27 अगस्त 2026
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नेपाल बाढ़: रासुवागढ़ी में 11 तिब्बती परिवार तबाह, तिब्बती PM पेनपा त्सेरिंग बोले — 'चीन नेपाल पर डाल रहा दोष'

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नेपाल बाढ़: रासुवागढ़ी में 11 तिब्बती परिवार तबाह, तिब्बती PM पेनपा त्सेरिंग बोले — 'चीन नेपाल पर डाल रहा दोष'

सारांश

नेपाल के रसुवा और तिब्बत के कीरोंग में आई विनाशकारी बाढ़ ने रासुवागढ़ी की तिब्बती बस्ती को मिटा दिया। तिब्बती PM पेनपा त्सेरिंग का आरोप है कि आपदा तिब्बत के 20 किमी अंदर से शुरू हुई, पर चीन जिम्मेदारी नेपाल पर डाल रहा है — दलाई लामा ने जलवायु परिवर्तन को गहरा कारण बताया।

मुख्य बातें

रासुवागढ़ी की तिब्बती बस्ती के लगभग 11 तिब्बती परिवार बाढ़ में पूरी तरह तबाह हो गए।
2 बुज़ुर्ग अभी भी लापता हैं, निर्वासित तिब्बत सरकार को उनका कोई पता नहीं।
तिब्बती PM पेनपा त्सेरिंग का आरोप — आपदा तिब्बत के 20 किलोमीटर अंदर से शुरू हुई, लेकिन चीन इसे नेपाल की जिम्मेदारी बता रहा है।
दलाई लामा ने 27 अगस्त को बयान जारी कर शोक व्यक्त किया और जलवायु परिवर्तन को अंतर्निहित कारण बताया।
तिब्बती क्षेत्र से बाढ़ का पानी भोटेकोशी नदी के रास्ते नेपाल में घुसा और व्यापक तबाही मचाई।

नेपाल के रसुवा क्षेत्र और तिब्बत के कीरोंग में आई विनाशकारी बाढ़ ने रासुवागढ़ी की तिब्बती बस्ती को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है। निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री पेनपा त्सेरिंग ने 27 अगस्त को धर्मशाला से जानकारी दी कि रासुवागढ़ी की तिब्बती बस्ती में रहने वाले लगभग 11 तिब्बती परिवार पूरी तरह प्रभावित हो गए हैं और दो बुज़ुर्गों का अभी कोई अता-पता नहीं है। इस आपदा में मारे गए लोगों के लिए दलाई लामा मंदिर में विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की गई।

रासुवागढ़ी में तबाही का मंज़र

पेनपा त्सेरिंग ने बताया, 'रासुवागढ़ी में हमारी पाँच छोटी तिब्बती बस्तियाँ हैं। उनमें से तीन ऊपरी इलाकों में हैं, इसलिए उन्हें कोई नुकसान नहीं हुआ। लेकिन रासुवागढ़ी की तिब्बती बस्ती में लगभग 11 तिब्बती परिवार थे — वे सभी खत्म हो गए हैं। उनमें से सिर्फ दो बुज़ुर्ग वहाँ रहते थे, और अभी तक हमें उनके बारे में कुछ नहीं पता।' उन्होंने भरोसा दिलाया कि निर्वासित तिब्बत सरकार हर संभव सहायता प्रदान करेगी।

चीन पर दोष मढ़ने का आरोप

तिब्बती प्रधानमंत्री ने आपदा की उत्पत्ति को लेकर चीन की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'भारतीय खबरों के अनुसार ऐसा लगता है कि इस आपदा की शुरुआत तिब्बत के 20 किलोमीटर अंदर से हुई है, जबकि चीनी सरकार यह कहने की कोशिश कर रही है कि यह नेपाल के अंदर है।' उनके इस बयान ने आपदा की भौगोलिक जिम्मेदारी को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। गौरतलब है कि तिब्बती क्षेत्र से होते हुए बाढ़ का पानी सीमा पार भोटेकोशी नदी में पहुँचा और नेपाल में व्यापक तबाही मचाई।

दलाई लामा की संवेदना और चेतावनी

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता दलाई लामा ने 27 अगस्त को एक बयान जारी कर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'नेपाल के रसुवा क्षेत्र और तिब्बत के कीरोंग में विनाशकारी बाढ़ के बारे में जानकर मुझे दुख हुआ है। इस आपदा की वजह से कई लोगों ने जान गंवाई और भारी संरचनात्मक क्षति हुई। मैं उन सभी लोगों के लिए प्रार्थना करता हूँ जिन्होंने अपनी जान गंवाई है, और शोक संतप्त एवं इस त्रासदी से पीड़ित सभी लोगों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूँ।'

