शांगरी-ला डायलॉग 2026: रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने अमेरिकी कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल से की बैठक, इंडो-पैसिफिक सुरक्षा पर मंथन
सारांश
मुख्य बातें
भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने सिंगापुर में जारी शांगरी-ला डायलॉग 2026 के दौरान 31 मई को अमेरिकी सदन की सशस्त्र सेवा समिति के सदस्य पैट हैरिगन के नेतृत्व में आए द्विदलीय अमेरिकी कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल (CODEL) से मुलाकात की। इस बैठक में भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को और सुदृढ़ करने तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने पर केंद्रित विचार-विमर्श हुआ।
बैठक में क्या हुआ
रक्षा मंत्रालय के जनसंपर्क निदेशालय ने एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय सुरक्षा, रक्षा सहयोग के विस्तार और इंडो-पैसिफिक में साझा रणनीतिक प्राथमिकताओं पर विस्तृत चर्चा की। बातचीत में सूचना साझा करने की व्यवस्था को बेहतर बनाने और समुद्री सहयोग को गहरा करने पर भी जोर दिया गया।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत और अमेरिका के बीच रक्षा एवं प्रौद्योगिकी साझेदारी तेज़ी से विस्तार पा रही है, और दोनों देश इंडो-पैसिफिक में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए बहुपक्षीय ढाँचों में मिलकर काम कर रहे हैं।
अन्य द्विपक्षीय बैठकें
इससे पहले राजेश कुमार सिंह ने न्यूज़ीलैंड के रक्षा मंत्री क्रिस पेनक और सिंगापुर के रक्षा मंत्री चान चुन सिंग के साथ भी अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों में समुद्री सहयोग बढ़ाने, सूचना-साझेदारी की व्यवस्था को मज़बूत करने और एक सुरक्षित, स्थिर तथा समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोहराई गई।
गौरतलब है कि शुक्रवार से रविवार तक चले इस तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन में रक्षा सचिव कई महत्त्वपूर्ण बैठकों का हिस्सा रहे, जो भारत की सक्रिय बहुपक्षीय कूटनीति को दर्शाता है।
थिंक टैंक और विशेषज्ञों से संवाद
डायलॉग के हाशिये पर राजेश कुमार सिंह ने कई प्रमुख थिंक टैंक और अकादमिक विशेषज्ञों के साथ भी विचार-विमर्श किया। चर्चा का केंद्र इंडो-पैसिफिक सुरक्षा ढाँचे को मज़बूत करना, रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाना और उभरती प्रौद्योगिकियों में साझेदारी को नई दिशा देना रहा।
शांगरी-ला डायलॉग का महत्त्व
शांगरी-ला डायलॉग एशिया का सबसे प्रतिष्ठित रक्षा एवं सुरक्षा शिखर सम्मेलन है, जिसे इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज (IISS) सिंगापुर में आयोजित करता है। इसे 'एशिया सुरक्षा शिखर सम्मेलन' के नाम से भी जाना जाता है। इस मंच पर एशिया-प्रशांत, उत्तरी अमेरिका, यूरोप, मध्य पूर्व और अन्य क्षेत्रों के रक्षा मंत्री, सैन्य प्रमुख और नीति-निर्माता क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और उनसे निपटने की रणनीतियों पर खुलकर विचार-विमर्श करते हैं।
इस वर्ष के डायलॉग में भारत की भागीदारी इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली इंडो-पैसिफिक सुरक्षा वास्तुकला में एक सक्रिय और जिम्मेदार भागीदार के रूप में अपनी स्थिति को और पुख्ता कर रही है।