27 अगस्त 2026
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नेपाल बाढ़: विदेश मंत्री शिशिर खनल बोले — 'हिमालय में जो पिघलता है, वो समुद्र में उठता है', 359 की मौत

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नेपाल बाढ़: विदेश मंत्री शिशिर खनल बोले — 'हिमालय में जो पिघलता है, वो समुद्र में उठता है', 359 की मौत

सारांश

नेपाल में बाढ़ से 359 मौतें और विदेश मंत्री शिशिर खनल की चेतावनी — 'हिमालय में जो पिघलता है, वो समुद्र में उठता है।' यह सिर्फ एक त्रासदी नहीं, बल्कि भारत-नेपाल-चीन-भूटान के लिए एक साझा पारिस्थितिकी संकट की दस्तक है जिसे राजनीतिक सीमाएँ नहीं रोक सकतीं।

मुख्य बातें

नेपाल में 27 अगस्त 2026 को आई भीषण बाढ़ में मृतकों की संख्या 359 हो गई है — नेपाल पुलिस के हवाले से कान्तिपुर ने यह आँकड़ा दिया।
विदेश मंत्री शिशिर खनल ने काठमांडू में 'अन्वीक्षा' समिट में हिमालयी पारिस्थितिकी को भारत-नेपाल के लिए 'साझा खतरा' बताया।
खनल ने भारत , नेपाल , चीन और भूटान को पारिस्थितिकी सहयोग के लिए एकजुट होने की अपील की।
हिमालयी अस्थिरता से क्षेत्र के करीब दो अरब लोगों की मीठे पानी की आपूर्ति खतरे में पड़ सकती है।
गंडक और कोसी नदियों के ज़रिए नेपाली बाढ़ का असर उत्तर प्रदेश और बिहार तक पहुँच सकता है; इस बार सीमावर्ती इलाकों में सतर्कता बढ़ाई गई थी।

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनल ने 27 अगस्त 2026 को काठमांडू में आयोजित 'अन्वीक्षा' समिट में चेतावनी दी कि हिमालय की पारिस्थितिकी अब भारत और नेपाल के लिए एक 'साझा खतरा' बन चुकी है। यह बयान ऐसे समय आया जब नेपाल-चीन सीमा के हिमालयी क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ से मृतकों की संख्या 359 तक पहुँच गई है — यह आँकड़ा नेपाली मीडिया आउटलेट कान्तिपुर ने नेपाल पुलिस के हवाले से दिया है।

मुख्य घटनाक्रम

बुधवार को नेपाल-चीन सीमा के हिमालयी क्षेत्र में अचानक तेज़ जलप्रवाह ने निचले इलाकों में भारी तबाही मचाई। खनल ने समिट में कहा कि इस बार बाढ़ का पानी भारतीय सीमा तक नहीं पहुँचा, लेकिन अतीत में ऐसा हो चुका है और भविष्य में भी इसकी पूरी आशंका है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, 'सौभाग्य से इस बार बाढ़ भारतीय सीमा से लगे इलाकों तक नहीं पहुँची, लेकिन ऐसा पहले हो चुका है।'

भारत-नेपाल संबंधों को नए नज़रिये से देखने की अपील

खनल ने कहा कि भारत और नेपाल के संबंध अब तक 'रोटी-बेटी' और 'सीता-राम' जैसे सांस्कृतिक-धार्मिक सूत्रों में बंधे रहे हैं, लेकिन अब इन्हें पारिस्थितिकी के संदर्भ में भी नए सिरे से परिभाषित करना होगा। उनके शब्दों में, 'हिमालय में जो पिघलता है, वह समुद्र में उठता है।' यह कथन ग्लेशियर पिघलने और समुद्र स्तर वृद्धि के बीच के सीधे संबंध को रेखांकित करता है।

क्षेत्रीय सहयोग की ज़रूरत

नेपाल के विदेश मंत्री ने भारत, नेपाल, चीन और भूटान के बीच पारिस्थितिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, 'राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता हो सकती है, लेकिन हमें साथ आना होगा, क्योंकि हिमालयी क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील है।' खनल ने यह भी आगाह किया कि हिमालयी पारिस्थितिकी में बढ़ती अस्थिरता से क्षेत्र के करीब दो अरब लोगों की मीठे पानी की उपलब्धता खतरे में पड़ सकती है।

