स्वतंत्रता दिवस से पहले असम में कड़ी सुरक्षा, उल्फा-आई और एनएससीएन के बहिष्कार आह्वान के बाद अलर्ट
सारांश
मुख्य बातें
प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम-इंडिपेंडेंट (उल्फा-आई) और एनएससीएन/जीपीआरएन द्वारा स्वतंत्रता दिवस समारोहों के बहिष्कार का आह्वान किए जाने के बाद असम में सुरक्षा व्यवस्था को व्यापक रूप से चाक-चौबंद कर दिया गया है। अधिकारियों ने शुक्रवार, 14 अगस्त को बताया कि राज्यभर में शांतिपूर्ण समारोह सुनिश्चित करने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत किया गया है और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
बहिष्कार आह्वान की पृष्ठभूमि
उल्फा-आई और एनएससीएन/जीपीआरएन ने असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और नागालैंड के निवासियों से स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों से दूर रहने की अपील की है। हालांकि उल्लेखनीय बात यह है कि इन संगठनों ने इस वर्ष असम में बाढ़ की स्थिति का हवाला देते हुए आम हड़ताल (बंद) का आह्वान नहीं किया — जो पिछले कई वर्षों की परिपाटी से अलग है। उल्फा-आई ऐतिहासिक रूप से एक संप्रभु असम की माँग के तहत राष्ट्रीय पर्वों का विरोध करता रहा है।
सुरक्षा के विशेष इंतजाम
पुलिस ने समारोह स्थलों के अलावा महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों, सार्वजनिक स्थानों और अन्य संवेदनशील ठिकानों पर सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया है। अतिरिक्त गश्त और चौबीसों घंटे निगरानी की व्यवस्था की गई है। उग्रवादियों की आवाजाही और किसी भी विध्वंसक गतिविधि को रोकने के लिए अंतरराज्यीय सीमाओं पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, "हमें भरोसा है कि आजादी दिवस बिना किसी घटना के शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होगा।"
उच्च-स्तरीय सुरक्षा समीक्षा
इस सप्ताह की शुरुआत में मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक की संयुक्त अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय बैठक में सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई। वरिष्ठ जिला अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इसमें भागीदारी की। बैठक में तोड़फोड़-रोधी उपाय, संवेदनशील प्रतिष्ठानों की निगरानी, सुरक्षा एजेंसियों के बीच खुफिया जानकारी साझा करना, रूट सैनिटाइजेशन, जाँच तंत्र और समारोह स्थलों की चौबीसों घंटे निगरानी जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री और सरकार की भूमिका
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा गुवाहाटी के खानापारा मैदान में राष्ट्रीय ध्वज फहराएँगे, जबकि मंत्री और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी राज्यभर के विभिन्न स्थानों पर समारोहों की अगुवाई करेंगे। गौरतलब है कि 2022 में इसी तरह के बहिष्कार और शटडाउन आह्वान के बाद मुख्यमंत्री सरमा ने कहा था कि समारोहों में लोगों की भारी भागीदारी ने स्वतंत्र असम की माँग करने वालों को करारा जवाब दिया है। 2021 में उल्फा-आई ने दशकों में पहली बार स्वतंत्रता दिवस पर बंद का आह्वान नहीं किया था, जिसका मुख्यमंत्री सरमा ने स्वागत करते हुए संगठन के प्रमुख परेश बरुआ से केंद्र सरकार के साथ सार्थक वार्ता के लिए आगे आने का आग्रह किया था।
आगे की स्थिति
यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर में राष्ट्रीय पर्वों के अवसर पर इस तरह के बहिष्कार आह्वान एक पुरानी परिपाटी रही है। अधिकारी इस वर्ष केवल बहिष्कार की अपील को देखते हुए — बंद के बिना — समन्वित सुरक्षा उपायों और कड़ी निगरानी के बल पर शांतिपूर्ण समारोह सुनिश्चित करने पर भरोसा कर रहे हैं। सुरक्षा बल किसी भी बाधा की कोशिश पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।