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अदाणी ग्रुप शिवपुरी में ₹2,500 करोड़ का मिसाइल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाएगा, दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा निजी डिफेंस इकोसिस्टम

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अदाणी ग्रुप शिवपुरी में ₹2,500 करोड़ का मिसाइल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाएगा, दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा निजी डिफेंस इकोसिस्टम

सारांश

अदाणी ग्रुप ने शिवपुरी में ₹2,500 करोड़ के मिसाइल मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम की नींव रखी — दक्षिण एशिया में निजी क्षेत्र की यह पहली एंड-टू-एंड मिसाइल वैल्यू चेन होगी। यह कदम भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में निजी पूँजी की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।

मुख्य बातें

अदाणी ग्रुप मध्य प्रदेश के शिवपुरी में अगले तीन वर्षों में ₹2,500 करोड़ का इंटीग्रेटेड मिसाइल मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम स्थापित करेगा।
यह दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा निजी क्षेत्र मिसाइल इकोसिस्टम होगा — कच्चे माल से मिशन-रेडी मिसाइल तक पूरी वैल्यू चेन एक परिसर में।
परियोजना से लगभग 5,000 प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोज़गार और 50+ एमएसएमई को सहयोग मिलेगा।
यह प्रोजेक्ट भोपाल ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में किए गए ₹1.10 लाख करोड़ के वादे का हिस्सा है, जिससे 2030 तक 1.2 लाख नौकरियाँ अपेक्षित हैं।
अदाणी ग्रुप मध्य प्रदेश के कटनी में पहले ही ₹4,000 करोड़ से अधिक निवेश कर चुका है और गुना में ₹1,060 करोड़ की सीमेंट यूनिट की आधारशिला रखी है।

अदाणी ग्रुप ने 6 जुलाई 2025 को घोषणा की कि वह मध्य प्रदेश के शिवपुरी में एक इंटीग्रेटेड मिसाइल मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम स्थापित करने के लिए अगले तीन वर्षों में ₹2,500 करोड़ का निवेश करेगा। अदाणी एंटरप्राइजेज के डायरेक्टर जीत अदाणी ने शिवपुरी में नींव रखने के समारोह में इस परियोजना को भारत के निजी रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक करार दिया।

क्या है यह प्रोजेक्ट

शिवपुरी कॉम्प्लेक्स को दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा निजी क्षेत्र मिसाइल इकोसिस्टम बताया जा रहा है। इस सुविधा में कच्चे माल से लेकर मिशन-रेडी मिसाइल सिस्टम तक की पूरी वैल्यू चेन एक ही परिसर में होगी — जो सार्वजनिक क्षेत्र के बाहर अपनी तरह की पहली पहल होगी।

जीत अदाणी ने समारोह में कहा, "हम आज एक अहम मौके के लिए यहां जमा हुए हैं, जहां दक्षिण एशिया के सबसे बड़े प्राइवेट-सेक्टर मिसाइल इकोसिस्टम की नींव रखी जा रही है। यह फैक्ट्री कच्चे माल और मिशन के लिए तैयार मिसाइलों को एक ही छत के नीचे लाएगी, जो पब्लिक सेक्टर के बाहर ऐसा पहली बार होगा।"

मुख्य उत्पादन क्षमताएँ

जीत अदाणी के अनुसार, इस परिसर में मीडियम से लेकर लॉन्ग-रेंज मिसाइल सिस्टम का निर्माण होगा। इसके अलावा, कम्पोजिट प्रोपेलेंट प्रोडक्शन तथा टीएनटी व एक्सप्लोसिव-ग्रेड मटीरियल बनाने की सुविधाएँ भी यहाँ स्थापित की जाएंगी। इस कदम का उद्देश्य रक्षा आयात पर भारत की निर्भरता को कम करना है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार 'मेक इन इंडिया' के तहत निजी क्षेत्र की डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में भागीदारी को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है। गौरतलब है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े रक्षा आयातकों में से एक रहा है, और घरेलू उत्पादन में यह निवेश उस निर्भरता को कम करने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।

रोज़गार और एमएसएमई पर असर

जीत अदाणी ने बताया कि इस परियोजना से लगभग 5,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार मिलेगा। साथ ही, एक विशेष डिफेंस सप्लाई चेन के माध्यम से 50 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) की वृद्धि में भी सहयोग मिलेगा।

मध्य प्रदेश में अदाणी ग्रुप का व्यापक निवेश

जीत अदाणी ने स्पष्ट किया कि यह डिफेंस प्रोजेक्ट, भोपाल ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान अदाणी ग्रुप द्वारा मध्य प्रदेश में किए गए ₹1.10 लाख करोड़ के निवेश के वादे का हिस्सा है। इन निवेशों में हाइड्रो पंपेड स्टोरेज, सीमेंट, माइनिंग, स्मार्ट मीटर और थर्मल एनर्जी शामिल हैं। उम्मीद जताई गई है कि इन सभी निवेशों से 2030 तक राज्य में 1.2 लाख नौकरियाँ पैदा होंगी।

