ब्रह्मोस मिसाइल से भारत का रक्षा निर्यात नई ऊँचाई पर, 2030 तक ₹50,000 करोड़ का लक्ष्य

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ब्रह्मोस मिसाइल से भारत का रक्षा निर्यात नई ऊँचाई पर, 2030 तक ₹50,000 करोड़ का लक्ष्य

सारांश

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल अब सिर्फ एक हथियार नहीं — यह भारत की कूटनीति का नया चेहरा है। फिलीपींस को दूसरी खेप, वियतनाम और इंडोनेशिया से बातचीत, और 2030 तक ₹50,000 करोड़ के निर्यात लक्ष्य के साथ, भारत ग्लोबल साउथ में रक्षा बाज़ार की नई धुरी बनने की राह पर है।

मुख्य बातें

'इंडिया नैरेटिव' की रिपोर्ट के अनुसार ब्रह्मोस मिसाइल भारत के रक्षा निर्यात उभार का सबसे बड़ा प्रतीक बनकर सामने आई है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 2030 तक रक्षा निर्यात ₹50,000 करोड़ तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है।
फिलीपींस 2024 में ब्रह्मोस खरीदने वाला पहला देश बना; अप्रैल 2025 में दूसरी खेप सौंपी गई।
वियतनाम और इंडोनेशिया के साथ ब्रह्मोस सौदे पर बातचीत जारी है; वियतनाम के राष्ट्रपति टो लाम की भारत यात्रा में इस पर चर्चा हुई।
ब्रह्मोस की गति मैक 2.8–3 , मारक क्षमता 400+ किलोमीटर ; ज़मीन, समुद्र, हवा और पनडुब्बी — चारों प्लेटफॉर्म से लॉन्च संभव।
राजनाथ सिंह फिलहाल वियतनाम और दक्षिण कोरिया दौरे पर; इंडो-पैसिफिक समुद्री सुरक्षा पर फोकस।

भारत वैश्विक रक्षा निर्यात बाज़ार में तेज़ी से अपनी पकड़ मज़बूत कर रहा है और इस उभार का सबसे बड़ा प्रतीक बनकर सामने आई है ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल18 मई 2025 को प्रकाशित 'इंडिया नैरेटिव' की एक रिपोर्ट के अनुसार, मिसाइल निर्माण में भारत की बढ़ती विशेषज्ञता और ग्लोबल साउथ देशों तक विस्तृत होती पहुँच ने 'डिफेंस आत्मनिर्भरता' को नई धार दी है, जिससे वैश्विक मंच पर भारत की कूटनीतिक स्थिति भी सुदृढ़ हो रही है।

रक्षा निर्यात: भारत की विदेश नीति का नया हथियार

रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि रक्षा निर्यात अब भारत की विदेश नीति का एक सक्रिय उपकरण बन चुका है। भारत न केवल खुद को एक बड़ी वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है, बल्कि अपने कूटनीतिक प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय रक्षा साझेदारियों को भी रणनीतिक रूप से विस्तार दे रहा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पहले ही स्पष्ट किया है कि वर्ष 2030 तक भारत का रक्षा निर्यात ₹50,000 करोड़ तक पहुँचने का लक्ष्य है। यह महत्वाकांक्षी आँकड़ा भारत की 'मेक इन इंडिया' रक्षा नीति की दिशा और गति दोनों को दर्शाता है।

ब्रह्मोस: तकनीकी दक्षता और रणनीतिक बढ़त

रूस के सहयोग से विकसित ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल अपनी असाधारण तकनीकी विशेषताओं के कारण वैश्विक रक्षा बाज़ार में अलग पहचान रखती है। यह मिसाइल मैक 2.8 से मैक 3 की गति से उड़ान भरती है — दुनिया की अधिकांश पारंपरिक क्रूज मिसाइलों से कहीं तेज़।

इसकी मारक क्षमता 400 किलोमीटर से अधिक है और इसे ज़मीन, समुद्र, हवा और पनडुब्बी — चारों प्लेटफॉर्म से दागा जा सकता है। यह बहुउद्देशीय क्षमता ही इसे खरीदार देशों के लिए विशेष रूप से आकर्षक बनाती है।

दक्षिण-पूर्व एशिया: उभरता हुआ रक्षा बाज़ार

रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण चीन सागर क्षेत्र के देश — फिलीपींस, वियतनाम और इंडोनेशिया — चीन के आक्रामक नौसैनिक रवैये और क्षेत्रीय दावों के मद्देनज़र अपनी 'एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल' (A2/AD) क्षमता को मज़बूत करने में जुटे हैं। ब्रह्मोस इस ज़रूरत को पूरा करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

