15 जुलाई 2026
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ब्रह्मोस मिसाइल डील वियतनाम के साथ साइन, इंडोनेशिया भी अंतिम चरण में: रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह

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ब्रह्मोस मिसाइल डील वियतनाम के साथ साइन, इंडोनेशिया भी अंतिम चरण में: रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह

सारांश

सिंगापुर के शांगरी-ला डायलॉग में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने खुलासा किया कि वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइल समझौता चुपचाप साइन हो चुका है। फिलीपींस के बाद वियतनाम दूसरा आसियान खरीदार बनने की ओर है — और इंडोनेशिया भी कतार में है।

मुख्य बातें

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 30 मई 2026 को सिंगापुर में पुष्टि की कि वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइल डील पर हस्ताक्षर हो चुके हैं, हालाँकि आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
इंडोनेशिया के साथ भी इसी तरह का समझौता अंतिम चरण में बताया गया है।
ब्रह्मोस का पहला विदेशी खरीदार फिलीपींस है — पहला बैच 2024 में, दूसरा बैच अप्रैल 2025 में डिलीवर हुआ।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हनोई दौरे के दौरान भारत-वियतनाम साझेदारी को उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी में अपग्रेड किया गया।
भारत का लक्ष्य 2030 तक रक्षा निर्यात ₹50,000 करोड़ तक पहुँचाना है।

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 30 मई 2026 को सिंगापुर में पुष्टि की कि वियतनाम के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की आपूर्ति का समझौता पहले ही हस्ताक्षरित हो चुका है, हालाँकि इसकी आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है। साथ ही उन्होंने बताया कि इंडोनेशिया के साथ भी इसी तरह का एक समझौता अंतिम चरण में है।

शांगरी-ला डायलॉग में रक्षा सचिव का बयान

शांगरी-ला डायलॉग के दौरान एक मीडिया कार्यक्रम में वियतनामी प्रतिनिधिमंडल के सवाल का जवाब देते हुए रक्षा सचिव सिंह ने कहा, 'मेरी समझ से इंडोनेशिया और वियतनाम दोनों के साथ समझौता अंतिम चरण में है। असल में, वियतनाम के लिए मुझे लगता है कि इस पर पहले ही हस्ताक्षर हो चुके हैं — शायद सार्वजनिक तौर पर ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन इस पर पहले ही साइन हो चुका है। जाहिर है, आप उन मित्र विदेशी देशों की श्रेणी में हैं जिनके साथ हमें इस तरह की उच्च तकनीक साझा करने में प्रसन्नता होगी।' उन्होंने यह भी कहा, 'हम आप सभी को मित्र देश मानते हैं जिनके साथ हम उन्नत रक्षा तकनीक साझा कर सकते हैं।'

फिलीपींस: पहला खरीदार, दूसरी खेप भी पहुँची

भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम द्वारा निर्मित ब्रह्मोस मिसाइल का पहला विदेशी खरीदार फिलीपींस है। फिलीपींस को मिसाइलों का पहला बैच 2024 में सौंपा गया था, जबकि दूसरा बैच अप्रैल 2025 में डिलीवर किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण-पूर्व एशिया में समुद्री सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ रहा है और आसियान देश अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में जुटे हैं।

भारत-वियतनाम रणनीतिक साझेदारी का विस्तार

इस महीने की शुरुआत में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हनोई का दौरा किया, जहाँ उन्होंने वियतनामी रक्षा मंत्री जनरल फान वान गियांग के साथ समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग, प्रशिक्षण और क्षेत्रीय स्थिरता में सहयोग को गहरा करने पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरे से दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी के 10 वर्ष पूरे हुए। गौरतलब है कि वियतनाम के राष्ट्रपति टो लाम के हालिया भारत दौरे के दौरान इस साझेदारी को उन्नत कर उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया।

अपने हनोई दौरे के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वियतनाम के राष्ट्रपति से भी मुलाकात की और दोनों देशों के बीच इस उन्नत साझेदारी के तहत सहयोग को और मजबूत करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'भारत और वियतनाम के बीच आपसी भरोसे, साझा मूल्यों और रक्षा, सुरक्षा तथा क्षेत्रीय स्थिरता में करीबी सहयोग पर आधारित एक मजबूत संबंध है।'

₹50,000 करोड़ रक्षा निर्यात लक्ष्य और ग्लोबल साउथ रणनीति

रक्षा सचिव सिंह ने विश्वास जताया कि 2030 तक भारत का रक्षा निर्यात ₹50,000 करोड़ तक पहुँच जाएगा। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, जैसे-जैसे वैश्विक रक्षा बाज़ार विस्तृत हो रहा है, भारत उन क्षेत्रों में अपना प्रभाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है जो उसके भू-राजनीतिक और रणनीतिक हितों के अनुकूल हैं। ग्लोबल साउथ इस रणनीतिक दृष्टिकोण का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। आगे आने वाले महीनों में इंडोनेशिया के साथ समझौते के औपचारिक होने की उम्मीद है, जो भारत के आसियान रक्षा कूटनीति के विस्तार का अगला अध्याय होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

परंतु ₹50,000 करोड़ के निर्यात लक्ष्य के लिए ब्रह्मोस से आगे भी पोर्टफोलियो विविध करना होगा। ग्लोबल साउथ में भारत की बढ़ती रक्षा उपस्थिति चीन के बढ़ते प्रभाव का प्रत्युत्तर भी है — और यही इस पूरी कवायद का असली भू-राजनीतिक संदर्भ है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइल डील क्या है?
यह भारत और वियतनाम के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की आपूर्ति का समझौता है, जिसे रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के अनुसार पहले ही हस्ताक्षरित किया जा चुका है, हालाँकि आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है। यह डील भारत की आसियान देशों को उन्नत रक्षा तकनीक निर्यात करने की नीति का हिस्सा है।
ब्रह्मोस मिसाइल का पहला विदेशी खरीदार कौन है?
फिलीपींस ब्रह्मोस का पहला विदेशी खरीदार है। उसे पहला बैच 2024 में और दूसरा बैच अप्रैल 2025 में डिलीवर किया गया। वियतनाम इस मिसाइल का दूसरा आसियान खरीदार बनने की ओर है।
इंडोनेशिया के साथ ब्रह्मोस डील कब होगी?
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के अनुसार इंडोनेशिया के साथ समझौता अंतिम चरण में है। हालाँकि कोई तिथि घोषित नहीं की गई है, आने वाले महीनों में इसके औपचारिक होने की उम्मीद है।
भारत-वियतनाम रक्षा साझेदारी को हाल ही में कैसे अपग्रेड किया गया?
वियतनाम के राष्ट्रपति टो लाम के भारत दौरे के दौरान दोनों देशों की साझेदारी को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' से उन्नत कर 'उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी' का दर्जा दिया गया। इससे दोनों देशों के बीच 10 वर्षीय रणनीतिक संबंध एक नए स्तर पर पहुँचे।
भारत का 2030 तक रक्षा निर्यात लक्ष्य क्या है?
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने विश्वास जताया है कि 2030 तक भारत का रक्षा निर्यात ₹50,000 करोड़ तक पहुँच जाएगा। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ग्लोबल साउथ और आसियान देश इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
राष्ट्र प्रेस
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