अदाणी डिफेंस ने भारतीय सेना को 2,000 स्वदेशी 'प्रहार' एलएमजी सौंपकर स्वदेशी निर्माण में नया आयाम स्थापित किया
सारांश
Key Takeaways
- अदाणी डिफेंस ने 2,000 स्वदेशी 'प्रहार' एलएमजी भारतीय सेना को सौंप दी हैं।
- यह उपलब्धि भारत की छोटे हथियार निर्माण क्षमता में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
- ग्वालियर स्थित यूनिट नजदीकी लड़ाई के हथियारों का उत्पादन करने की योजना बना रही है।
- इस प्लांट की वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 1 लाख हथियार है।
- 90 प्रतिशत सामग्री स्वदेशी स्रोतों से प्राप्त की जाती है।
नई दिल्ली/ग्वालियर, 28 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अदाणी ग्रुप की सहायक कंपनी अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने भारतीय सेना को 7.62 मिमी की 2,000 स्वदेशी 'प्रहार' लाइट मशीन गन (एलएमजी) प्रदान कर दी है। यह उपलब्धि भारत के छोटे हथियार निर्माण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रही है।
कंपनी की भविष्य की योजनाओं में ग्वालियर स्थित यह यूनिट नजदीकी लड़ाई के लिए हथियारों का उत्पादन शुरू करने की तैयारी कर रही है, जिससे भारत की स्वदेशी हथियार निर्माण क्षमता में और वृद्धि होगी।
पहली खेप की डिलीवरी केवल 7 महीनों में पूरी की गई, जो निर्धारित समय से 11 महीने पहले है। इसके अतिरिक्त, 'फर्स्ट-ऑफ-प्रोडक्शन मॉडल' (एफओपीएम) को केवल 6 महीनों में विकसित किया गया, जबकि इसके लिए 18 महीने का समय निर्धारित था। 'बल्क प्रोडक्शन क्लीयरेंस' (बीपीसी) प्राप्त करने के बाद बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया जा सका।
इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव और डीजी एक्विजिशन ए अनबरसु सहित भारतीय सशस्त्र बलों के उच्च अधिकारी भी शामिल रहे।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्थित यह आधुनिक स्मॉल आर्म्स फैक्ट्री देश की पहली पूरी तरह इंटीग्रेटेड प्राइवेट सेक्टर हथियार निर्माण यूनिट है। यहां 'प्रहार' एलएमजी का निर्माण होने से इन्फैंट्री हथियारों के लिए आयात पर निर्भरता कम होगी और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
करीब 100 एकड़ में फैली इस यूनिट में बैरल निर्माण, बोल्ट कैरियर और रिसीवर निर्माण, उन्नत कंप्यूटर न्यूमेरिकल कंट्रोल (सीएनसी) मशीनिंग, रोबोटिक्स, सर्फेस ट्रीटमेंट, सटीक मेट्रोलॉजी, एक धातु विज्ञान प्रयोगशाला और 25 मीटर की अंडरग्राउंड फायरिंग रेंज जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
हर हथियार को सेना में भेजने से पहले उसकी लाइफ-साइकिल टेस्टिंग, बैलिस्टिक जांच और विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों में परीक्षण किया जाता है ताकि वह सेना के मानकों पर पूरी तरह खरा उतर सके।
यह प्लांट हर साल लगभग 1 लाख हथियार बनाने की क्षमता रखता है और इसमें 90 प्रतिशत से अधिक सामग्री देश के भीतर से ही ली जाती है। इससे मध्य प्रदेश में रोजगार बढ़ने के साथ-साथ एमएसएमई सेक्टर को भी मजबूती मिल रही है।
इसके अलावा, कंपनी का कानपुर (उत्तर प्रदेश) में स्थित गोला-बारूद कॉम्प्लेक्स भी इस उत्पादन को समर्थन करता है, जिसकी वार्षिक क्षमता लगभग 30 करोड़ राउंड छोटे हथियारों के गोला-बारूद बनाने की है। भविष्य में यहां बड़े और मध्यम कैलिबर के गोला-बारूद भी बनाए जाएंगे।
इस तरह डिजाइन, निर्माण और सप्लाई चेन को एक साथ जोड़ने की यह रणनीति न केवल उत्पादन को तेज करेगी, बल्कि भारत की रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखेगी।