रक्षा मंत्रालय की छठी स्वदेशीकरण सूची: 405 रक्षा उत्पाद देश में बनेंगे, ₹3,070 करोड़ का कारोबारी मूल्य
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा उत्पादन विभाग ने 18 अगस्त 2026 को छठी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची जारी की, जिसमें 405 रणनीतिक रक्षा वस्तुओं को शामिल किया गया है। इन वस्तुओं का अनुमानित कारोबारी मूल्य ₹3,070 करोड़ है और इन सभी का उत्पादन अब भारत में ही किया जाएगा। यह कदम आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में आयात निर्भरता घटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
सूची में क्या-क्या शामिल है
इस व्यापक सूची में 16 वस्तुएं भारतीय तटरक्षक बल से संबंधित हैं, जबकि शेष 389 वस्तुएं रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSUs) से जुड़ी हैं। सूची में हथियार प्रणालियों और रक्षा प्लेटफॉर्म में उपयोग होने वाले कल-पुर्जे, उप-प्रणालियाँ, उप-असेंबली, स्पेयर पार्ट्स, घटक और कच्चा माल शामिल हैं।
वायु प्लेटफॉर्म के अंतर्गत एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर, लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर, सुखोई-30 एमकेआई, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट और एएल-31एफपी इंजन से जुड़े उत्पाद शामिल हैं। बख्तरबंद प्लेटफॉर्म के लिए टी-72, टी-90 और बीएमपी-टू से संबंधित महत्वपूर्ण उपकरण भी इस सूची में रखे गए हैं।
मिसाइल और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स का स्वदेशीकरण
सरकार ने कई प्रमुख मिसाइल प्रणालियों से जुड़े उपकरणों को स्वदेशी रूप से विकसित करने का निर्णय लिया है। इनमें कोंकर्स-एम, इनवार और एमआरएसएएम से संबंधित वस्तुएं शामिल हैं। रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में रडार, सोनार, फायर कंट्रोल सिस्टम और सैटेलाइट संचार प्रणाली का भी स्वदेशीकरण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त हाई एक्सप्लोसिव एंटी-टैंक गोला-बारूद भी इस सूची का हिस्सा है।
सृजन पोर्टल और अब तक की प्रगति
गौरतलब है कि रक्षा उत्पादन विभाग ने अगस्त 2020 में सृजन रक्षा पोर्टल शुरू किया था, जिसका उद्देश्य आयातित रक्षा वस्तुओं को भारतीय उद्योग के लिए स्वदेशी अवसरों में बदलना है। जून 2026 तक इस पोर्टल के माध्यम से 33,000 से अधिक रक्षा वस्तुएं उद्योग के सामने रखी जा चुकी हैं, जिनमें पहली पाँच स्वदेशीकरण सूचियों की 5,012 वस्तुएं भी शामिल हैं।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में 15,700 से अधिक रक्षा वस्तुओं का सफलतापूर्वक स्वदेशीकरण हो चुका है, जिससे करीब ₹9,000 करोड़ के आयात का विकल्प देश में ही तैयार हुआ है। इसके अलावा मार्च 2026 तक रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने घरेलू विक्रेताओं को करीब ₹10,000 करोड़ के खरीद आदेश दिए हैं।
एमएसएमई और स्टार्ट-अप को अवसर
सूची में शामिल प्रत्येक वस्तु के स्वदेशीकरण के लिए एक संकेतात्मक समयसीमा तय की गई है। स्वदेशी विकास सफल होने के बाद इन उत्पादों की खरीद भारतीय उद्योग से ही की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया में एमएसएमई और स्टार्ट-अप की भागीदारी को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे घरेलू रक्षा आपूर्ति श्रृंखला और मजबूत होगी।
यह छठी सूची भारतीय रक्षा उद्योग के लिए नए कारोबारी अवसर खोलती है और देश को रणनीतिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक कदम आगे ले जाती है।