दलाई लामा ने यह भी कहा कि चूँकि इस क्षेत्र ने पहले भी आपदाएँ झेली हैं, ये निश्चित रूप से किसी गहरे अंतर्निहित कारण के लक्षण हैं — चाहे वो जलवायु परिवर्तन हो या अन्य कारक। उन्होंने उम्मीद जताई कि जहाँ भी संभव हो, उचित अनुवर्ती उपाय किए जाएँ ताकि ऐसी आपदाएँ दोबारा न हों।

आम जनता और तिब्बती समुदाय पर असर

यह आपदा ऐसे समय में आई है जब नेपाल का रसुवा जिला पहले से ही मानसून की मार झेल रहा था। तिब्बती शरणार्थी समुदाय, जो दशकों से इस सीमावर्ती क्षेत्र में बसा हुआ है, इस बाढ़ से सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ है। निर्वासित तिब्बत सरकार ने राहत एवं पुनर्वास के प्रयास शुरू किए हैं, हालाँकि दुर्गम भूगोल के कारण राहत कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

आगे की राह

निर्वासित तिब्बत सरकार ने प्रभावित परिवारों की पहचान और लापता लोगों की तलाश जारी रखने का संकल्प जताया है। आपदा की उत्पत्ति को लेकर चीन और तिब्बती पक्ष के बीच जारी विवाद आने वाले दिनों में कूटनीतिक तनाव का कारण बन सकता है। जलवायु विशेषज्ञों के अनुसार, हिमालयी क्षेत्र में इस तरह की अचानक बाढ़ की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं, जो दीर्घकालिक पर्यावरणीय नीति की माँग करती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

महज़ एक भौगोलिक दावा नहीं है — यह एक राजनीतिक आरोप है जिसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना फिलहाल असंभव है, क्योंकि तिब्बत में अंतरराष्ट्रीय मीडिया की पहुँच नहीं है। चीन का यह पैटर्न नया नहीं है — सीमा पार आपदाओं में जिम्मेदारी से बचने की यह रणनीति पहले भी देखी गई है। दलाई लामा का जलवायु परिवर्तन का संदर्भ महत्वपूर्ण है, क्योंकि हिमालयी ग्लेशियरों के पिघलने से इस पूरे क्षेत्र में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) का खतरा तेज़ी से बढ़ रहा है — और इस पर भारत, नेपाल व चीन के बीच कोई ठोस साझा तंत्र अभी तक नहीं बना है।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रासुवागढ़ी में तिब्बती परिवारों पर बाढ़ का क्या असर पड़ा?
रासुवागढ़ी की तिब्बती बस्ती के लगभग 11 परिवार इस बाढ़ में पूरी तरह तबाह हो गए हैं। बस्ती में रहने वाले दो बुज़ुर्गों का अभी तक कोई पता नहीं चला है और निर्वासित तिब्बत सरकार उनकी तलाश में जुटी है।
तिब्बती PM पेनपा त्सेरिंग ने चीन पर क्या आरोप लगाया?
पेनपा त्सेरिंग ने कहा कि भारतीय खबरों के अनुसार यह आपदा तिब्बत के 20 किलोमीटर अंदर से शुरू हुई, लेकिन चीनी सरकार इसे नेपाल के अंदर की घटना बताने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार चीन जिम्मेदारी से बचने के लिए नेपाल पर दोष मढ़ रहा है।
दलाई लामा ने इस आपदा पर क्या कहा?
दलाई लामा ने 27 अगस्त को जारी बयान में नेपाल के रसुवा और तिब्बत के कीरोंग में हुई जनहानि पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र पहले भी आपदाओं से गुज़रा है और इसके पीछे जलवायु परिवर्तन जैसे गहरे अंतर्निहित कारण हो सकते हैं।
भोटेकोशी नदी का इस बाढ़ से क्या संबंध है?
तिब्बती क्षेत्र से आई बाढ़ का पानी सीमा पार भोटेकोशी नदी में पहुँचा और नेपाल में व्यापक तबाही मचाई। यह नदी तिब्बत-नेपाल सीमा को पार करते हुए रसुवा और आसपास के जिलों से होकर बहती है।
निर्वासित तिब्बत सरकार इस आपदा में क्या कर रही है?
निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री पेनपा त्सेरिंग ने भरोसा दिलाया है कि सरकार हर संभव सहायता प्रदान करेगी। साथ ही लापता बुज़ुर्गों की तलाश और प्रभावित परिवारों की पहचान का काम जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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