एससीओ शिखर सम्मेलन 2026: बिश्केक में 31 अगस्त से, शी चिनफिंग होंगे शामिल
सारांश
मुख्य बातें
शांगहाई सहयोग संगठन (एससीओ) का 2026 का वार्षिक शिखर सम्मेलन 31 अगस्त और 1 सितंबर को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित होगा। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग इस सम्मेलन में भाग लेंगे और अपना संबोधन देंगे। यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं और एससीओ की भूमिका पर नए सिरे से चर्चा छिड़ी हुई है।
मुख्य घटनाक्रम
बिश्केक में होने वाले इस शिखर सम्मेलन में एससीओ के सदस्य देशों के प्रमुख एकत्रित होंगे। शी चिनफिंग पिछले कई वर्षों से लगातार एससीओ शिखर सम्मेलनों में भाग लेते आए हैं — ताजिकिस्तान के दुशांबे से लेकर रूस के उफा, कजाखस्तान के अस्ताना और चीन के थ्येनचिन तक। प्रत्येक मंच पर उन्होंने न्यायसंगत और समतापूर्ण अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था की स्थापना तथा सतत विकास एवं साझा समृद्धि के विषयों पर चीन का पक्ष रखा है।
वैश्विक शासन पहल की पृष्ठभूमि
एक वर्ष पूर्व थ्येनचिन में आयोजित 'एससीओ+' सम्मेलन में शी चिनफिंग ने 'वैश्विक शासन पहल' प्रस्तुत की थी। यह पहल उनकी पहले से घोषित वैश्विक विकास पहल, वैश्विक सुरक्षा पहल और वैश्विक सभ्यता पहल के बाद आई — जिसे चीन अंतर्राष्ट्रीय स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान के रूप में प्रस्तुत करता है। आलोचकों का कहना है कि ये पहलें वैश्विक संस्थाओं में चीन के प्रभाव को विस्तार देने की रणनीति का हिस्सा हैं।
एससीओ की विस्तार-यात्रा
गौरतलब है कि पिछले 25 वर्षों में एससीओ 6 संस्थापक सदस्यों से बढ़कर दुनिया का सबसे बड़ा क्षेत्रीय संगठन बन चुका है। 'शांगहाई भावना' के सिद्धांतों — परस्पर विश्वास, समानता, और सहयोग — के आधार पर इस संगठन ने क्षेत्रीय सहयोग का एक विशिष्ट मॉडल विकसित किया है। भारत और पाकिस्तान के 2017 में सदस्य बनने के बाद इस संगठन की भू-राजनीतिक प्रासंगिकता और बढ़ गई है।
आगे क्या होगा
बिश्केक शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा और क्षेत्रीय संपर्क पर चर्चा होने की संभावना है। चीन की ओर से संकेत मिले हैं कि वह इस मंच पर वैश्विक शासन के अपने दृष्टिकोण को और मज़बूती से रखेगा तथा सदस्य देशों के साथ साझे भविष्य की रूपरेखा को आगे बढ़ाएगा। यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिमी देशों के साथ चीन और रूस के संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं।