भारत खरीदेगा 'जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम', अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने एक्स पर की पुष्टि
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका में भारत के लिए तैनात अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने 28 अगस्त 2026 को अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट करते हुए खुलासा किया कि भारत युद्ध में परखे जा चुके 'जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम' की खरीद की योजना बना रहा है। यह जानकारी उन्होंने अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के उस बयान का हवाला देते हुए दी, जो हेगसेथ ने मई 2026 में आयोजित 'शांगरी-ला डायलॉग' में दिया था।
जैवलिन सौदे का महत्व
राजदूत गोर ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, 'भारत युद्ध में परखे जा चुके जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम को खरीदने की योजना बना रहा है, जैसा कि अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने मई 2026 के शांगरी-ला डायलॉग में कहा था। यह कदम अमेरिका-भारत रक्षा संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है।' उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस सौदे से दोनों देशों के बीच संयुक्त उत्पादन (को-प्रोडक्शन) के नए अवसर खुल सकते हैं।
भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग की स्थिति
गोर के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच रक्षा एवं रणनीतिक सहयोग इस समय रिकॉर्ड ऊँचाई पर है। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा हितों को लेकर अपनी साझेदारी को नई गहराई दे रहे हैं। गौरतलब है कि जैवलिन मिसाइल प्रणाली को यूक्रेन समेत कई संघर्षों में अत्यंत प्रभावी पाया गया है, और इसकी खरीद भारत की थल सेना की टैंक-रोधी क्षमता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएगी।
राजनयिक गतिविधियाँ और सहयोगी देशों से मुलाकात
रक्षा घोषणा से अलग, राजदूत गोर ने नई दिल्ली स्थित गांधी स्मृति में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की और गांधी स्मृति संग्रहालय का दौरा किया। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'गांधी स्मृति जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देना मेरे लिए सम्मान की बात है। सत्य, अहिंसा और शांति के उनके मूल्य हम सभी को प्रेरित करते हैं।'
इस दौरान गोर ने सहयोगी देशों के वरिष्ठ राजनयिकों से भी मुलाकात की। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन, ब्रिटेन की उच्चायुक्त लिंडी कैमरून, कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस कूटर और न्यूजीलैंड के उच्चायुक्त पैट्रिक राटा के साथ बातचीत की। गोर ने इस चर्चा को 'उपयोगी और सार्थक' बताते हुए कहा कि इसमें कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
आगे क्या होगा
जैवलिन सौदे की औपचारिक घोषणा और खरीद प्रक्रिया की समयसीमा अभी सरकारी स्तर पर स्पष्ट नहीं की गई है। यदि यह सौदा पूरा होता है, तो यह भारत-अमेरिका रक्षा व्यापार में एक और बड़ा मील का पत्थर होगा और 'मेक इन इंडिया' के तहत को-प्रोडक्शन की संभावनाओं को भी बल देगा।