ब्रह्मोस मिसाइल से भारत बना बड़ा रक्षा निर्यातक, 2030 तक ₹50,000 करोड़ का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
भारत वैश्विक रक्षा निर्यात बाज़ार में तेज़ी से अपनी पकड़ मज़बूत कर रहा है और इस उभार का सबसे शक्तिशाली प्रतीक बनकर सामने आई है ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल। इंडिया नैरेटिव की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, मिसाइल प्रौद्योगिकी में भारत की बढ़ती दक्षता और ग्लोबल साउथ देशों तक उसकी विस्तारित पहुँच ने 'रक्षा आत्मनिर्भरता' को नई ऊँचाई दी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का कद लगातार ऊँचा हो रहा है।
रक्षा निर्यात: भारत की विदेश नीति का नया हथियार
रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि रक्षा निर्यात अब भारत की विदेश नीति का एक अभिन्न और रणनीतिक स्तंभ बन चुका है। भारत न केवल खुद को एक उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है, बल्कि इस प्रक्रिया में अपने कूटनीतिक प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को भी सुदृढ़ कर रहा है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहले ही यह भरोसा जता चुके हैं कि वर्ष 2030 तक भारत का रक्षा निर्यात ₹50,000 करोड़ के स्तर तक पहुँच जाएगा। जैसे-जैसे भारत का रक्षा बाज़ार विस्तार पा रहा है, देश उन क्षेत्रों में अपना प्रभाव बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है जो उसकी रणनीतिक और भू-राजनीतिक प्राथमिकताओं के अनुरूप हैं। ग्लोबल साउथ अब इस रणनीतिक नीति का एक केंद्रीय हिस्सा बनता जा रहा है।
ब्रह्मोस: तकनीकी श्रेष्ठता और बहुआयामी क्षमता
रूस के साथ संयुक्त रूप से विकसित ब्रह्मोस मिसाइल अपनी असाधारण गति, सटीक मारक क्षमता और बहुउपयोगी प्रकृति के कारण वैश्विक रक्षा जगत में विशेष स्थान रखती है। यह मिसाइल मैक 2.8 से मैक 3 की रफ़्तार से उड़ान भरती है — जो दुनिया की अधिकांश पारंपरिक क्रूज़ मिसाइलों से कहीं अधिक है। इसकी मारक दूरी 400 किलोमीटर से अधिक है और इसे जमीन, समुद्र, वायु तथा पनडुब्बी — चारों प्लेटफ़ॉर्म से दागा जा सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, यही बहुआयामी क्षमता ब्रह्मोस को भारत के रक्षा निर्यात अभियान का सबसे बड़ा 'गेमचेंजर' बना रही है।
दक्षिण-पूर्व एशिया: नया रणनीतिक बाज़ार
दक्षिण चीन सागर में चीन के आक्रामक नौसैनिक रवैये और क्षेत्रीय दावों के मद्देनज़र फिलीपींस, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देश अपनी 'एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल' (A2/AD) क्षमता को मज़बूत करने में जुटे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रह्मोस इस ज़रूरत को पूरा करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
फिलीपींस 2024 में ब्रह्मोस खरीदने वाला पहला देश बना, और भारत ने अप्रैल 2025 में उसे दूसरी खेप भी सौंप दी। इंडोनेशिया को भी इस मिसाइल का संभावित खरीदार बताया गया है। वियतनाम के साथ भी ब्रह्मोस सौदे पर बातचीत जारी है — इस वर्ष मई में वियतनाम के राष्ट्रपति टो लाम की भारत यात्रा के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी।
राजनाथ सिंह का दौरा और आगे की राह
इसी रणनीतिक पृष्ठभूमि में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इन दिनों वियतनाम और दक्षिण कोरिया के दौरे पर हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इस यात्रा का केंद्रबिंदु रणनीतिक सैन्य सहयोग को विस्तार देना, रक्षा उद्योग साझेदारियाँ मज़बूत करना और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देना है — ताकि इस क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति और स्थिरता सुनिश्चित हो सके।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत का रक्षा निर्यात पिछले एक दशक में कई गुना बढ़ चुका है और देश आयातक से निर्यातक की भूमिका में तेज़ी से रूपांतरित हो रहा है। ब्रह्मोस की बढ़ती माँग इस बदलाव की सबसे ठोस अभिव्यक्ति है।