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शांगरी-ला डायलॉग 2025: रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 7 देशों के प्रतिनिधियों से की द्विपक्षीय वार्ता

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शांगरी-ला डायलॉग 2025: रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 7 देशों के प्रतिनिधियों से की द्विपक्षीय वार्ता

सारांश

शांगरी-ला डायलॉग 2025 में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने एक ही दिन में सात देशों और यूरोपीय संघ के वरिष्ठ प्रतिनिधियों से द्विपक्षीय वार्ता की — समुद्री सहयोग, रक्षा तकनीक और इंडो-पैसिफिक स्थिरता पर भारत की बहुआयामी रक्षा कूटनीति का व्यापक प्रदर्शन।

मुख्य बातें

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 31 मई 2025 को शांगरी-ला डायलॉग , सिंगापुर में 7 देशों और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों से द्विपक्षीय बैठकें कीं।
न्यूजीलैंड और सिंगापुर के रक्षा मंत्रियों के साथ समुद्री सहयोग और सूचना-आदान-प्रदान पर चर्चा हुई।
सिंगापुर के राष्ट्रपति थर्मन शनमुगरत्नम से स्वागत समारोह में मुलाकात; रणनीतिक संबंध मजबूत करने पर सहमति।
स्वीडन और नीदरलैंड के साथ रक्षा तकनीक, नवाचार और संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण पर साझेदारी के नए अवसर तलाशे गए।
ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा और आगामी उच्च-स्तरीय कार्यक्रमों पर चर्चा।
EU सैन्य समिति और यूरोपीय विदेश सेवा के साथ साझा सुरक्षा हितों पर रणनीतिक संवाद आगे बढ़ा।

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 31 मई 2025 को सिंगापुर में आयोजित शांगरी-ला डायलॉग के दौरान न्यूजीलैंड और सिंगापुर के रक्षा मंत्रियों सहित सात देशों और यूरोपीय संघ के वरिष्ठ प्रतिनिधियों से द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन वार्ताओं में समुद्री सहयोग, रक्षा तकनीक, सैन्य आदान-प्रदान और एक स्थिर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति साझा प्रतिबद्धता को केंद्र में रखा गया।

मुख्य द्विपक्षीय बैठकें

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, राजेश कुमार सिंह ने न्यूजीलैंड और सिंगापुर के रक्षा मंत्रियों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं, जिनमें द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को सुदृढ़ करने, समुद्री सहयोग बढ़ाने और सूचना-आदान-प्रदान की व्यवस्थाओं को और प्रभावी बनाने पर विचार-विमर्श हुआ। दोनों बैठकों में एक सुरक्षित, स्थिर और समावेशी इंडो-पैसिफिक के प्रति साझा संकल्प को दोहराया गया।

इससे एक दिन पहले, शनिवार को एक स्वागत समारोह के दौरान सिंह ने सिंगापुर के राष्ट्रपति थर्मन शनमुगरत्नम से भी मुलाकात की। दोनों पक्षों ने रणनीतिक संबंधों को और मजबूत बनाने तथा आपसी हित के क्षेत्रों में सहयोग विस्तार पर चर्चा की।

यूरोपीय देशों के साथ रक्षा तकनीक पर जोर

सिंह ने स्वीडन के रक्षा मंत्री के राज्य सचिव पीटर सैंडवाल से मुलाकात की, जिसमें रक्षा क्षेत्र में सहयोग और रक्षा तकनीक व नवाचार में साझेदारी के नए अवसरों पर विशेष ध्यान दिया गया। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि भारत-स्वीडन रक्षा सहयोग को तकनीकी नवाचार के माध्यम से नई ऊँचाई देने पर सहमति बनी।

नीदरलैंड के साथ दो स्तरों पर बातचीत हुई — पहले चीफ ऑफ डिफेंस जनरल ओन्नो आइकेल्सहेम के साथ, जिसमें सैन्य आदान-प्रदान कार्यक्रमों और संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यासों पर चर्चा हुई; और बाद में रक्षा मंत्री दिलान येसिलगोज-जेगेरियस के साथ, जहाँ रक्षा उद्योग साझेदारी के नए अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया।

यूरोपीय संघ के साथ रणनीतिक संवाद

सिंह ने यूरोपीय विदेश सेवा की महासचिव बेलेन मार्टिनेज कार्बोनेल और यूरोपीय संघ सैन्य समिति के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल एनरिको बारडुआनी से भी बैठक की। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन बैठकों के ज़रिए भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक संवाद को आगे बढ़ाया गया और साझा सुरक्षा हितों पर विस्तार से चर्चा हुई।

भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा

ऑस्ट्रेलिया की रक्षा सचिव मेगन क्विन के साथ द्विपक्षीय वार्ता में भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की गई। दोनों पक्षों ने आगामी उच्च-स्तरीय कार्यक्रमों पर चर्चा की और आपसी हित के क्षेत्रों में रक्षा सहयोग को और गहरा करने के रास्ते तलाशे। रक्षा मंत्रालय के जनसंपर्क निदेशालय ने एक्स पर इस वार्ता की जानकारी साझा की।

शांगरी-ला डायलॉग का महत्व

यह ऐसे समय में आया है जब इंडो-पैसिफिक में समुद्री तनाव और रक्षा साझेदारियों को लेकर वैश्विक ध्यान बढ़ा है। शांगरी-ला डायलॉग एशिया-प्रशांत क्षेत्र का सबसे प्रतिष्ठित सुरक्षा सम्मेलन है, जहाँ विभिन्न देशों के रक्षा मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी अहम क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार साझा करते हैं। गौरतलब है कि भारत इस मंच का उपयोग बहुपक्षीय रक्षा कूटनीति के लिए लगातार करता आया है। इस बार एक ही डायलॉग के दौरान सात देशों और यूरोपीय संघ के साथ बैठकें भारत की सक्रिय रक्षा कूटनीति का स्पष्ट संकेत हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इन वार्ताओं से ठोस समझौते और सैन्य सहयोग कब तक धरातल पर उतरते हैं। भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति में यूरोपीय देशों की बढ़ती भागीदारी उल्लेखनीय है, विशेषकर ऐसे समय में जब नीदरलैंड और स्वीडन जैसे देश रक्षा तकनीक निर्यात में भारत को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि इस तरह की बहुपक्षीय कूटनीति अक्सर घोषणाओं तक सीमित रह जाती है — जब तक कि इसे बाध्यकारी रक्षा समझौतों और संयुक्त उत्पादन व्यवस्थाओं में नहीं बदला जाता।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शांगरी-ला डायलॉग 2025 में भारत ने किन देशों के साथ बैठकें कीं?
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 31 मई 2025 को सिंगापुर, न्यूजीलैंड, स्वीडन, नीदरलैंड और ऑस्ट्रेलिया के रक्षा प्रतिनिधियों के साथ-साथ यूरोपीय संघ के वरिष्ठ अधिकारियों से द्विपक्षीय बैठकें कीं। इसके अलावा सिंगापुर के राष्ट्रपति थर्मन शनमुगरत्नम से भी मुलाकात हुई।
शांगरी-ला डायलॉग क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
शांगरी-ला डायलॉग सिंगापुर में आयोजित होने वाला एशिया-प्रशांत क्षेत्र का प्रमुख वार्षिक सुरक्षा सम्मेलन है, जिसमें विभिन्न देशों के रक्षा मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भाग लेते हैं। यह मंच इंडो-पैसिफिक सुरक्षा, समुद्री स्थिरता और द्विपक्षीय रक्षा सहयोग पर संवाद के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा में क्या हुआ?
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और ऑस्ट्रेलिया की रक्षा सचिव मेगन क्विन ने भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की। दोनों पक्षों ने आगामी उच्च-स्तरीय कार्यक्रमों पर चर्चा की और आपसी हित के क्षेत्रों में रक्षा सहयोग को और गहरा करने के रास्ते तलाशे।
भारत-स्वीडन और भारत-नीदरलैंड रक्षा वार्ता में किन विषयों पर चर्चा हुई?
स्वीडन के रक्षा मंत्री के राज्य सचिव पीटर सैंडवाल के साथ रक्षा तकनीक और नवाचार में साझेदारी पर ध्यान केंद्रित किया गया। नीदरलैंड के साथ दो अलग बैठकों में सैन्य आदान-प्रदान कार्यक्रम, संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास और रक्षा उद्योग साझेदारी के नए अवसरों पर विचार-विमर्श हुआ।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच रक्षा संवाद का क्या महत्व है?
यूरोपीय विदेश सेवा की महासचिव और EU सैन्य समिति के उपाध्यक्ष के साथ बैठकों में साझा सुरक्षा हितों और रक्षा-रणनीतिक सहयोग पर चर्चा हुई। यह भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति में यूरोपीय भागीदारी को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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