शिवपुरी में ₹2,500 करोड़ के अदाणी डिफेंस प्लांट का शिलान्यास 5 जुलाई को, सिंधिया करेंगे भूमिपूजन
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया 5 जुलाई 2026 को दोपहर 1 बजे मध्य प्रदेश के शिवपुरी में अदाणी समूह के ₹2,500 करोड़ के अत्याधुनिक डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का भूमिपूजन करेंगे। यह परियोजना ग्वालियर-चंबल अंचल को देश के उभरते रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।
परियोजना का स्वरूप और लक्ष्य
शिवपुरी में स्थापित होने वाला यह संयंत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' अभियान तथा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के औद्योगिक विकास के विजन के अनुरूप है। परियोजना का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में पूर्ण रूप से तैयार होकर उत्पादन प्रारंभ करना है।
यह महज निवेश की घोषणा नहीं, बल्कि निश्चित समय-सीमा के साथ क्रियान्वित की जा रही एक औद्योगिक परियोजना बताई जा रही है। इससे क्षेत्र में लगभग 5,000 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर सृजित होने का अनुमान है।
ग्वालियर-चंबल में उभरता डिफेंस इकोसिस्टम
ग्वालियर में पहले से संचालित अदाणी स्मॉल आर्म्स मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स देश के सबसे बड़े निजी रक्षा विनिर्माण परिसरों में शामिल है। इस प्लांट में निर्मित 'प्रहार' लाइट मशीन गन (LMG) की पहली खेप भारतीय सेना को निर्धारित समय-सीमा से 11 माह पहले सौंपी जा चुकी है — जो इस परिसर की उल्लेखनीय उपलब्धि रही है।
ग्वालियर के मौजूदा प्लांट से पहले ही 25 से अधिक स्थानीय एमएसएमई (MSME) जुड़े हुए हैं और वहाँ लगभग 3,000 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोज़गार सृजित हो चुके हैं। शिवपुरी की नई परियोजना से यह दायरा और विस्तृत होगा तथा क्षेत्र के छोटे एवं मध्यम उद्यमों को रक्षा उत्पादन की सप्लाई चेन से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
सिंधिया के प्रयासों से बढ़ता औद्योगिक निवेश
केंद्रीय मंत्री सिंधिया के सतत प्रयासों से ग्वालियर-चंबल अंचल में औद्योगिक निवेश की गति तेज़ हुई है। बदरवास में जैकेट निर्माण इकाई, गुना में ₹1,059 करोड़ की सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट, और अब शिवपुरी में ₹2,500 करोड़ का डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग प्लांट — ये परियोजनाएँ मिलकर इस पूरे क्षेत्र को मध्य भारत के प्रमुख औद्योगिक एवं निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करने की ओर इशारा करती हैं।
गौरतलब है कि ग्वालियर-चंबल अंचल ऐतिहासिक रूप से औद्योगिक निवेश के मामले में मध्य प्रदेश के अन्य हिस्सों से पीछे रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार रक्षा क्षेत्र में निजी भागीदारी को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित कर रही है।
आगे क्या
भूमिपूजन के बाद परियोजना के तीन वर्षों में उत्पादन-चरण में पहुँचने की उम्मीद है। शिवपुरी और ग्वालियर के दोनों संयंत्रों के एकसाथ संचालित होने से ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में एक सशक्त रक्षा विनिर्माण गलियारा बनने की संभावना है, जो आने वाले वर्षों में एमएसएमई और स्थानीय रोज़गार के लिए दीर्घकालिक अवसर प्रदान कर सकता है।