सविता पूनिया की अभेद्य दीवार: भारत ने इंग्लैंड को 0-0 से रोका, FIH महिला हॉकी विश्व कप के अगले दौर में प्रवेश
सारांश
मुख्य बातें
एमस्टवीन (नीदरलैंड्स) में 20 अगस्त को खेले गए FIH महिला हॉकी विश्व कप के पूल डी मुकाबले में भारत और इंग्लैंड के बीच रोमांचक संघर्ष गोलरहित ड्रॉ पर समाप्त हुआ। भारतीय गोलकीपर सविता पूनिया ने पूरे मैच में अजेय प्रदर्शन करते हुए इंग्लैंड के हर हमले को विफल किया, और इस एक अंक के साथ भारतीय टीम ने टूर्नामेंट के अगले दौर में अपनी जगह पक्की कर ली।
मुख्य घटनाक्रम
पहले क्वार्टर में भारत के लिए आक्रमण की शुरुआत सहज नहीं रही। इश्किा ने इंग्लैंड के डिफेंस को चुनौती देते हुए एक धारदार शॉट लगाया, लेकिन इंग्लिश गोलकीपर ने उसे रोक लिया। नवनीत द्वारा पेनल्टी कॉर्नर पर लगाया गया शॉट अमान्य घोषित किया गया। भारत को दो और स्कोरिंग अवसर मिले, परंतु टीम उनका फायदा नहीं उठा सकी।
दूसरे क्वार्टर में भारत ने आक्रामकता बढ़ाई और इंग्लैंड के रक्षापंक्ति पर लगातार दबाव बनाए रखा। क्वार्टर के अंतिम क्षणों में इंग्लैंड को एक सुनहरा मौका मिला, लेकिन ज्योति की सतर्कता ने उस प्रयास को गोल नहीं बनने दिया।
सविता पूनिया का शानदार बचाव
तीसरा क्वार्टर निर्णायक साबित हुआ जब इंग्लैंड ने भारतीय गोलपोस्ट पर एक के बाद एक हमले किए। सविता पूनिया ने हर बार अपनी टीम की ढाल बनकर इंग्लैंड के गोल के सपने को तोड़ा। इंग्लैंड ने इस क्वार्टर में कई पेनल्टी कॉर्नर भी हासिल किए, किंतु सविता की दृढ़ता के आगे वे बेबस रहे।
चौथे क्वार्टर में भारत ने आक्रामक शुरुआत की, लेकिन इंग्लैंड ने जल्द ही भारतीय डिफेंस पर दबाव बना दिया। इंग्लैंड को लगातार दो पेनल्टी कॉर्नर मिले, पर गोलकीपर सविता और भारत के समर्थ डिफेंडरों ने दोनों प्रयासों को विफल कर दिया।
भारत अगले दौर में, इंग्लैंड बाहर
इस 0-0 के ड्रॉ के परिणामस्वरूप भारत ने पूल डी से अगले दौर में प्रवेश कर लिया, जबकि इंग्लैंड का टूर्नामेंट में सफर समाप्त हो गया। मैच के बाद इंग्लैंड की खिलाड़ियाँ मैदान पर ही भावुक हो गईं — यह दृश्य उनकी निराशा और मेहनत दोनों को बयाँ करता था।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय महिला हॉकी टीम अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार अपनी उपस्थिति मज़बूत कर रही है। अगले दौर में भारत का मुकाबला और कठिन प्रतिद्वंद्वियों से होगा, और सविता पूनिया जैसी अनुभवी खिलाड़ियों की भूमिका और भी अहम हो जाएगी। टीम के प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया है कि रक्षापंक्ति की मज़बूती ही इस टूर्नामेंट में भारत का सबसे बड़ा हथियार है।