फिलीपींस 2024 में ब्रह्मोस खरीदने वाला पहला देश बना। भारत ने अप्रैल 2025 में फिलीपींस को मिसाइल की दूसरी खेप भी सफलतापूर्वक सौंप दी। इंडोनेशिया को भी संभावित खरीदार बताया जा रहा है, जबकि वियतनाम के साथ सौदे पर बातचीत जारी है।

गौरतलब है कि मई 2025 में वियतनाम के राष्ट्रपति टो लाम की भारत यात्रा के दौरान ब्रह्मोस सौदे पर विशेष रूप से चर्चा हुई थी — जो इस साझेदारी की गंभीरता को रेखांकित करता है।

राजनाथ सिंह का इंडो-पैसिफिक दौरा

इसी क्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह फिलहाल वियतनाम और दक्षिण कोरिया के दौरे पर हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य रणनीतिक सैन्य सहयोग बढ़ाना, रक्षा उद्योग साझेदारी को नई गति देना और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करना है — ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित हो सके।

यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत की रक्षा कूटनीति वैश्विक स्तर पर नई ऊँचाइयाँ छू रही है और ब्रह्मोस इस कूटनीति का सबसे धारदार औज़ार बनता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे भारत के समग्र रक्षा निर्यात चित्र से अलग करके देखना ज़रूरी है — अभी तक यह निर्यात मुख्यतः एक ही प्रमुख उत्पाद पर टिका है। ₹50,000 करोड़ का 2030 लक्ष्य तभी हासिल होगा जब ब्रह्मोस के साथ-साथ तेजस, आकाश और अन्य स्वदेशी प्रणालियाँ भी वैश्विक बाज़ार में अपनी जगह बना सकें। दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन-विरोधी भावना भारत के लिए एक अस्थायी अवसर है — स्थायी साझेदारी के लिए आपूर्ति श्रृंखला विश्वसनीयता और बिक्री-पश्चात सेवा तंत्र को उतनी ही गंभीरता से विकसित करना होगा।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रह्मोस मिसाइल क्या है और यह इतनी खास क्यों है?
ब्रह्मोस भारत और रूस के संयुक्त सहयोग से विकसित एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जो मैक 2.8 से मैक 3 की गति से उड़ान भरती है और 400 किलोमीटर से अधिक दूरी तक सटीक हमला कर सकती है। इसे ज़मीन, समुद्र, हवा और पनडुब्बी — चारों प्लेटफॉर्म से दागा जा सकता है, जो इसे वैश्विक रक्षा बाज़ार में विशिष्ट बनाता है।
किन देशों ने ब्रह्मोस मिसाइल खरीदी है या खरीदने में रुचि दिखाई है?
फिलीपींस 2024 में ब्रह्मोस खरीदने वाला पहला देश बना और अप्रैल 2025 में उसे दूसरी खेप भी मिल चुकी है। वियतनाम के साथ सौदे पर बातचीत जारी है और इंडोनेशिया को भी संभावित खरीदार बताया जा रहा है।
भारत का 2030 तक रक्षा निर्यात लक्ष्य क्या है?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार भारत का लक्ष्य 2030 तक रक्षा निर्यात ₹50,000 करोड़ तक पहुँचाना है। यह लक्ष्य 'डिफेंस आत्मनिर्भरता' नीति और ग्लोबल साउथ देशों के साथ बढ़ती साझेदारी पर आधारित है।
दक्षिण-पूर्व एशियाई देश ब्रह्मोस में रुचि क्यों दिखा रहे हैं?
दक्षिण चीन सागर में चीन के आक्रामक नौसैनिक रवैये और क्षेत्रीय दावों के कारण फिलीपींस, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देश अपनी 'एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल' (A2/AD) क्षमता बढ़ाना चाहते हैं। ब्रह्मोस की गति, सटीकता और बहुप्लेटफॉर्म क्षमता इस ज़रूरत को पूरा करने के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
राजनाथ सिंह के वियतनाम और दक्षिण कोरिया दौरे का उद्देश्य क्या है?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के इस दौरे का फोकस रणनीतिक सैन्य सहयोग बढ़ाना, रक्षा उद्योग साझेदारी को मज़बूत करना और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देना है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब वियतनाम के साथ ब्रह्मोस सौदे पर बातचीत सक्रिय चरण में है।
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