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जैवलिन मिसाइल से भारतीय सेना होगी और मारक, पूर्व विंग कमांडर बोले — चीन ने नेपाल को बाढ़ से पहले चेतावनी नहीं दी

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जैवलिन मिसाइल से भारतीय सेना होगी और मारक, पूर्व विंग कमांडर बोले — चीन ने नेपाल को बाढ़ से पहले चेतावनी नहीं दी

सारांश

भारत की जैवलिन मिसाइल डील तीन सीमाओं पर टैंक-रोधी क्षमता का निर्णायक उन्नयन है। नेपाल में 30 मिनट में 30 मीटर बाढ़ ने चीन की बांध नीति और पूर्व-चेतावनी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

मुख्य बातें

भारत ने अमेरिका से जैवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम खरीदने का सौदा किया है।
जैवलिन की मारक रेंज 4.5 किलोमीटर है; हाई अटैक मोड में यह 150 मीटर ऊपर जाकर टैंक की कमज़ोर सतह पर हमला करती है।
अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ और राजदूत सर्जियो गोर ने इस सौदे की सराहना की है।
भारत के पास पहले से नाग (4 किमी), संत (20 किमी), अमोघा और सैमो मिसाइल प्रणालियाँ मौजूद हैं।
नेपाल में 30 मिनट में 30 मीटर पानी भरा; पूर्व विंग कमांडर बख्शी ने चीन द्वारा बिना चेतावनी पानी छोड़े जाने की जांच की माँग की।
बख्शी ने सीमावर्ती गाँवों में सरपंचों के नेतृत्व में आपदा-पूर्व जागरूकता की आवश्यकता पर जोर दिया।

भारत द्वारा अमेरिका से जैवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम की खरीद पर रिटायर्ड विंग कमांडर प्रफुल बख्शी ने 28 अगस्त को विस्तृत प्रतिक्रिया दी। उनके अनुसार, 4.5 किलोमीटर की मारक रेंज वाली यह मिसाइल भारत की तीन संवेदनशील सीमाओं — पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन — पर टैंक-रोधी क्षमता को निर्णायक रूप से बढ़ाएगी। साथ ही उन्होंने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के लिए चीन की जिम्मेदारी की जांच की मांग की।

जैवलिन मिसाइल की खासियत और भारतीय सेना को फायदा

रिटायर्ड विंग कमांडर प्रफुल बख्शी ने कहा, 'भारत की सीमा बहुत बड़ी है — पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन के साथ। टैंक की लड़ाइयाँ बहुत आम हैं और हुई भी हैं। हमने इसे यूक्रेन में, इराक में, 1971 की लड़ाई में, 1965 में, खेमकरण में देखा है।' उन्होंने कहा कि जब दुश्मन का टैंक सामने आता है, तो उसे टैंक गन या एंटी-टैंक हथियारों से नष्ट किया जाता है, और इसी में जैवलिन जैसी एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सबसे प्रभावी साबित होती है।

बख्शी के अनुसार, जैवलिन का हाई अटैक मोड इसे विशेष बनाता है — यह मिसाइल 150 मीटर ऊपर तक जाकर सीधे नीचे की ओर टैंक की सबसे कमज़ोर सतह पर प्रहार करती है। इससे न केवल दुश्मन के बख्तरबंद वाहन, बल्कि इमारतें भी निशाने पर ली जा सकती हैं। अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी इस सौदे को सराहा है।

भारत के पास पहले से मौजूद मिसाइल शस्त्रागार

बख्शी ने यह भी रेखांकित किया कि भारत के पास पहले से कई सक्षम प्रणालियाँ हैं। नाग मिसाइल की रेंज 4 किलोमीटर है और इसे चलते वाहन से भी दागा जा सकता है। संत मिसाइल एयर-लॉन्च है, जो 20 किलोमीटर तक के लक्ष्य को भेद सकती है। इसके अलावा अमोघा सिस्टम के दो संस्करण हैं और सैमो मिसाइल को टैंक की गन से ही दागा जा सकता है। जैवलिन इस शस्त्रागार में एक महत्त्वपूर्ण और पूरक क्षमता जोड़ेगी।

