8 अगस्त 2026
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उल्फा-I के चार कैडरों ने अरुणाचल के लोंगडिंग में असम राइफल्स के सामने हथियार डाले

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उल्फा-I के चार कैडरों ने अरुणाचल के लोंगडिंग में असम राइफल्स के सामने हथियार डाले

सारांश

अरुणाचल प्रदेश के लोंगडिंग में उल्फा-I के चार कट्टर कैडरों ने असम राइफल्स के सामने हथियार डाले — और उसी दिन तिनसुकिया में दो अन्य संदिग्ध सदस्य एके-56 राइफलों और हैंड ग्रेनेड के साथ गिरफ्तार हुए। पूर्वोत्तर में सुरक्षा बलों की दोहरी कार्रवाई उग्रवाद के खिलाफ बढ़ते दबाव का संकेत है।

मुख्य बातें

उल्फा-I के चार कट्टर कैडरों ने 8 अगस्त 2026 को अरुणाचल प्रदेश के लोंगडिंग जिले में असम राइफल्स के सामने आत्मसमर्पण किया।
सरेंडर के दौरान चार हथियार , गोला-बारूद और युद्ध सामग्री सुरक्षा बलों को सौंपी गई।
तिनसुकिया , असम में उल्फा-I के दो कथित सदस्य — हुमेनज्योति बरुआ (27) और पापू मोरन (30) — गिरफ्तार किए गए।
गिरफ्तारी में दो एके-56 राइफल , 172 कारतूस और दो हैंड ग्रेनेड बरामद हुए।
अधिकारियों के अनुसार दोनों संदिग्ध म्यांमार से जयरामपुर के रास्ते असम में घुसे थे और तिनसुकिया में नागरिकों पर हमले की कथित योजना बना रहे थे।

प्रतिबंधित संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (इंडिपेंडेंट) — जिसे उल्फा-I के नाम से जाना जाता है — के चार कट्टर कैडरों ने 8 अगस्त 2026 को अरुणाचल प्रदेश के लोंगडिंग जिले में असम राइफल्स के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और अपने हथियार तथा गोला-बारूद सुरक्षा बलों को सौंप दिए। रक्षा विभाग के एक प्रवक्ता के अनुसार यह सरेंडर खुफिया जानकारी पर आधारित एक सुनियोजित अभियान का परिणाम था।

ऑपरेशन का घटनाक्रम

लोंगडिंग जिले के चुपखाओ ट्रैक पर चलाए गए इस अभियान से पहले सुरक्षा बलों ने लंबे समय तक खुफिया जानकारी जुटाई, निरंतर निगरानी रखी और सटीक ऑपरेशनल प्लानिंग की। अंततः चारों विद्रोहियों को हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने के लिए राजी किया गया। आत्मसमर्पण के दौरान कैडरों ने चार हथियार, गोला-बारूद और युद्ध से जुड़ी अन्य सामग्री सुरक्षा बलों को सौंपी।

सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया

रक्षा विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि इस सफल अभियान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस इलाके में सुरक्षा बलों की उग्रवाद-विरोधी कोशिशों की प्रभावशीलता को साबित किया है। एक आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया कि भारतीय सशस्त्र बल पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थायी शांति, स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के अपने संकल्प पर अडिग हैं। सुरक्षा बल मजबूत ऑपरेशनल उपायों के साथ-साथ लोगों तक पहुँचने की कोशिशें भी जारी रखे हुए हैं, ताकि गुमराह युवाओं को हिंसा छोड़ने और शांति का रास्ता अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

उल्फा-I की ऑपरेशनल क्षमता पर असर

इन चार कैडरों के आत्मसमर्पण और हथियारों की बरामदगी को इलाके में उल्फा-I की ऑपरेशनल क्षमताओं के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब सुरक्षा एजेंसियाँ पूर्वोत्तर में विद्रोही संगठनों के नेटवर्क को कमजोर करने के लिए लगातार दबाव बना रही हैं। गौरतलब है कि इस सरेंडर से क्षेत्र में सक्रिय अन्य विद्रोहियों को भी मुख्यधारा में लौटने का संदेश मिलने की उम्मीद है।

तिनसुकिया में उल्फा-I के दो संदिग्ध गिरफ्तार

इस बीच, असम के तिनसुकिया जिले में एक अलग खुफिया-आधारित अभियान में उल्फा-I के दो कथित सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार व्यक्तियों की पहचान पानीटोला निवासी हुमेनज्योति बरुआ उर्फ सियोर असम (27 वर्ष) और बाघजान निवासी पापू मोरन उर्फ मनोज (30 वर्ष) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार दोनों प्रतिबंधित संगठन के स्व-घोषित सेकंड लेफ्टिनेंट हैं।

अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जाँच से पता चला है कि दोनों कथित तौर पर अरुणाचल प्रदेश के जयरामपुर के रास्ते म्यांमार से असम में दाखिल हुए थे। असम पुलिस ने केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग से जागुन बाजार में उनकी स्विफ्ट कार को रोककर उन्हें हिरासत में लिया।

बरामद हथियार और कथित षड्यंत्र

इस ऑपरेशन में पुलिस ने दो एके-56 असॉल्ट राइफल, एके-सीरीज के 172 कारतूस, दो हैंड ग्रेनेड, बैकपैक, जंगल में जीवित रहने की सामग्री, सिरिंज और ओपिओइड-आधारित दवाओं वाली मेडिकल किट तथा युद्ध में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री बरामद की। अधिकारियों का दावा है कि उल्फा-I ने इन दोनों उग्रवादियों को तिनसुकिया शहर में आम नागरिकों पर हमला करने का काम सौंपा था, ताकि भय और दहशत फैलाई जा सके — हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी बाकी है।

पूर्वोत्तर में उग्रवाद-विरोधी अभियानों की यह श्रृंखला दर्शाती है कि सुरक्षा बल न केवल विद्रोहियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित कर रहे हैं, बल्कि सक्रिय खतरों को भी समय रहते निष्क्रिय करने में सफल हो रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पूर्वानुमानित खुफिया-आधारित रणनीति पर काम कर रहे हैं। हालाँकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि उल्फा-I दशकों से पूर्वोत्तर में सक्रिय है और इससे पहले भी आत्मसमर्पण के दौर आए हैं, लेकिन संगठन पूरी तरह निष्क्रिय नहीं हुआ। असली कसौटी यह होगी कि आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों के पुनर्वास और मुख्यधारा में एकीकरण की प्रक्रिया कितनी प्रभावी रहती है — क्योंकि बिना ठोस पुनर्वास के, विद्रोह की जड़ें बनी रहती हैं।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उल्फा-I क्या है और यह क्यों प्रतिबंधित है?
यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (इंडिपेंडेंट) — उल्फा-I — एक सशस्त्र विद्रोही संगठन है जो असम की स्वतंत्रता की माँग करता है और भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित है। यह संगठन म्यांमार से संचालित होता है और पूर्वोत्तर भारत में हिंसक गतिविधियों के लिए जिम्मेदार रहा है।
लोंगडिंग में उल्फा-I कैडरों के सरेंडर का क्या महत्व है?
चार कट्टर कैडरों का आत्मसमर्पण और हथियारों की बरामदगी इलाके में उल्फा-I की ऑपरेशनल क्षमता को कमजोर करती है। रक्षा विभाग के अनुसार यह सफलता खुफिया जानकारी पर आधारित निरंतर निगरानी और सटीक ऑपरेशनल प्लानिंग का परिणाम है।
तिनसुकिया में गिरफ्तार उल्फा-I के संदिग्धों पर क्या आरोप हैं?
अधिकारियों का दावा है कि हुमेनज्योति बरुआ और पापू मोरन को तिनसुकिया शहर में आम नागरिकों पर हमला करने का काम सौंपा गया था। दोनों कथित तौर पर म्यांमार से जयरामपुर के रास्ते असम में दाखिल हुए थे और उनके पास एके-56 राइफलें, हैंड ग्रेनेड और अन्य युद्ध सामग्री बरामद हुई।
इन ऑपरेशनों में कौन-से हथियार बरामद हुए?
लोंगडिंग सरेंडर में चार हथियार और गोला-बारूद बरामद हुए। तिनसुकिया ऑपरेशन में दो एके-56 असॉल्ट राइफल, 172 कारतूस, दो हैंड ग्रेनेड, मेडिकल किट और जंगल में जीवित रहने की सामग्री जब्त की गई।
पूर्वोत्तर में उग्रवाद-विरोधी अभियानों की मौजूदा स्थिति क्या है?
सुरक्षा बल पूर्वोत्तर में खुफिया जानकारी के आधार पर लगातार अभियान चला रहे हैं और साथ ही विद्रोहियों को मुख्यधारा में लाने के लिए संवाद प्रक्रिया भी जारी है। भारतीय सशस्त्र बलों ने स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
राष्ट्र प्रेस
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