PM मोदी ने बिश्केक में राष्ट्रपति जापारोव से की द्विपक्षीय वार्ता, SCO शिखर सम्मेलन के साथ रणनीतिक साझेदारी पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अगस्त 2026 को बिश्केक में किर्गिज़ गणराज्य के राष्ट्रपति सादिर जापारोव के साथ द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने तथा सांस्कृतिक एवं आर्थिक सहयोग को नई ऊँचाई देने पर सहमति बनी। यह मुलाकात 26वें एससीओ (शंघाई सहयोग संगठन) शिखर सम्मेलन के अवसर पर हुई, जिसकी मेज़बानी किर्गिज़स्तान कर रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति जापारोव को किर्गिज़ गणराज्य के स्वतंत्रता दिवस पर हार्दिक बधाई दी और कहा कि इसी दिन शुरू हुए एससीओ शिखर सम्मेलन ने इस अवसर के महत्व को और बढ़ा दिया है। पीएम मोदी ने शिखर सम्मेलन की सफल मेज़बानी के लिए भी राष्ट्रपति जापारोव का आभार व्यक्त किया।
दोनों नेताओं ने भारत और किर्गिज़ गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा की। बैठक में आर्थिक एवं व्यावसायिक सहयोग को और विस्तार देने पर सहमति जताई गई। इसके साथ ही छात्र विनिमय कार्यक्रमों और सांस्कृतिक सहयोग सहित लोगों के बीच बढ़ते आपसी संपर्कों पर भी चर्चा हुई।
एससीओ सम्मेलन और द्विपक्षीय संदर्भ
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि एससीओ सम्मेलन दोनों देशों के बीच आपसी सम्मान, विश्वास और समर्थन पर आधारित घनिष्ठ एवं दीर्घकालिक संबंधों को दर्शाता है। गौरतलब है कि भारत और किर्गिज़स्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी पहले से स्थापित है, और यह बैठक उसे और मज़बूत आधार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत मध्य एशियाई देशों के साथ अपने संबंधों को कनेक्टिविटी, व्यापार और ऊर्जा सहयोग के नज़रिए से नई परिभाषा दे रहा है।
SCO से इतर अन्य मुलाकातें
पीएम मोदी एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान अन्य देशों के शीर्ष नेतृत्व से भी द्विपक्षीय बैठकें कर रहे हैं। इनमें सबसे अधिक चर्चित रूसी राष्ट्रपति के साथ प्रस्तावित मुलाकात है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़र टिकी है।
VI वर्ल्ड नोमैड गेम्स में भागीदारी
बैठकों के अलावा, प्रधानमंत्री मोदी रात 8 बजे से 10:30 बजे तक राष्ट्रपति जापारोव द्वारा आयोजित VI वर्ल्ड नोमैड गेम्स के आधिकारिक उद्घाटन समारोह में भाग लेंगे। इसके बाद राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों के लिए एक अनौपचारिक रात्रिभोज और सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन होगा।
आगे क्या
भारत-किर्गिज़स्तान के बीच आर्थिक एवं सांस्कृतिक सहयोग की रूपरेखा इस बैठक के बाद और स्पष्ट होने की उम्मीद है। एससीओ मंच पर भारत की सक्रिय कूटनीति यह संकेत देती है कि नई दिल्ली मध्य एशिया में अपनी उपस्थिति को रणनीतिक रूप से और सशक्त बनाने के पक्ष में है।