भारत के सीमावर्ती राज्यों पर असर

नेपाल से निकलने वाली गंडक (नारायणी) और कोसी जैसी प्रमुख नदियाँ उत्तर प्रदेश और बिहार के मैदानी इलाकों में प्रवेश करती हैं। हालिया बाढ़ के बाद इन राज्यों के सीमावर्ती ज़िलों में सतर्कता बढ़ाई गई थी। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब नेपाल में आई बाढ़ ने भारत के उत्तरी मैदानों में भी तबाही मचाई हो — कोसी नदी का 2008 का महाप्रलय इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

आगे क्या

खनल का यह बयान हिमालयी देशों के बीच एक साझा पारिस्थितिकी ढाँचे की माँग को नई धार देता है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक भारत, नेपाल, चीन और भूटान मिलकर जलवायु-अनुकूल नदी प्रबंधन नीति नहीं बनाते, हिमालयी बाढ़ का खतरा हर मानसून के साथ गहराता रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार संदर्भ अधिक तीखा है। 359 मौतें और भारत के सीमावर्ती राज्यों में बढ़ती सतर्कता यह साबित करती है कि यह विषय अब केवल पर्यावरण सम्मेलनों तक सीमित नहीं रह सकता। विडंबना यह है कि भारत-नेपाल के बीच कोसी और गंडक नदियों पर जल-बंटवारे के पुराने विवाद अभी भी अनसुलझे हैं, जबकि जलवायु परिवर्तन इन नदियों के प्रवाह को और अनिश्चित बना रहा है। बिना किसी बाध्यकारी क्षेत्रीय आपदा-प्रबंधन ढाँचे के, खनल की अपील एक नेक इरादे वाली घोषणा से अधिक नहीं बन पाएगी।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल बाढ़ 2026 में कितने लोगों की मौत हुई?
नेपाल पुलिस के हवाले से कान्तिपुर की रिपोर्ट के अनुसार, 27 अगस्त 2026 को आई भीषण बाढ़ में मृतकों की संख्या 359 हो गई है। नेपाल-चीन सीमा के हिमालयी क्षेत्र में अचानक आए तेज़ जलप्रवाह से नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मची।
शिशिर खनल ने 'हिमालय में जो पिघलता है' वाला बयान क्यों दिया?
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनल ने काठमांडू में 'अन्वीक्षा' समिट में यह बयान देते हुए ग्लेशियर पिघलने और समुद्र स्तर वृद्धि के बीच के सीधे संबंध को रेखांकित किया। उनका उद्देश्य भारत, नेपाल, चीन और भूटान को हिमालयी पारिस्थितिकी की रक्षा के लिए साझा मंच पर लाना था।
नेपाल की बाढ़ का भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
नेपाल से निकलने वाली गंडक (नारायणी) और कोसी नदियाँ उत्तर प्रदेश और बिहार के मैदानी इलाकों में प्रवेश करती हैं। खनल के अनुसार, इस बार बाढ़ भारतीय सीमा तक नहीं पहुँची, लेकिन अतीत में ऐसा हो चुका है और भविष्य में भी इसकी आशंका बनी रहती है।
हिमालयी पारिस्थितिकी से कितने लोग प्रभावित हो सकते हैं?
खनल ने चेतावनी दी कि हिमालयी पारिस्थितिकी में बढ़ती अस्थिरता से क्षेत्र के करीब दो अरब लोगों की मीठे पानी की उपलब्धता खतरे में पड़ सकती है। भारत, नेपाल, चीन और भूटान सभी हिमालयी जल स्रोतों पर निर्भर हैं।
भारत-नेपाल-चीन-भूटान के बीच पारिस्थितिकी सहयोग की क्या स्थिति है?
अभी तक इन चारों देशों के बीच कोई बाध्यकारी साझा पारिस्थितिकी या आपदा-प्रबंधन ढाँचा नहीं है। खनल ने समिट में इसी कमी को रेखांकित करते हुए कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बावजूद हिमालयी क्षेत्र की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास अनिवार्य हैं।
राष्ट्र प्रेस
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