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शांगरी-ला डायलॉग 2025: भारत-नीदरलैंड रक्षा सचिव स्तरीय वार्ता, सैन्य अभ्यास और सहयोग पर बनी सहमति

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शांगरी-ला डायलॉग 2025: भारत-नीदरलैंड रक्षा सचिव स्तरीय वार्ता, सैन्य अभ्यास और सहयोग पर बनी सहमति

सारांश

शांगरी-ला डायलॉग 2025 में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने दो दिनों में नीदरलैंड, EU, नाटो और अमेरिका के शीर्ष रक्षा अधिकारियों से वार्ता की — सैन्य अभ्यास, इंडो-पैसिफिक साझेदारी और रक्षा तकनीक सहयोग पर सहमति बनी।

मुख्य बातें

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 30 मई 2025 को सिंगापुर में नीदरलैंड के रक्षा प्रमुख ओनो आइचेल्सहाइम से द्विपक्षीय वार्ता की।
दोनों पक्षों ने सैन्य आदान-प्रदान कार्यक्रमों और द्विपक्षीय प्रशिक्षण अभ्यासों के विस्तार पर सहमति जताई।
EEAS महासचिव बेलेन मार्टिनिज कॉर्नबोनेल और EU सैन्य समिति के उपाध्यक्ष से भी भारत-EU रणनीतिक संवाद पर चर्चा हुई।
29 मई को नाटो के मिलिट्री कमेटी चेयरमैन और अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड प्रमुख से इंडो-पैसिफिक सहयोग पर बातचीत हुई।
सिंह ने थिंक टैंक विशेषज्ञों से भी संवाद किया; फोकस रक्षा उद्योग सहयोग और नई तकनीकों में साझेदारी पर रहा।

भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 30 मई 2025 को सिंगापुर में नीदरलैंड के रक्षा प्रमुख ओनो आइचेल्सहाइम से द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को नई ऊँचाई देने पर सहमति बनी। यह बैठक तीन दिवसीय शांगरी-ला डायलॉग के दूसरे दिन आयोजित हुई, जो एशिया का सबसे प्रतिष्ठित रक्षा एवं सुरक्षा शिखर सम्मेलन माना जाता है।

वार्ता में क्या हुआ

रक्षा मंत्रालय के जनसंपर्क निदेशालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि बैठक में भारत और नीदरलैंड के बीच रक्षा सहयोग को सुदृढ़ करने के विभिन्न उपायों पर विस्तृत चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने सैन्य आदान-प्रदान कार्यक्रमों और द्विपक्षीय प्रशिक्षण अभ्यासों के ज़रिए सहयोग विस्तार की संभावनाएँ तलाशीं। साथ ही, दोनों देशों की सशस्त्र सेनाओं के बीच आपसी समन्वय और क्षमता निर्माण को प्राथमिकता देने पर भी ज़ोर दिया गया।

यूरोपीय संघ के साथ रणनीतिक संवाद

इसी दौरान राजेश कुमार सिंह ने यूरोपीय बाह्य कार्रवाई सेवा (EEAS) की महासचिव बेलेन मार्टिनिज कॉर्नबोनेल और यूरोपीय संघ सैन्य समिति के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल एनरिको बर्दुआनी से भी बातचीत की। इस बैठक में भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक संवाद को आगे बढ़ाने, साझा सुरक्षा हितों की पहचान करने और रक्षा सहयोग को गहरा करने के अवसरों पर विचार हुआ। क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई।

नाटो और अमेरिका से भी अहम मुलाकातें

29 मई को सिंह ने नाटो की मिलिट्री कमेटी के चेयरमैन एडमिरल ज्यूसेपे कैवो ड्रैगन और अमेरिका के इंडो-पैसिफिक कमांड के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे. पैपारो से मुलाकात की। इन बैठकों में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझेदारी मज़बूत करने, सैन्य सहयोग बढ़ाने और उभरती सुरक्षा चुनौतियों से संयुक्त रूप से निपटने की रणनीतियों पर चर्चा हुई। गौरतलब है कि भारत और नाटो के बीच यह स्तरीय संवाद ऐसे समय में हो रहा है जब इंडो-पैसिफिक में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं।

