14 जुलाई 2026
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ईडी की बड़ी कार्रवाई: नक्सल-मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ₹3.87 करोड़ की 11 संपत्तियाँ जब्त

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ईडी की बड़ी कार्रवाई: नक्सल-मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ₹3.87 करोड़ की 11 संपत्तियाँ जब्त

सारांश

नक्सल हिंसा और जबरन वसूली की आड़ में कमाए गए धन को ज़मीन-जायदाद में बदलने का यह मामला झारखंड में प्रतिबंधित माओवादी संगठनों के वित्तीय नेटवर्क की गहरी जड़ों को उजागर करता है। ईडी की ₹3.87 करोड़ की यह जब्ती उस बड़ी कड़ी का हिस्सा है जिसमें ₹7.16 करोड़ की कुल अवैध कमाई का पीछा किया जा रहा है।

मुख्य बातें

ईडी रांची जोनल ऑफिस ने 13 जुलाई 2026 को पीएमएलए के तहत ₹3.87 करोड़ की 11 अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से जब्त कीं।
कार्रवाई संतोष कंस्ट्रक्शन और 6 सहयोगियों — संतोष कुमार सिंह, मृत्युंजय कुमार उर्फ सोनू सिंह, मनीष कुमार, बैजनाथ गंझू, राजेश कुमार गंझू, रवींद्र गंझू — के खिलाफ हुई।
मामला 22 नवंबर 2019 के लातेहार माओवादी हमले से जुड़ा है, जिसमें झारखंड पुलिस के 4 जवान शहीद हुए थे।
कुल अनुमानित अवैध कमाई (पीओसी) ₹7.16 करोड़ ; इसमें से ₹2.69 करोड़ एनआईए पहले ही नकद बरामद कर चुकी है।
शेष ₹4.46 करोड़ वित्त वर्ष 2017-18 व 2018-19 में फर्म की पूंजी में घुमाए गए और लातेहार में संपत्तियाँ खरीदी गईं।
ईडी ने पुष्टि की है कि आगे की जांच जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रांची जोनल ऑफिस ने 13 जुलाई 2026 को संतोष कंस्ट्रक्शन और उसके छह सहयोगियों के विरुद्ध प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत ₹3.87 करोड़ मूल्य की 11 अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से जब्त की हैं। जिन व्यक्तियों पर कार्रवाई हुई है उनमें संतोष कुमार सिंह, मृत्युंजय कुमार उर्फ सोनू सिंह, मनीष कुमार, बैजनाथ गंझू, राजेश कुमार गंझू और रवींद्र गंझू शामिल हैं। यह कार्रवाई नक्सल हिंसा और जबरन वसूली से जुड़े धन को अचल संपत्ति में बदलने के आरोपों पर आधारित है।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी की जांच झारखंड के लातेहार जिले के चंदवा पुलिस स्टेशन में दर्ज दो एफआईआर पर आधारित है, जिन्हें बाद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अपने हाथ में लेकर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) 1860, आर्म्स एक्ट और गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) 1967 के तहत जांच की।

पहली एफआईआर 22 नवंबर 2019 को लातेहार के एच-75, लुकुइया मोड़ पर हुए माओवादी हमले से संबंधित है, जिसमें झारखंड पुलिस के चार जवान शहीद हो गए थे और हथियार व गोला-बारूद लूट लिए गए थे। दूसरी एफआईआर जबरन वसूली के तौर पर ₹5 लाख नकद जब्त किए जाने से जुड़ी है — यह राशि संतोष कंस्ट्रक्शन के साझेदार मृत्युंजय कुमार उर्फ सोनू सिंह ने प्रतिबंधित नक्सली संगठन सीपीआई (माओवादी) के लातेहार रीजनल कमांडर रवींद्र गंझू को दी थी।

अपराध से कमाई और धन का प्रवाह

जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में कुल अनुमानित अवैध कमाई (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम — पीओसी) लगभग ₹7.16 करोड़ आँकी गई है। इसमें से ₹2.69 करोड़ एनआईए ने अपनी तलाशी कार्रवाई के दौरान नकद बरामद किए थे। शेष ₹4.46 करोड़ को वित्त वर्ष 2017-18 और 2018-19 के दौरान संतोष कंस्ट्रक्शन में पूंजी के रूप में लगाया और घुमाया गया।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब ईडी झारखंड में नक्सल-वित्त पोषण नेटवर्क के विरुद्ध अपनी जांच का दायरा लगातार बढ़ा रही है।

संपत्तियाँ कैसे खरीदी गईं

जांच में खुलासा हुआ कि बैंकिंग निगरानी से बचने के लिए कम कीमत वाले सेल डीड और बिना हिसाब-किताब वाले नकद भुगतान का सहारा लिया गया। इस तरीके से लातेहार जिले के मौजा चंदवा और मौजा कामता में 11 अचल संपत्तियाँ खरीदी गईं। ये संपत्तियाँ संतोष कंस्ट्रक्शन, संतोष कुमार सिंह, मृत्युंजय कुमार उर्फ सोनू सिंह और मनीष कुमार के नाम पर दर्ज हैं। इस प्रकार अपराध से अर्जित धन को औपचारिक अर्थव्यवस्था में खपाने का प्रयास किया गया।

ईडी की कार्रवाई और आगे की जांच

पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के अंतर्गत ईडी ने इन 11 संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है, जिनका कुल मूल्य लगभग ₹3.87 करोड़ है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में आगे की जांच जारी है और आने वाले समय में और कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने झारखंड में किसकी संपत्ति जब्त की और क्यों?
ईडी ने संतोष कंस्ट्रक्शन और उसके छह सहयोगियों — संतोष कुमार सिंह, मृत्युंजय कुमार उर्फ सोनू सिंह, मनीष कुमार, बैजनाथ गंझू, राजेश कुमार गंझू और रवींद्र गंझू — की ₹3.87 करोड़ मूल्य की 11 अचल संपत्तियाँ जब्त कीं। ये संपत्तियाँ नक्सल लेवी और माओवादी हमले से जुड़ी अवैध कमाई को छुपाने के लिए खरीदी गई थीं।
इस मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कुल कितनी अवैध कमाई का अनुमान है?
जांच एजेंसी के अनुसार इस मामले में कुल अनुमानित अवैध कमाई (पीओसी) लगभग ₹7.16 करोड़ है। इसमें से ₹2.69 करोड़ एनआईए ने नकद बरामद किए और शेष ₹4.46 करोड़ फर्म में पूंजी के रूप में लगाए गए।
लातेहार माओवादी हमले का इस मामले से क्या संबंध है?
22 नवंबर 2019 को लातेहार के लुकुइया मोड़ पर हुए माओवादी हमले में झारखंड पुलिस के चार जवान शहीद हुए थे और हथियार लूटे गए थे। इसी हमले से जुड़ी एफआईआर के आधार पर एनआईए ने जांच की, जो बाद में ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच का आधार बनी।
संपत्तियाँ कहाँ खरीदी गई थीं और कैसे छुपाई गईं?
11 अचल संपत्तियाँ लातेहार जिले के मौजा चंदवा और मौजा कामता में खरीदी गई थीं। बैंकिंग निगरानी से बचने के लिए कम कीमत वाले सेल डीड और बिना हिसाब-किताब वाले नकद भुगतान का इस्तेमाल किया गया।
क्या इस मामले में आगे और कार्रवाई होगी?
ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में जांच अभी जारी है। ₹7.16 करोड़ की कुल पीओसी के मुकाबले ₹3.87 करोड़ की जब्ती यह संकेत देती है कि आगे और संपत्तियों या व्यक्तियों पर कार्रवाई हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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