकहीड-रेथियॉन में MoU, भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को नई ताकत

सारांश

भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों में बड़ी छलांग — टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स अब लॉकहीड मार्टिन और रेथियॉन के साथ मिलकर भारत में जेवलिन मिसाइल बनाएगी। यह MoU न केवल भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता को मज़बूत करता है, बल्कि इंडो-पैसिफिक आपूर्ति शृंखला को भी नई मज़बूती देता है।

मुख्य बातें

टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और जेवलिन जॉइंट वेंचर (लॉकहीड मार्टिन + रेथियॉन) ने 1 सितंबर 2026 को भारत में जेवलिन ऑल-अप-राउंड के सह-उत्पादन के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए।
टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स को प्रतिस्पर्धी मूल्यांकन के बाद प्राइम पार्टनर के रूप में चुना गया है।
MoU के तहत भारत में फाइनल असेंबली और इंटीग्रेशन फैसिलिटी स्थापित करने तथा कंपोनेंट निर्माण क्षमताओं पर विचार होगा।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इसे अमेरिका-भारत रक्षा साझेदारी को मज़बूत करने की दिशा में बड़ा कदम बताया।
यह पहल इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आपूर्ति शृंखला को अधिक भरोसेमंद बनाने के व्यापक लक्ष्य से जुड़ी है।

टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और जेवलिन जॉइंट वेंचर (JoJeVi) — जो लॉकहीड मार्टिन और रेथियॉन की संयुक्त साझेदारी से संचालित है — के बीच 1 सितंबर 2026 को भारत में जेवलिन ऑल-अप-राउंड मिसाइल के सह-उत्पादन के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस ऐतिहासिक औद्योगिक समझौते को भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी के नए अध्याय और भारत की स्वदेशी रक्षा विनिर्माण क्षमता के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

समझौते का विवरण

इस MoU के तहत टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और JoJeVi मिलकर भारत में जेवलिन ऑल-अप-राउंड के लिए फाइनल असेंबली और इंटीग्रेशन फैसिलिटी स्थापित करने तथा कंपोनेंट निर्माण क्षमताओं को विकसित करने पर विचार करेंगे। कई कंपनियों की दक्षता और विशेषज्ञता के आधार पर मूल्यांकन के बाद टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स को भविष्य के को-प्रोडक्शन प्रयासों के लिए प्राइम पार्टनर के रूप में चुना गया है।

यह समझौता जेवलिन प्रणाली के भावी उत्पादन को सुगम बनाएगा और भारतीय उद्योग के लिए विशेष अवसर सृजित करेगा। गौरतलब है कि जेवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल प्रणाली को दुनिया की सबसे उन्नत पोर्टेबल एंटी-आर्मर प्रणालियों में गिना जाता है।

राजदूत गोर की प्रतिक्रिया

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लॉकहीड मार्टिन की पोस्ट को री-पोस्ट करते हुए लिखा, "यह अमेरिका-भारत रक्षा साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। लॉकहीड मार्टिन, रेथियॉन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के बीच यह सहयोग अमेरिकी कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा करेगा, अमेरिका के रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत बनाएगा और भारत की विनिर्माण क्षमताओं को भी बढ़ावा देगा।"

राजदूत गोर ने स्पष्ट किया कि इस समझौते के बाद अमेरिकी जेवलिन मिसाइल का निर्माण भारत में किया जाएगा, जिससे दोनों देशों के रक्षा उद्योगों को एक साथ लाभ मिलेगा।

इंडो-पैसिफिक रणनीति से जुड़ाव

यह पहल ऐसे समय में आई है जब भारत और अमेरिका इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आपूर्ति शृंखला को अधिक मजबूत और भरोसेमंद बनाने पर ज़ोर दे रहे हैं। लॉकहीड मार्टिन के आधिकारिक बयान के अनुसार, यह समझौता "पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आपूर्ति शृंखला को और अधिक मजबूत और भरोसेमंद बनाएगा।"

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी रक्षा आयात निर्भरता घटाने और 'मेक इन इंडिया' के तहत स्वदेशी उत्पादन बढ़ाने की नीति पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। जेवलिन का भारत में को-प्रोडक्शन इस नीतिगत दिशा के अनुरूप एक ठोस कदम माना जा रहा है।