शांगरी-ला डायलॉग का महत्व

सिंगापुर में आयोजित शांगरी-ला डायलॉग को इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज (IISS) संचालित करता है और इसे 'एशिया सुरक्षा शिखर सम्मेलन' भी कहा जाता है। इस मंच पर एशिया-प्रशांत, उत्तरी अमेरिका, यूरोप और मध्य-पूर्व के रक्षा मंत्री, सैन्य प्रमुख और नीति-निर्माता एकत्र होकर क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर खुली चर्चा करते हैं। इस वर्ष के संस्करण में बड़े सत्रों के साथ-साथ अनेक द्विपक्षीय बैठकें भी आयोजित हुईं।

थिंक टैंक और विशेषज्ञों से संवाद

शांगरी-ला डायलॉग के इतर राजेश कुमार सिंह ने कई प्रमुख थिंक टैंक और अकादमिक विशेषज्ञों से भी विचार-विमर्श किया। चर्चा का केंद्र इंडो-पैसिफिक सुरक्षा ढाँचे को सुदृढ़ करना, रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाना और उभरती तकनीकों में साझेदारी स्थापित करना रहा। इन संवादों से संकेत मिलता है कि भारत वैश्विक रक्षा कूटनीति में अपनी सक्रिय भूमिका को और विस्तार दे रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यूरोपीय संघ, नाटो और अमेरिका — रक्षा सचिव सिंह की यह व्यस्त कूटनीतिक दौड़ बताती है कि भारत अब केवल 'रणनीतिक स्वायत्तता' के नारे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पश्चिमी सुरक्षा ढाँचों के साथ व्यावहारिक जुड़ाव की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब इंडो-पैसिफिक में चीन की बढ़ती सैन्य उपस्थिति और यूरोप में जारी संघर्ष ने वैश्विक सुरक्षा समीकरणों को नए सिरे से परिभाषित कर दिया है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि इस तरह की बहुपक्षीय बैठकों से ठोस सैन्य-औद्योगिक समझौते कितनी जल्दी साकार होते हैं, यह देखना अभी बाकी है। असली कसौटी यह होगी कि ये संवाद कागज़ी इरादों से आगे बढ़कर सत्यापन-योग्य सहयोग में कब और कैसे तब्दील होते हैं।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शांगरी-ला डायलॉग 2025 में भारत ने किन देशों से रक्षा वार्ता की?
भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने सिंगापुर में नीदरलैंड, यूरोपीय संघ, नाटो और अमेरिका के शीर्ष रक्षा अधिकारियों से द्विपक्षीय वार्ता की। इन बैठकों में सैन्य अभ्यास, इंडो-पैसिफिक सुरक्षा और रक्षा उद्योग सहयोग प्रमुख विषय रहे।
भारत और नीदरलैंड के बीच रक्षा सहयोग में क्या नया तय हुआ?
दोनों देशों ने सैन्य आदान-प्रदान कार्यक्रमों और द्विपक्षीय प्रशिक्षण अभ्यासों के विस्तार पर सहमति जताई। साथ ही, दोनों सशस्त्र सेनाओं के बीच समन्वय और क्षमता निर्माण को प्राथमिकता देने पर भी ज़ोर दिया गया।
शांगरी-ला डायलॉग क्या है और इसे कौन आयोजित करता है?
शांगरी-ला डायलॉग एशिया का प्रमुख रक्षा एवं सुरक्षा शिखर सम्मेलन है, जिसे इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज (IISS) सिंगापुर में आयोजित करता है। इसे 'एशिया सुरक्षा शिखर सम्मेलन' भी कहा जाता है और इसमें दुनियाभर के रक्षा मंत्री, सैन्य प्रमुख और नीति-निर्माता भाग लेते हैं।
भारत और नाटो के बीच इंडो-पैसिफिक पर क्या चर्चा हुई?
29 मई को रक्षा सचिव सिंह ने नाटो मिलिट्री कमेटी के चेयरमैन एडमिरल ज्यूसेपे कैवो ड्रैगन से मुलाकात की, जिसमें इंडो-पैसिफिक में साझेदारी मज़बूत करने और नई सुरक्षा चुनौतियों से निपटने पर विचार हुआ। अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड प्रमुख एडमिरल सैमुअल जे. पैपारो के साथ भी सैन्य सहयोग और रणनीतिक बातचीत पर चर्चा हुई।
इन बैठकों से भारत की रक्षा कूटनीति पर क्या असर पड़ेगा?
ये बैठकें भारत की बहुआयामी रक्षा कूटनीति को दर्शाती हैं, जिसमें वह एक साथ यूरोपीय और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा ढाँचों में सक्रिय भागीदारी निभा रहा है। रक्षा उद्योग सहयोग और नई तकनीकों में साझेदारी के संकेत भविष्य में ठोस समझौतों की नींव बन सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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