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₹450 करोड़ बैंक फ्रॉड: ईडी की दिल्ली, यूपी और पंजाब में आठ ठिकानों पर एकसाथ छापेमारी

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₹450 करोड़ बैंक फ्रॉड: ईडी की दिल्ली, यूपी और पंजाब में आठ ठिकानों पर एकसाथ छापेमारी

सारांश

₹450 करोड़ के कथित बैंक फ्रॉड में ईडी ने एक साथ तीन राज्यों — दिल्ली, यूपी और पंजाब — में आठ ठिकानों पर छापे मारे। आरोप है कि संतोष ओवरसीज लिमिटेड ने बैंक कंसोर्टियम से लिया ऋण फर्जी कंपनियों और सर्कुलर ट्रांजेक्शन के ज़रिए छिपाया। जांच सीबीआई की प्राथमिकी पर आधारित है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 24 जुलाई को ₹450 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी मामले में आठ ठिकानों पर एकसाथ छापेमारी की।
तलाशी दिल्ली , उत्तर प्रदेश और पंजाब में एम/एस संतोष ओवरसीज लिमिटेड के प्रमोटरों व सहयोगियों के परिसरों पर हुई।
आरोप है कि ऋण राशि को फर्जी कंपनियों और सर्कुलर वित्तीय लेनदेन के ज़रिए कथित तौर पर छिपाया गया।
जांच सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी पर आधारित है; आगे की कार्रवाई जारी है।
इससे पहले 20 जुलाई को ईडी ने एक अलग फर्जी डिग्री मामले में ₹25.44 करोड़ की संपत्तियाँ अटैच की थीं।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लखनऊ जोनल कार्यालय ने 24 जुलाई को ₹450 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी मामले में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत एम/एस संतोष ओवरसीज लिमिटेड और उससे संबद्ध कंपनियों के विरुद्ध दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पंजाब में एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इस कार्रवाई में कुल आठ परिसरों को निशाना बनाया गया।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी सूत्रों के अनुसार, यह जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू की गई है। आरोप है कि संतोष ओवरसीज लिमिटेड ने बैंकों के एक कंसोर्टियम से करीब ₹450 करोड़ का ऋण लिया था। जांच में कथित तौर पर सामने आया है कि इस ऋण राशि को फर्जी कंपनियों, एंट्री ऑपरेटरों और संबंधित संस्थाओं के नेटवर्क के ज़रिए अन्यत्र भेजा गया।

मुख्य घटनाक्रम

जांचकर्ताओं के अनुसार, धन की वास्तविक आवाजाही को छिपाने के लिए कथित तौर पर फर्जी बिलों और सर्कुलर वित्तीय लेनदेन का सहारा लिया गया। तलाशी अभियान में कंपनी के प्रमोटरों, उनसे जुड़ी अन्य कंपनियों और कथित सहयोगियों के परिसर शामिल रहे। ईडी के मुताबिक तलाशी की कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई और आगे की जांच जारी है।

ईडी की पूर्व कार्रवाई से संदर्भ

गौरतलब है कि इससे महज चार दिन पहले, 20 जुलाई को भी ईडी के लखनऊ जोनल कार्यालय ने एक अलग मामले में बड़ी कार्रवाई की थी। उस मामले में फर्जी डिग्री और जाली शैक्षणिक दस्तावेज़ों के एक कारोबार के खिलाफ ₹25.44 करोड़ की चल और अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से अटैच की गई थीं, जिनमें एक फार्महाउस, कई फ्लैट और वाहन शामिल थे।

वह जांच उत्तर प्रदेश एसटीएफ द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित थी, जिसमें खुलासा हुआ था कि हापुड़ स्थित मोनाड यूनिवर्सिटी के नाम का उपयोग कर एक गिरोह फर्जी मार्कशीट, डिग्री, प्रोविजनल सर्टिफिकेट, माइग्रेशन सर्टिफिकेट और अन्य शैक्षणिक दस्तावेज़ तैयार करने, बेचने एवं उनकी फर्जी पुष्टि कराने का अवैध कारोबार चला रहा था।

आगे क्या होगा

ईडी के अनुसार संतोष ओवरसीज लिमिटेड मामले में आगे की जांच जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब एजेंसी उत्तर भारत में वित्तीय अपराधों के विरुद्ध अपनी कार्रवाई को तेज़ कर रही है। तलाशी के दौरान बरामद दस्तावेज़ों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद संभावित गिरफ्तारियों या संपत्ति अटैचमेंट की कार्रवाई भी हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जवाबदेही बैंकिंग प्रणाली की निगरानी खामियों पर भी उतनी ही बनती है जितनी कथित आरोपियों पर।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संतोष ओवरसीज लिमिटेड पर ईडी की कार्रवाई क्यों हुई?
ईडी ने ₹450 करोड़ के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में पीएमएलए, 2002 के तहत यह कार्रवाई की। आरोप है कि कंपनी ने बैंक कंसोर्टियम से लिए ऋण को फर्जी कंपनियों और सर्कुलर ट्रांजेक्शन के ज़रिए कथित तौर पर छिपाया।
ईडी ने किन-किन राज्यों में छापेमारी की?
दिल्ली , उत्तर प्रदेश और पंजाब में कुल आठ ठिकानों पर एकसाथ तलाशी ली गई। इनमें कंपनी के प्रमोटरों, संबद्ध कंपनियों और कथित सहयोगियों के परिसर शामिल थे।
इस जांच का आधार क्या है?
यह जांच सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू की गई है। ईडी पीएमएलए के तहत मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की अलग से जांच कर रही है।
ईडी के लखनऊ कार्यालय ने हाल ही में और क्या कार्रवाई की है?
20 जुलाई को ईडी के लखनऊ जोनल कार्यालय ने फर्जी डिग्री मामले में ₹25.44 करोड़ की संपत्तियाँ अस्थायी रूप से अटैच की थीं। उस मामले में हापुड़ स्थित मोनाड यूनिवर्सिटी के नाम पर फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज़ बनाने का आरोप था।
संतोष ओवरसीज मामले में आगे क्या होगा?
ईडी के अनुसार मामले की आगे की जांच जारी है। तलाशी में बरामद दस्तावेज़ों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद संपत्ति अटैचमेंट या गिरफ्तारी की कार्रवाई संभव है।
राष्ट्र प्रेस
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