भारतीय रक्षा उद्योग पर असर

विशेषज्ञों के अनुसार, इस MoU से टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स को उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी तक पहुँच मिलेगी और भारतीय एयरोस्पेस व रक्षा क्षेत्र में उच्च-कुशल रोज़गार के अवसर सृजित होंगे। यह समझौता भारत के रक्षा निर्यात लक्ष्यों को भी बल दे सकता है, क्योंकि भारत में निर्मित कंपोनेंट वैश्विक जेवलिन आपूर्ति शृंखला का हिस्सा बन सकते हैं।

आगे की राह में दोनों पक्षों के बीच तकनीकी और वाणिज्यिक वार्ता जारी रहेगी, और फाइनल असेंबली सुविधा की स्थापना की समयसीमा समझौते के क्रियान्वयन चरण में तय होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी तकनीकी हस्तांतरण की गहराई होगी — क्या भारत केवल असेंबली हब बनेगा या वास्तविक कंपोनेंट निर्माण क्षमता भी विकसित होगी? अतीत में कई रक्षा MoU 'फाइनल असेंबली' के नाम पर स्क्रूड्राइवर-टेक्नोलॉजी तक सीमित रहे हैं। इंडो-पैसिफिक आपूर्ति शृंखला का तर्क भू-राजनीतिक रूप से ठोस है, परंतु भारतीय उद्योग के लिए दीर्घकालिक लाभ तभी सुनिश्चित होगा जब IP साझेदारी और निर्यात अधिकारों पर स्पष्ट शर्तें तय हों — जिनका इस MoU में अभी कोई उल्लेख नहीं है।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेवलिन मिसाइल को-प्रोडक्शन MoU क्या है?
यह टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और जेवलिन जॉइंट वेंचर (लॉकहीड मार्टिन व रेथियॉन की साझेदारी) के बीच 1 सितंबर 2026 को हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन है, जिसके तहत भारत में जेवलिन ऑल-अप-राउंड मिसाइल का सह-उत्पादन किया जाएगा। इसमें फाइनल असेंबली, इंटीग्रेशन फैसिलिटी और कंपोनेंट निर्माण क्षमताओं के विकास पर विचार शामिल है।
टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स को प्राइम पार्टनर क्यों चुना गया?
जेवलिन जॉइंट वेंचर ने कई कंपनियों की दक्षता और विशेषज्ञता के आधार पर मूल्यांकन के बाद टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स को भविष्य के को-प्रोडक्शन प्रयासों के लिए प्राइम पार्टनर के रूप में चुना। टाटा समूह की रक्षा व एयरोस्पेस विनिर्माण में स्थापित क्षमताएँ इस चयन का आधार बताई जा रही हैं।
इस समझौते से भारत को क्या फायदा होगा?
इस MoU से भारत में उन्नत रक्षा विनिर्माण क्षमता विकसित होगी, उच्च-कुशल रोज़गार के अवसर बनेंगे और भारत वैश्विक जेवलिन आपूर्ति शृंखला का हिस्सा बन सकेगा। यह 'मेक इन इंडिया' रक्षा नीति के अनुरूप भारत की आयात निर्भरता घटाने में भी सहायक होगा।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस पर क्या कहा?
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने एक्स पर लिखा कि यह अमेरिका-भारत रक्षा साझेदारी को मज़बूत करने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि यह सहयोग अमेरिकी कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा करेगा, अमेरिका के रक्षा औद्योगिक आधार को मज़बूत बनाएगा और भारत की विनिर्माण क्षमताओं को भी बढ़ावा देगा।
इंडो-पैसिफिक रणनीति में इस MoU की क्या भूमिका है?
लॉकहीड मार्टिन के अनुसार, यह पहल इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आपूर्ति शृंखला को अधिक मज़बूत और भरोसेमंद बनाएगी। ऐसे समय में जब भारत और अमेरिका इस क्षेत्र में रणनीतिक स्थिरता पर एकजुट हैं, भारत में जेवलिन उत्पादन आपूर्ति शृंखला की भौगोलिक विविधता और लचीलापन दोनों बढ़ाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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