नेपाल बाढ़ त्रासदी और चीन पर सवाल

नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ पर बख्शी ने गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'जब चीन में भूकंप आया, तो वहाँ कोई बांध टूटा या क्या हुआ — इसकी पूरी जांच अभी तक नहीं हुई है। लेकिन जो पानी छोड़ा गया, क्या वे चेतावनी दे सकते थे या नहीं? यह भी जांच होगी कि चेतावनी का स्टेटस क्या था।' उनके अनुसार, 30 मिनट के भीतर 30 मीटर पानी भर जाने की स्थिति में आम नागरिक और बचाव दल कुछ नहीं कर सकते।

बख्शी ने कहा कि इतने कम समय में केवल स्थानीय अलर्ट सिस्टम ही काम आ सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि सभी सीमावर्ती गाँवों के सरपंचों को आपदा-पूर्व तैयारी और स्थानीय जागरूकता अभियानों में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-नेपाल क्षेत्र में जल-प्रबंधन और चीन की नदी नीति को लेकर चिंताएं पहले से बढ़ी हुई हैं।

विशेषज्ञ विश्लेषण और आगे की राह

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, जैवलिन की खरीद भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को नई ऊँचाई देती है और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी बख्तरबंद वाहनों के खिलाफ भारत की स्थिति को मजबूत करती है। वहीं नेपाल बाढ़ प्रकरण में चीन की भूमिका की जांच की मांग क्षेत्रीय जल-संधि के भविष्य पर नई बहस छेड़ सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि स्वदेशी नाग और अमोघा प्रणालियों के रहते यह सौदा कितना पूरक है और कितना दोहराव। नेपाल बाढ़ प्रकरण में चीन की जवाबदेही की मांग वाजिब है, मगर कथित तौर पर बिना किसी ठोस साक्ष्य के अभी यह अनुमान के स्तर पर है — जांच की मांग और निष्कर्ष में फर्क करना ज़रूरी है। भारत-नेपाल के बीच जल-संधि और पूर्व-चेतावनी तंत्र की अनुपस्थिति एक दीर्घकालिक नीतिगत खामी है जिसे इस त्रासदी ने उजागर किया है।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल क्या है और यह भारत के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है?
जैवलिन एक अमेरिकी एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल है जिसकी रेंज 4.5 किलोमीटर है और यह हाई अटैक मोड में 150 मीटर ऊपर जाकर टैंक की सबसे कमज़ोर सतह पर प्रहार करती है। पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन से लगती भारत की संवेदनशील सीमाओं पर टैंक-रोधी क्षमता बढ़ाने के लिए यह खरीद रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है।
नेपाल में अचानक बाढ़ क्यों आई और चीन पर क्या आरोप हैं?
रिटायर्ड विंग कमांडर प्रफुल बख्शी के अनुसार, चीन में भूकंप के बाद बांध टूटने या पानी छोड़े जाने की आशंका है, जिससे नेपाल में 30 मिनट के भीतर 30 मीटर पानी भर गया। उन्होंने कहा कि चीन ने पूर्व-चेतावनी दी या नहीं, इसकी जांच होनी चाहिए — हालाँकि अभी तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
भारत के पास जैवलिन के अलावा कौन-कौन सी एंटी-टैंक मिसाइल प्रणालियाँ हैं?
भारत के पास नाग मिसाइल (4 किमी रेंज, चलते वाहन से दागी जा सकती है), संत मिसाइल (एयर-लॉन्च, 20 किमी रेंज), अमोघा सिस्टम (दो संस्करण) और सैमो मिसाइल (टैंक गन से दागी जाने वाली) पहले से उपलब्ध हैं। जैवलिन इन प्रणालियों की पूरक क्षमता के रूप में जोड़ी जा रही है।
नेपाल जैसी बाढ़ त्रासदियों से बचाव के लिए क्या किया जाना चाहिए?
रिटायर्ड विंग कमांडर बख्शी ने सुझाव दिया कि सीमावर्ती और नदी-किनारे के सभी गाँवों में सरपंचों के नेतृत्व में आपदा-पूर्व जागरूकता और स्थानीय अलर्ट तंत्र विकसित किए जाने चाहिए। उनके अनुसार, इतने कम समय में बाहरी बचाव दल कुछ नहीं कर सकते, इसलिए स्थानीय तैयारी ही एकमात्र प्रभावी उपाय है।
अमेरिका ने भारत के साथ जैवलिन डील पर क्या कहा?
अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर दोनों ने इस सौदे को सकारात्मक बताया है। यह सौदा भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी की मजबूती का प्रतीक माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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