नेपाल बाढ़ त्रासदी के लिए चीन जिम्मेदार: रक्षा विशेषज्ञ पीके सहगल का बड़ा आरोप
सारांश
मुख्य बातें
रिटायर्ड मेजर जनरल और रक्षा विशेषज्ञ पीके सहगल ने 28 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में कहा कि नेपाल में आई भीषण बाढ़ और व्यापक तबाही के लिए चीन की नीतियाँ और उसकी चुप्पी सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। उनके अनुसार, यदि चीन ने समय पर पारदर्शी प्रारंभिक चेतावनी जारी की होती, तो जान-माल का नुकसान काफी हद तक टाला जा सकता था।
मुख्य आरोप: चेतावनी छुपाई, इकोलॉजी से खिलवाड़
सहगल ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'इसमें बिल्कुल भी संदेह नहीं है कि नेपाल में जो त्रासदी हुई है, जिसने भारी तबाही मचाई है, चीन समय पर और पारदर्शी तरीके से शुरुआती चेतावनी जारी करके नुकसान को काफी हद तक कम कर सकता था, जो उसने नहीं किया।' उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर नेपाल के आम नागरिक खुलकर चीन को इस आपदा के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
हिमालयी पारिस्थितिकी पर चीनी निर्माण का असर
सहगल ने दावा किया कि चीन के बड़े पैमाने पर किए गए निर्माण कार्यों — जिनमें बांध निर्माण, नदी मोड़ने की परियोजनाएँ, टनलिंग और नई सड़कें काटना शामिल हैं — ने पहले से ही नाजुक हिमालयी पारिस्थितिकी को बुरी तरह क्षतिग्रस्त किया है। उल्लेखनीय है कि सहगल के अनुसार चीन के अपने इंजीनियरों और नीति-निर्माताओं ने भी इन परियोजनाओं के खिलाफ आंतरिक चेतावनियाँ दी थीं, लेकिन चीनी प्रतिष्ठान ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया।
यह ऐसे समय में आया है जब हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक वर्षा की घटनाएँ पहले से ही बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस संवेदनशील भूगोल में बड़े पैमाने पर मानवीय हस्तक्षेप से बाढ़ और भूस्खलन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
भारत की जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल खरीद पर विशेषज्ञ का विश्लेषण
इसी बातचीत में सहगल ने भारत की अमेरिकी जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल प्रणाली खरीदने की योजना पर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, 'भारत स्पष्ट रूप से समझता है कि पाकिस्तान और चीन एक समन्वित हमला कर सकते हैं। दोनों के पास पर्याप्त टैंक क्षमताएँ हैं। वर्तमान में, भारत को एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों में बड़ी कमी का सामना करना पड़ रहा है।'
सहगल के अनुसार, भारत काफी समय से अमेरिका से जैवलिन प्रणाली हासिल करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन प्रगति नहीं हो रही थी। अब भारत में अमेरिकी राजदूत गोर के हालिया बयानों से संकेत मिलता है कि एक राजनीतिक निर्णय लिया जा चुका है और ये मिसाइलें जल्द ही भारत पहुँच सकती हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
सहगल का यह बयान केवल कूटनीतिक आरोप नहीं है — यह एक व्यापक सैन्य-रणनीतिक चिंता को उजागर करता है। गौरतलब है कि नेपाल भारत और चीन दोनों के लिए भूराजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र है, और इस त्रासदी ने चीन की 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) से जुड़ी परियोजनाओं की पर्यावरणीय जवाबदेही पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
आगे क्या होगा
नेपाल सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है कि वह चीन से इन परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभाव का स्वतंत्र मूल्यांकन कराए। भारत की ओर से जैवलिन मिसाइल सौदे की आधिकारिक पुष्टि अगले कुछ हफ्तों में अपेक्षित है, जो दक्षिण एशियाई सुरक्षा समीकरण को नई दिशा दे सकती है।