योगी का AI वीडियो विवाद: BJP सांसद जगदंबिका पाल बोले — 2027 में जनता देगी अखिलेश को जवाब
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने 1 सितंबर को लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक एआई-निर्मित वीडियो सार्वजनिक रूप से दिखाया, जिसमें कथित तौर पर योगी को चिलम पीते हुए दर्शाया गया था। इस कदम पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे राजनीतिक मर्यादा का उल्लंघन बताया है।
मुख्य घटनाक्रम
अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहले BJP समर्थकों द्वारा उन्हें 'अराजक' बताते हुए जारी किया गया एक एआई वीडियो दिखाया। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का वह एआई वीडियो भी प्रस्तुत किया जिसमें उन्हें चिलम पीते हुए दिखाया गया था। BJP नेताओं ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया और इसे निंदनीय करार दिया।
BJP नेताओं की प्रतिक्रिया
BJP सांसद जगदंबिका पाल ने कहा, 'अखिलेश यादव खुद मुख्यमंत्री रह चुके हैं। राजनीतिक विरोध हो सकता है, लेकिन अखिलेश यादव राजनीति का स्तर और गरिमा कितनी गिराएंगे? विरोध सरकार की नीतियों के खिलाफ हो सकता है, लेकिन यह कैसी मानसिकता है? योगी आदित्यनाथ गोरखपीठ के पीठाधीश्वर भी हैं। अगर अखिलेश यह नहीं समझते कि कोई संत या तपस्वी निस्वार्थ भाव से देश और राष्ट्र की सेवा करता है और लोगों की आस्था का केंद्र होता है, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। 2027 के चुनाव में देश की जनता इनको इसका जवाब देगी।'
BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, 'उत्तर प्रदेश की जनता इस बात को अच्छी तरीके से समझती है कि अखिलेश यादव और जितने भी विपक्षी दल हैं, वो पूर्ण रूप से बेरोजगार नेता हैं, जनता ने उनको बार-बार जनमत से रौंदा है और इस कारण से उनकी परेशानी, उनकी बौखलाहट उनके चेहरे पर दिखाई देती है। अपने राजनीतिक नैरेटिव को बनाने के लिए और उसको प्रासंगिक बनाए रखने के लिए अखिलेश यादव जैसे लोगों की मजबूरी है कि वे इस प्रकार के काम करें, जिसका जमीनी हकीकत से कोई ताल्लुक नहीं है।'
उपमुख्यमंत्री और मंत्री की आपत्ति
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि समाजवादी पार्टी पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है और उसकी कथनी और करनी में स्पष्ट अंतर है। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता सपा को कभी माफ नहीं करेगी और पार्टी का चाल-चरित्र अब जनता के सामने उजागर हो चुका है।
कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'प्रदेश के मुख्यमंत्री का इस तरीके का अमर्यादित पोस्ट बनाना बेहद निंदनीय है। यह भगवान राम की धरती है और यहाँ के मुख्यमंत्री के लिए ऐसी सोच रखना ही गलत है।'
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियाँ धीरे-धीरे तेज होने लगी हैं। गौरतलब है कि एआई-जनित राजनीतिक सामग्री का उपयोग भारतीय चुनावी परिदृश्य में एक नई और विवादास्पद प्रवृत्ति के रूप में उभरा है। दोनों पक्षों द्वारा एआई वीडियो का सार्वजनिक प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि डिजिटल प्रचार अब सीधे प्रेस कॉन्फ्रेंस का हिस्सा बन चुका है।
आगे क्या
BJP नेताओं के तीखे बयानों के बाद यह देखना होगा कि सपा इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है। 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए दोनों दलों के बीच यह टकराव आने वाले महीनों में और तीखा हो सकता है।