ब्रह्मोस मिसाइल से भारत का रक्षा निर्यात नई ऊँचाई पर, 2030 तक ₹50,000 करोड़ का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
भारत वैश्विक रक्षा निर्यात बाज़ार में तेज़ी से अपनी पकड़ मज़बूत कर रहा है और इस उभार का सबसे बड़ा प्रतीक बनकर सामने आई है ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल। 18 मई 2025 को प्रकाशित 'इंडिया नैरेटिव' की एक रिपोर्ट के अनुसार, मिसाइल निर्माण में भारत की बढ़ती विशेषज्ञता और ग्लोबल साउथ देशों तक विस्तृत होती पहुँच ने 'डिफेंस आत्मनिर्भरता' को नई धार दी है, जिससे वैश्विक मंच पर भारत की कूटनीतिक स्थिति भी सुदृढ़ हो रही है।
रक्षा निर्यात: भारत की विदेश नीति का नया हथियार
रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि रक्षा निर्यात अब भारत की विदेश नीति का एक सक्रिय उपकरण बन चुका है। भारत न केवल खुद को एक बड़ी वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है, बल्कि अपने कूटनीतिक प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय रक्षा साझेदारियों को भी रणनीतिक रूप से विस्तार दे रहा है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पहले ही स्पष्ट किया है कि वर्ष 2030 तक भारत का रक्षा निर्यात ₹50,000 करोड़ तक पहुँचने का लक्ष्य है। यह महत्वाकांक्षी आँकड़ा भारत की 'मेक इन इंडिया' रक्षा नीति की दिशा और गति दोनों को दर्शाता है।
ब्रह्मोस: तकनीकी दक्षता और रणनीतिक बढ़त
रूस के सहयोग से विकसित ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल अपनी असाधारण तकनीकी विशेषताओं के कारण वैश्विक रक्षा बाज़ार में अलग पहचान रखती है। यह मिसाइल मैक 2.8 से मैक 3 की गति से उड़ान भरती है — दुनिया की अधिकांश पारंपरिक क्रूज मिसाइलों से कहीं तेज़।
इसकी मारक क्षमता 400 किलोमीटर से अधिक है और इसे ज़मीन, समुद्र, हवा और पनडुब्बी — चारों प्लेटफॉर्म से दागा जा सकता है। यह बहुउद्देशीय क्षमता ही इसे खरीदार देशों के लिए विशेष रूप से आकर्षक बनाती है।
दक्षिण-पूर्व एशिया: उभरता हुआ रक्षा बाज़ार
रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण चीन सागर क्षेत्र के देश — फिलीपींस, वियतनाम और इंडोनेशिया — चीन के आक्रामक नौसैनिक रवैये और क्षेत्रीय दावों के मद्देनज़र अपनी 'एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल' (A2/AD) क्षमता को मज़बूत करने में जुटे हैं। ब्रह्मोस इस ज़रूरत को पूरा करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
फिलीपींस 2024 में ब्रह्मोस खरीदने वाला पहला देश बना। भारत ने अप्रैल 2025 में फिलीपींस को मिसाइल की दूसरी खेप भी सफलतापूर्वक सौंप दी। इंडोनेशिया को भी संभावित खरीदार बताया जा रहा है, जबकि वियतनाम के साथ सौदे पर बातचीत जारी है।
गौरतलब है कि मई 2025 में वियतनाम के राष्ट्रपति टो लाम की भारत यात्रा के दौरान ब्रह्मोस सौदे पर विशेष रूप से चर्चा हुई थी — जो इस साझेदारी की गंभीरता को रेखांकित करता है।
राजनाथ सिंह का इंडो-पैसिफिक दौरा
इसी क्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह फिलहाल वियतनाम और दक्षिण कोरिया के दौरे पर हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य रणनीतिक सैन्य सहयोग बढ़ाना, रक्षा उद्योग साझेदारी को नई गति देना और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करना है — ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित हो सके।
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत की रक्षा कूटनीति वैश्विक स्तर पर नई ऊँचाइयाँ छू रही है और ब्रह्मोस इस कूटनीति का सबसे धारदार औज़ार बनता जा रहा है।