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जेवलिन मिसाइल डील पर विशेषज्ञ डॉ. वाइल अव्वाद: भारत के लिए अहम, पर अमेरिका टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करे

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जेवलिन मिसाइल डील पर विशेषज्ञ डॉ. वाइल अव्वाद: भारत के लिए अहम, पर अमेरिका टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करे

सारांश

जेवलिन मिसाइल डील सिर्फ एक हथियार खरीद नहीं — यह भारत-अमेरिका संबंधों की असली परीक्षा है। विशेषज्ञ डॉ. वाइल अव्वाद के अनुसार, बिना टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के यह सौदा 'मेक इन इंडिया' की भावना के विरुद्ध है। साथ ही SCO मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका और नेपाल आपदा में क्षेत्रीय सहयोग की ज़रूरत पर भी उन्होंने अहम बातें कहीं।

मुख्य बातें

वाइल अव्वाद ने कहा कि जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइल डील भारत के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण आवश्यक है।
भारत के 60% सैन्य उपकरण अभी भी रूस से आते हैं; हाल के वर्षों में इटली, फ्रांस, ब्रिटेन, अमेरिका और इजराइल से भी बड़े पैमाने पर खरीद हुई है।
SCO को भारत के लिए आतंकवाद-विरोधी सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता का महत्वपूर्ण मंच बताया गया।
चाबहार (ईरान) के रास्ते CIS देशों तक पहुँच भारत की सामरिक प्राथमिकता बताई गई।
नेपाल आपदा में मौतों का आँकड़ा 1,500 के पार जाने की आशंका; लगभग 1,200 टन बर्फ गिरने से तबाही बढ़ी।
अव्वाद ने चीन, भारत, नेपाल सहित हिमालयी देशों से साझा अर्ली वॉर्निंग सिस्टम विकसित करने की अपील की।

विदेश मामलों के विशेषज्ञ डॉ. वाइल अव्वाद ने 28 अगस्त को नई दिल्ली में कहा कि जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइल की खरीद भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या यह सौदा महज खरीदार-विक्रेता संबंध से आगे बढ़कर दोनों देशों के बीच एक ठोस रणनीतिक गठबंधन की नींव रख पाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (टेक्नोलॉजी ट्रांसफर) के बिना यह डील अपनी पूरी क्षमता हासिल नहीं कर सकती।

जेवलिन डील का रणनीतिक महत्व

डॉ. अव्वाद ने कहा, "इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत जो एंटी-टैंक मिसाइल खरीदना चाहता है, वह काफी महत्वपूर्ण है। हालांकि, मुद्दा यह है कि हमें इस बात पर भी विचार करना चाहिए कि अमेरिकी हथियारों की यह खरीद भारत को केवल एक खरीदार और विक्रेता के संबंध से आगे बढ़ाकर दोनों देशों के बीच एक रणनीतिक गठबंधन में बदल पाएगी या नहीं।" उनके अनुसार, यदि 'मेक इन इंडिया' के तहत निवेश होता है, तो उसके साथ प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण भी अनिवार्य रूप से होना चाहिए।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि फिलहाल किसी भी अमेरिकी कंपनी को भारत को तकनीक ट्रांसफर करने के लिए आगे आते नहीं देखा गया है — जो इस साझेदारी की एक बड़ी सीमा है।

भारत का हथियार-स्रोत विविधीकरण

डॉ. अव्वाद ने बताया कि भारत अपने रक्षा आयात के स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहा है। भारत के 60 फीसदी सैन्य उपकरण अभी भी रूस से आते हैं, लेकिन हाल के वर्षों में इटली, फ्रांस, ब्रिटेन, अमेरिका और इजराइल से भी बड़े पैमाने पर खरीद हुई है। उनके अनुसार, जेवलिन जैसे उन्नत हथियार भारतीय शस्त्रागार को मजबूती देंगे, जिससे भारत सैन्य के साथ-साथ आर्थिक और राजनीतिक रूप से भी सशक्त होगा।

SCO शिखर सम्मेलन और PM मोदी का दौरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान दौरे पर टिप्पणी करते हुए डॉ. अव्वाद ने कहा, "शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक बेहद महत्वपूर्ण मंच है, जहाँ भारत एक प्रमुख भूमिका निभा रहा है।" उन्होंने कहा कि यह दौरा इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वैश्विक स्तर पर भारत को एक उभरती हुई बड़ी शक्ति के रूप में मान्यता मिल रही है।

उनके अनुसार, SCO भारत को आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में सहयोग देगा और दक्षिण एशिया को आतंकवादी संगठनों का अड्डा बनने से रोकने में सहायक होगा। गौरतलब है कि ब्रिक्स की तैयारियों के बीच यह दौरा भारत की बहुआयामी विदेश नीति का प्रतिबिंब है।

