अदाणी डिफेंस का ₹2,500 करोड़ का शिलान्यास: शिवपुरी बनेगा दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा निजी मिसाइल हब
सारांश
मुख्य बातें
अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने 5 जुलाई 2025 को शिवपुरी के कोलारस क्षेत्र में ₹2,500 करोड़ की लागत से दक्षिण एशिया के निजी क्षेत्र के सबसे बड़े मिसाइल एवं एडवांस्ड डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम का शिलान्यास किया। केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में यह शिलान्यास संपन्न कराया। यह परियोजना ग्वालियर-चंबल अंचल को देश के अग्रणी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।
परियोजना का दायरा और उत्पाद
इस डिफेंस कॉम्प्लेक्स में आधुनिक मिसाइल प्रणालियाँ, प्रिसिजन-गाइडेड म्यूनिशन और अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों का निर्माण किया जाएगा। परियोजना का रणनीतिक स्थान — कोटा कॉरिडोर और बॉम्बे-ग्वालियर राष्ट्रीय राजमार्ग के निकट — देशभर के सैन्य प्रतिष्ठानों तक रक्षा उपकरणों की त्वरित आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। इससे भारत की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता और निर्यात संभावनाओं को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
रोज़गार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर
केंद्रीय मंत्री सिंधिया के अनुसार, इस परियोजना से लगभग 5,000 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर उत्पन्न होंगे। इसके अतिरिक्त, ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के सैकड़ों सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) रक्षा उत्पादन की सप्लाई चेन से जुड़ेंगे, जिससे स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को व्यापक बल मिलेगा। यह परियोजना 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को भी मजबूती देगी।
सिंधिया परिवार की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ाव
मंत्री सिंधिया ने इस अवसर पर सिंधिया परिवार की रक्षा परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महाराज महादजी सिंधिया के शासनकाल में मथुरा, दिल्ली, ग्वालियर, कालपी और गोहद में आयुध निर्माण कारखाने एवं शस्त्रागार स्थापित किए गए थे। उन्होंने यह भी बताया कि महाराजा जीवाजीराव सिंधिया द्वारा ग्वालियर में स्थापित जीवाजी इंडस्ट्रियल रिसर्च लेबोरेटरी (JIRL) को रक्षा मंत्रालय को समर्पित किया गया था, जो आज डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (DRDE) के रूप में सक्रिय है। सिंधिया ने शिवपुरी में इस नई परियोजना को उसी गौरवशाली परंपरा का नया अध्याय बताया।
राष्ट्रीय रक्षा नीति के संदर्भ में महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार रक्षा आयात पर निर्भरता घटाने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए नीतिगत प्रयास तेज कर रही है। सिंधिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक गति से आगे बढ़ रहा है। गौरतलब है कि भारत दुनिया के शीर्ष रक्षा आयातकों में रहा है, और इस परिप्रेक्ष्य में निजी क्षेत्र की इस पैमाने की भागीदारी नीतिगत बदलाव का संकेत देती है। आने वाले वर्षों में यह परियोजना भारत के रक्षा निर्यात लक्ष्यों को पूरा करने में भी भूमिका निभा सकती है।