₹160 करोड़ लोन फ्रॉड: ईडी की मुंबई-वडोदरा में छापेमारी, ₹12.20 करोड़ के गहने और नकदी जब्त
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ₹160.55 करोड़ के बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में 25 अगस्त 2026 को मुंबई और वडोदरा में एक साथ सात ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इस कार्रवाई में ₹43.90 लाख नकद और लगभग ₹12.20 करोड़ मूल्य के आभूषण बरामद किए गए हैं। ईडी के अनुसार जांच अभी जारी है।
मामले की पृष्ठभूमि
ट्रांसफॉर्मर लैमिनेशन और कोर निर्माण क्षेत्र की कंपनी मेसर्स बिलपावर लिमिटेड के खिलाफ यह कार्रवाई भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की शिकायत पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई। आरोप है कि कंपनी ने SBI से विभिन्न ऋण सुविधाएँ लीं और बाद में धोखाधड़ीपूर्ण तरीके से उस राशि को अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया तथा लेखा-पुस्तकों में हेरफेर की, जिससे बैंक को ₹160.55 करोड़ का नुकसान हुआ।
कंपनी का SBI के साथ बैंकिंग संबंध 2005 से था, जिसमें कैश क्रेडिट, वर्किंग कैपिटल टर्म लोन, फंडेड इंटरेस्ट टर्म लोन, कॉर्पोरेट लोन, बैंक गारंटी, लेटर ऑफ क्रेडिट और विदेशी मुद्रा एक्सपोज़र जैसी सुविधाएँ शामिल थीं। यह ऋण खाता 18 अप्रैल 2012 को गैर-निष्पादित आस्ति (NPA) घोषित हो गया था।
मुख्य आरोप: शेल कंपनियाँ और जाली दस्तावेज़
जांच में सामने आया कि बिलपावर लिमिटेड कथित तौर पर कई शेल और फर्जी फर्मों के साथ लेन-देन में संलिप्त थी। इन संस्थाओं के पक्ष में लेटर ऑफ क्रेडिट जारी किए गए और जाली दस्तावेज़ों को वैध बताकर प्रस्तुत किया गया। इसके बाद बैंक से प्राप्त धनराशि को चौधरी परिवार के सदस्यों या उनके सहयोगियों द्वारा नियंत्रित विभिन्न संस्थाओं में स्थानांतरित किया गया — जिसे जांचकर्ताओं ने 'राउंड-ट्रिपिंग' का मामला बताया है।
कंपनी का प्रबंधन राजेंद्र कुमार चौधरी, सुरेश कुमार चौधरी और नरेश कुमार चौधरी के हाथों में था। CBI ने 30 सितंबर 2024 को कंपनी, उसके निदेशकों और सहयोगी संस्थाओं के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की थी।
छापेमारी में क्या मिला
ईडी के मुंबई जोनल कार्यालय ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) 2002 के तहत सात आवासीय और व्यावसायिक परिसरों तथा तीन बैंक लॉकरों की तलाशी ली। इस दौरान ₹43.90 लाख नकद और ₹12.20 करोड़ मूल्य के आभूषण जब्त किए गए।
इसके अतिरिक्त, लगभग ₹27 लाख की शेष राशि वाले दो बैंक खाते और तीन बैंक लॉकर PMLA की धारा 17(1A) के अंतर्गत फ्रीज़ किए गए हैं। तलाशी के दौरान अचल संपत्तियों, भूमि और मशीनरी से जुड़े दस्तावेज़, लेखा-पुस्तकें, लेजर और डिजिटल उपकरण भी बरामद किए गए।
आगे की जांच
ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में जांच अभी जारी है और आगे और कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह मामला उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें बड़े कॉर्पोरेट समूह सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से ऋण लेकर शेल कंपनियों के ज़रिए धन को दूसरी जगह भेज देते हैं। गौरतलब है कि SBI देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक बैंक है और हाल के वर्षों में इसके कई बड़े ऋण खाते NPA बन चुके हैं।