बहुध्रुवीय विश्व में भारत की भूमिका

डॉ. अव्वाद ने कहा कि चाहे ब्रिक्स हो, SCO हो या G7 — अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की उपस्थिति देश की मजबूत स्थिति को दर्शाती है। उनके अनुसार, एकध्रुवीय विश्व का दौर समाप्त हो चुका है और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में भारत की भूमिका निर्णायक होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी शुल्कों के प्रभाव के कारण भारत अपने MSME क्षेत्र के लिए नए बाजारों की तलाश में है। चाबहार (ईरान) के रास्ते पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए CIS देशों तक सीधी पहुँच बनाना भारत का एक प्रमुख सामरिक उद्देश्य बताया जा रहा है।

नेपाल आपदा और क्षेत्रीय जिम्मेदारी

नेपाल में आई तबाही पर डॉ. अव्वाद ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र की इस आपदा को केवल मानवीय दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि क्षेत्रीय पर्यावरण और जन-जीवन के व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उपग्रह तस्वीरों से स्पष्ट होता है कि लगभग 1,200 टन बर्फ का बड़ा टुकड़ा गिरने और संकरे पहाड़ी रास्तों के कारण बाढ़ और तबाही का स्तर बढ़ा है।

उन्होंने आगाह किया कि इस आपदा में मौतों का आँकड़ा 1,500 के पार जाने की आशंका है, जिसमें कई विदेशी नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। डॉ. अव्वाद के अनुसार, चीन, भारत, नेपाल और हिमालय साझा करने वाले सभी देशों को मिलकर एक बेहतर अर्ली वॉर्निंग सिस्टम विकसित करना चाहिए था। भारत इस क्षेत्र का एक प्रमुख हितधारक है और उसकी जिम्मेदारी और भी बड़ी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन तकनीक साझा करने में संकोच बरतता है। 'मेक इन इंडिया' की घोषणाएँ तब तक खोखली रहेंगी जब तक रक्षा सौदे IP हस्तांतरण से नहीं जुड़ते। भारत का रूस पर 60% निर्भरता का आँकड़ा यह भी बताता है कि विविधीकरण की यात्रा अभी लंबी है। नेपाल आपदा पर उनकी चेतावनी — कि 1,500 से अधिक मौतें हो सकती हैं — यह रेखांकित करती है कि हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में क्षेत्रीय सहयोग अब कूटनीतिक विकल्प नहीं, अनिवार्यता है।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइल डील भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
विशेषज्ञ डॉ. वाइल अव्वाद के अनुसार, जेवलिन मिसाइल भारतीय शस्त्रागार को उन्नत करेगी और देश को सैन्य, आर्थिक व राजनीतिक रूप से सशक्त बनाएगी। यह डील भारत-अमेरिका संबंधों को खरीदार-विक्रेता से आगे रणनीतिक गठबंधन की दिशा में ले जाने का अवसर भी है।
टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की माँग क्यों उठाई जा रही है?
डॉ. अव्वाद का कहना है कि 'मेक इन इंडिया' के तहत यदि अमेरिकी हथियारों की खरीद होती है, तो उसके साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण भी होना चाहिए। फिलहाल कोई भी अमेरिकी कंपनी भारत को तकनीक ट्रांसफर करने के लिए आगे नहीं आई है, जो इस साझेदारी की सबसे बड़ी सीमा है।
भारत अपने हथियार आयात में किन देशों पर निर्भर है?
भारत के लगभग 60% सैन्य उपकरण रूस से आते हैं। हालाँकि हाल के वर्षों में भारत ने इटली, फ्रांस, ब्रिटेन, अमेरिका और इजराइल से भी बड़े पैमाने पर हथियार खरीदे हैं, जो आयात स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति का हिस्सा है।
SCO शिखर सम्मेलन में भारत की भूमिका क्या है?
डॉ. अव्वाद के अनुसार, शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में भारत एक सक्रिय और प्रमुख भागीदार है। यह मंच भारत को आतंकवाद-विरोधी सहयोग और CIS देशों तक व्यापारिक पहुँच — विशेषकर चाबहार के रास्ते — के लिए महत्वपूर्ण अवसर देता है।
नेपाल में हिमालयी आपदा कितनी गंभीर है?
डॉ. अव्वाद के अनुसार, लगभग 1,200 टन बर्फ गिरने और संकरे पहाड़ी रास्तों के कारण बाढ़ और तबाही का स्तर बढ़ा है। मौतों का आँकड़ा 1,500 के पार जाने की आशंका है और कई विदेशी नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। उन्होंने भारत, चीन, नेपाल सहित सभी हिमालयी देशों से साझा अर्ली वॉर्निंग सिस्टम बनाने की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
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