ग्रुप पहले ही कटनी जिले के अमेथा और कैमोर प्लांट में ₹4,000 करोड़ से अधिक का निवेश कर चुका है। अदाणी पावर फिलहाल मध्य प्रदेश को 1,200 मेगावाट बिजली की आपूर्ति कर रहा है, और 5,600 मेगावाट की अतिरिक्त आपूर्ति पर कार्य प्रगति पर है। इसके अलावा, लाहोरी, धार, रतलाम और उज्जैन में विंड एनर्जी परियोजनाएँ और उज्जैन में सीमेंट प्लांट की भी तैयारी चल रही है।

जीत अदाणी ने यह भी बताया कि ग्रुप ने हाल ही में गुना में ₹1,060 करोड़ की सीमेंट यूनिट की आधारशिला रखी है, जिसे उन्होंने जिले के इतिहास में सबसे बड़ा निवेश बताया।

आगे की राह

शिवपुरी मिसाइल मैन्युफैक्चरिंग परिसर के अगले तीन वर्षों में पूरी तरह चालू होने की उम्मीद है। यह परियोजना भारत की रणनीतिक आत्मनिर्भरता की दिशा में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका का प्रतीक है, और आने वाले वर्षों में देश के डिफेंस-इंडस्ट्रियल बेस को नई ऊँचाई देने का दावा करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — मिसाइल मैन्युफैक्चरिंग एक अत्यंत विनियमित और तकनीकी रूप से जटिल क्षेत्र है जहाँ निजी खिलाड़ियों का अनुभव अभी सीमित है। ₹2,500 करोड़ का आँकड़ा महत्वाकांक्षी है, परंतु रक्षा मंत्रालय की खरीद प्राथमिकताओं और डीआरडीओ के साथ तकनीकी साझेदारी की रूपरेखा अभी स्पष्ट नहीं है। यह भी गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में ₹1.10 लाख करोड़ के वादे और वास्तविक ज़मीनी प्रगति के बीच की खाई को भरने की ज़िम्मेदारी अदाणी ग्रुप पर है। बिना पारदर्शी प्रगति-रिपोर्टिंग के, ये घोषणाएँ निवेशक-समिट की रस्म से आगे नहीं जा सकतीं।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अदाणी ग्रुप का शिवपुरी मिसाइल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट क्या है?
यह मध्य प्रदेश के शिवपुरी में स्थापित होने वाला एक इंटीग्रेटेड मिसाइल मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम है, जिसमें अदाणी ग्रुप अगले तीन वर्षों में ₹2,500 करोड़ निवेश करेगा। इसे दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा निजी क्षेत्र मिसाइल इकोसिस्टम बताया जा रहा है, जिसमें कच्चे माल से लेकर मिशन-रेडी मिसाइल तक पूरी वैल्यू चेन एक ही परिसर में होगी।
शिवपुरी प्लांट में किस तरह की मिसाइलें और सामग्री बनेगी?
जीत अदाणी के अनुसार, इस परिसर में मीडियम से लॉन्ग-रेंज मिसाइल सिस्टम बनाए जाएंगे। इसके साथ ही कम्पोजिट प्रोपेलेंट प्रोडक्शन और टीएनटी व एक्सप्लोसिव-ग्रेड मटीरियल निर्माण की सुविधाएँ भी होंगी।
इस प्रोजेक्ट से कितने रोज़गार मिलेंगे?
जीत अदाणी ने बताया कि इस परियोजना से लगभग 5,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार मिलेगा। इसके अलावा, 50 से अधिक एमएसएमई को एक विशेष डिफेंस सप्लाई चेन के माध्यम से विकास का अवसर मिलेगा।
यह निवेश मध्य प्रदेश में अदाणी ग्रुप के बड़े निवेश वादे से कैसे जुड़ा है?
यह डिफेंस प्रोजेक्ट भोपाल ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में अदाणी ग्रुप द्वारा मध्य प्रदेश में किए गए ₹1.10 लाख करोड़ के निवेश के वादे का हिस्सा है। इन निवेशों में हाइड्रो पंपेड स्टोरेज, सीमेंट, माइनिंग, स्मार्ट मीटर और थर्मल एनर्जी शामिल हैं, जिनसे 2030 तक राज्य में 1.2 लाख नौकरियाँ पैदा होने की उम्मीद है।
यह प्लांट भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत ऐतिहासिक रूप से दुनिया के सबसे बड़े रक्षा आयातकों में शामिल रहा है। शिवपुरी जैसी घरेलू मिसाइल निर्माण सुविधाएँ रक्षा आयात पर निर्भरता कम करने और 'मेक इन इंडिया' के तहत रणनीतिक आत्मनिर्भरता बढ़ाने में सहायक होंगी। सार्वजनिक क्षेत्र के बाहर एंड-टू-एंड मिसाइल वैल्यू चेन की यह पहली पहल मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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