एससीओ शिखर सम्मेलन: बिश्केक में 'बिश्केक घोषणा' पर हस्ताक्षर, PM मोदी ने आतंकवाद पर दिया कड़ा संदेश
सारांश
मुख्य बातें
शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के 26वें शिखर सम्मेलन में मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं ने ऐतिहासिक 'बिश्केक घोषणा' पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों ने एससीओ की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों को स्वीकृति दी।
मुख्य घटनाक्रम: क्या-क्या हुआ बिश्केक में
सम्मेलन के दौरान नेताओं ने 7 जून 2002 के एससीओ चार्टर में संशोधन और नए प्रावधान जोड़ने संबंधी प्रोटोकॉल पर भी हस्ताक्षर किए। यह संशोधन संगठन के विस्तारित दायरे और बदलती भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को दर्शाता है।
एससीओ नेताओं ने सदस्य देशों की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए यूनिवर्सल सेंटर फॉर काउंटरिंग सिक्योरिटी चैलेंजेज एंड थ्रेट्स के नियमों को मंजूरी दी। इसके साथ ही एससीओ के एंटी-नारकोटिक्स सेंटर की कार्यकारी समिति के गठन और संचालन से जुड़े दस्तावेज पर भी हस्ताक्षर किए गए।
नशा-विरोधी और साइबर सुरक्षा पर बड़े फैसले
सदस्य देशों ने वर्ष 2030 तक नशे की लत और मादक पदार्थों की तस्करी से मुकाबले के लिए एक साझा सहयोग कार्यक्रम पर सहमति जताई। 2030 तक सिंथेटिक ड्रग्स और उनसे जुड़े रसायनों के प्रसार को रोकने के लिए भी एक संयुक्त रणनीति अपनाने का निर्णय लिया गया।
नेताओं ने 2026-2028 की अवधि के लिए अंतरराष्ट्रीय सूचना सुरक्षा सुनिश्चित करने संबंधी सहयोग योजना को भी हरी झंडी दी। इसके अलावा 2026-2031 की अवधि के लिए जैव विविधता संरक्षण और सतत प्रबंधन पर एक साझा पहल पर भी सहमति बनी।
गौरतलब है कि एससीओ सदस्य देशों ने 2026-2030 के लिए ग्रीन टेक्नोलॉजी कॉरिडोर (वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग) स्थापित करने के कार्यक्रम और सदस्य देशों के बंदरगाहों तथा लॉजिस्टिक्स केंद्रों के विकास के लिए रोडमैप पर भी हस्ताक्षर किए।
PM मोदी का आतंकवाद पर कड़ा संदेश
शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद पूरी मानवता के लिए एक गंभीर चुनौती बना हुआ है और इससे लड़ाई केवल प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रह सकती।
मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'हमें आतंकवाद के वित्तपोषण, भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित ठिकानों के पूरे तंत्र को खत्म करना होगा। आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दे पर दोहरे मापदंडों की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।'
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान तनाव की पृष्ठभूमि में एससीओ मंच पर आतंकवाद-प्रायोजन का मुद्दा विशेष रूप से संवेदनशील रहा है। मोदी ने आगे कहा कि जो देश आतंकवाद को अपनी नीति का औजार बनाते हैं और आतंकियों को पनाह तथा समर्थन देते हैं, उन्हें स्पष्ट संदेश दिया जाना चाहिए कि आतंकवाद किसी के लिए भी रणनीतिक संपत्ति नहीं हो सकता।
आगे की राह: एससीओ का विस्तृत एजेंडा
बिश्केक में हस्ताक्षरित दस्तावेजों की व्यापकता — सुरक्षा से लेकर पर्यावरण, व्यापार और साइबर क्षेत्र तक — यह दर्शाती है कि एससीओ अपने मूल सुरक्षा-केंद्रित ढाँचे से आगे बढ़कर एक बहुआयामी क्षेत्रीय मंच के रूप में विकसित हो रहा है। आने वाले महीनों में इन समझौतों के क्रियान्वयन की दिशा और गति पर सदस्य देशों की नज़र रहेगी।