नेपाल बाढ़: रासुवागढ़ी में 11 तिब्बती परिवार तबाह, तिब्बती PM पेनपा त्सेरिंग बोले — 'चीन नेपाल पर डाल रहा दोष'
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल के रसुवा क्षेत्र और तिब्बत के कीरोंग में आई विनाशकारी बाढ़ ने रासुवागढ़ी की तिब्बती बस्ती को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है। निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री पेनपा त्सेरिंग ने 27 अगस्त को धर्मशाला से जानकारी दी कि रासुवागढ़ी की तिब्बती बस्ती में रहने वाले लगभग 11 तिब्बती परिवार पूरी तरह प्रभावित हो गए हैं और दो बुज़ुर्गों का अभी कोई अता-पता नहीं है। इस आपदा में मारे गए लोगों के लिए दलाई लामा मंदिर में विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की गई।
रासुवागढ़ी में तबाही का मंज़र
पेनपा त्सेरिंग ने बताया, 'रासुवागढ़ी में हमारी पाँच छोटी तिब्बती बस्तियाँ हैं। उनमें से तीन ऊपरी इलाकों में हैं, इसलिए उन्हें कोई नुकसान नहीं हुआ। लेकिन रासुवागढ़ी की तिब्बती बस्ती में लगभग 11 तिब्बती परिवार थे — वे सभी खत्म हो गए हैं। उनमें से सिर्फ दो बुज़ुर्ग वहाँ रहते थे, और अभी तक हमें उनके बारे में कुछ नहीं पता।' उन्होंने भरोसा दिलाया कि निर्वासित तिब्बत सरकार हर संभव सहायता प्रदान करेगी।
चीन पर दोष मढ़ने का आरोप
तिब्बती प्रधानमंत्री ने आपदा की उत्पत्ति को लेकर चीन की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'भारतीय खबरों के अनुसार ऐसा लगता है कि इस आपदा की शुरुआत तिब्बत के 20 किलोमीटर अंदर से हुई है, जबकि चीनी सरकार यह कहने की कोशिश कर रही है कि यह नेपाल के अंदर है।' उनके इस बयान ने आपदा की भौगोलिक जिम्मेदारी को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। गौरतलब है कि तिब्बती क्षेत्र से होते हुए बाढ़ का पानी सीमा पार भोटेकोशी नदी में पहुँचा और नेपाल में व्यापक तबाही मचाई।
दलाई लामा की संवेदना और चेतावनी
नोबेल शांति पुरस्कार विजेता दलाई लामा ने 27 अगस्त को एक बयान जारी कर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'नेपाल के रसुवा क्षेत्र और तिब्बत के कीरोंग में विनाशकारी बाढ़ के बारे में जानकर मुझे दुख हुआ है। इस आपदा की वजह से कई लोगों ने जान गंवाई और भारी संरचनात्मक क्षति हुई। मैं उन सभी लोगों के लिए प्रार्थना करता हूँ जिन्होंने अपनी जान गंवाई है, और शोक संतप्त एवं इस त्रासदी से पीड़ित सभी लोगों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूँ।'
दलाई लामा ने यह भी कहा कि चूँकि इस क्षेत्र ने पहले भी आपदाएँ झेली हैं, ये निश्चित रूप से किसी गहरे अंतर्निहित कारण के लक्षण हैं — चाहे वो जलवायु परिवर्तन हो या अन्य कारक। उन्होंने उम्मीद जताई कि जहाँ भी संभव हो, उचित अनुवर्ती उपाय किए जाएँ ताकि ऐसी आपदाएँ दोबारा न हों।
आम जनता और तिब्बती समुदाय पर असर
यह आपदा ऐसे समय में आई है जब नेपाल का रसुवा जिला पहले से ही मानसून की मार झेल रहा था। तिब्बती शरणार्थी समुदाय, जो दशकों से इस सीमावर्ती क्षेत्र में बसा हुआ है, इस बाढ़ से सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ है। निर्वासित तिब्बत सरकार ने राहत एवं पुनर्वास के प्रयास शुरू किए हैं, हालाँकि दुर्गम भूगोल के कारण राहत कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
आगे की राह
निर्वासित तिब्बत सरकार ने प्रभावित परिवारों की पहचान और लापता लोगों की तलाश जारी रखने का संकल्प जताया है। आपदा की उत्पत्ति को लेकर चीन और तिब्बती पक्ष के बीच जारी विवाद आने वाले दिनों में कूटनीतिक तनाव का कारण बन सकता है। जलवायु विशेषज्ञों के अनुसार, हिमालयी क्षेत्र में इस तरह की अचानक बाढ़ की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं, जो दीर्घकालिक पर्यावरणीय नीति की माँग करती हैं।