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अंबाला मंडल के 811 किमी ब्रॉड गेज ट्रैक पर 'कवच' प्रणाली को मंजूरी, ₹201 करोड़ होंगे खर्च

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अंबाला मंडल के 811 किमी ब्रॉड गेज ट्रैक पर 'कवच' प्रणाली को मंजूरी, ₹201 करोड़ होंगे खर्च

सारांश

भारतीय रेलवे ने अंबाला मंडल के 811 किमी ब्रॉड गेज ट्रैक पर ₹201 करोड़ की लागत से 'कवच' प्रणाली लगाने की मंजूरी दी है। हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश को जोड़ने वाले इन व्यस्त मार्गों पर यह स्वदेशी ATP प्रणाली टकराव और दुर्घटनाओं का जोखिम काफी हद तक कम करेगी।

मुख्य बातें

भारतीय रेलवे ने अंबाला मंडल के 811 किलोमीटर ब्रॉड गेज सेक्शन पर 'कवच' प्रणाली लगाने को मंजूरी दी।
परियोजना की लागत ₹201 करोड़ ; कार्य एलटीई आधारित संचार बैकबोन के साथ होगा।
कवर किए जाने वाले प्रमुख मार्ग: अंबाला कैंट–लुधियाना , राजपुरा–बठिंडा–श्रीगंगानगर , कालका–चंडीगढ़–साहनेवाल सहित अन्य।
रेलवे ने कुल ₹1,364.45 करोड़ की सुरक्षा, सिग्नलिंग और संचार परियोजनाओं को स्वीकृति दी है।
उत्तरी रेलवे को ₹871 करोड़ का उप-प्रावधान; अंबाला, दिल्ली और लखनऊ मंडलों में कुल 3,204 रूट किलोमीटर में ऑप्टिकल फाइबर बिछेगा।
यह सभी कार्य ₹4,871 करोड़ के व्यापक राष्ट्रीय रेलवे सुरक्षा कार्यक्रम का हिस्सा हैं।

भारतीय रेलवे ने रेल सुरक्षा की दिशा में निर्णायक कदम उठाते हुए उत्तरी रेलवे के अंबाला मंडल के शेष 811 किलोमीटर ब्रॉड गेज सेक्शन पर स्वदेशी 'कवच' ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रणाली लगाने की स्वीकृति दे दी है। इस परियोजना पर ₹201 करोड़ का निवेश किया जाएगा और यह कार्य एलटीई आधारित संचार बैकबोन के साथ संपन्न होगा।

किन रेल मार्गों पर लगेगी 'कवच' प्रणाली

यह परियोजना अंबाला मंडल के कई रणनीतिक रेल खंडों को कवर करेगी। इनमें अंबाला कैंट–लुधियाना, कालका–चंडीगढ़–न्यू मोरिंडा–साहनेवाल, सरहिंद–दौलतपुर चौक, राजपुरा–बठिंडा–श्रीगंगानगर और लुधियाना–धुरी–जाखल सेक्शन शामिल हैं।

ये मार्ग हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश को जोड़ने वाले प्रमुख रेल कॉरिडोर हैं, जिन पर यात्री और माल यातायात का अत्यधिक दबाव रहता है।

'कवच' प्रणाली कैसे काम करती है

'कवच' एक स्वदेशी रूप से विकसित ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) प्रणाली है, जो रेल संचालन में सुरक्षा की अतिरिक्त परत जोड़ती है। यह प्रणाली सिग्नल के खतरे की स्थिति में ट्रेन को आगे बढ़ने से रोकती है, आवश्यकता पड़ने पर स्वतः ब्रेक लगाती है, गति नियंत्रण सुनिश्चित करती है और टकराव एवं दुर्घटनाओं की आशंका को उल्लेखनीय रूप से कम करती है।

गौरतलब है कि भारतीय रेलवे इस प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से उच्च घनत्व और रणनीतिक रूप से संवेदनशील मार्गों पर स्थापित कर रहा है।

व्यापक रेलवे सुरक्षा कार्यक्रम का हिस्सा

रेलवे ने कुल ₹1,364.45 करोड़ की अनेक परियोजनाओं को स्वीकृति दी है, जिनका उद्देश्य सुरक्षा, सिग्नलिंग और संचार ढाँचे को सुदृढ़ करना है। इनमें लोकोमोटिव में कवच की स्थापना, ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का विस्तार और विभिन्न जोनों में पैनल इंटरलॉकिंग को इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में रूपांतरित करना शामिल है।

इससे पूर्व उत्तरी रेलवे में संचार अवसंरचना को मज़बूत करने के लिए ₹400.86 करोड़ की तीन अलग परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। ये सभी कार्य ₹4,871 करोड़ की लागत वाले एक व्यापक राष्ट्रीय कार्यक्रम के अंतर्गत आते हैं।

ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का विस्तार

उत्तरी रेलवे को ₹871 करोड़ का उप-प्रावधान भी दिया गया है। इसके तहत अंबाला मंडल में 926.05 रूट किलोमीटर में फाइबर केबल बिछाई जाएगी। दिल्ली मंडल में 1,204 रूट किलोमीटर तक ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क और स्टेशनों पर ओएफसी रूम स्थापित किए जाएंगे, जबकि लखनऊ मंडल में 1,074 रूट किलोमीटर में यह कार्य संपन्न होगा।

यह संचार नेटवर्क आधुनिक सिग्नलिंग और 'कवच' प्रणाली की निर्बाध कार्यप्रणाली के लिए अनिवार्य आधारभूत ढाँचा है। आने वाले महीनों में इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन की गति से ही स्पष्ट होगा कि भारतीय रेलवे की सुरक्षा-क्रांति कितनी तेज़ी से ज़मीन पर उतरती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन की गति का है — भारतीय रेलवे के विशाल नेटवर्क के मुकाबले अब तक कवच की तैनाती की रफ्तार धीमी रही है। ₹4,871 करोड़ के व्यापक कार्यक्रम के बावजूद, उच्च-घनत्व मार्गों पर सुरक्षा खामियाँ तब तक बनी रहेंगी जब तक समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित नहीं होता। यह ऐसे समय में आया है जब हाल के वर्षों में कई गंभीर रेल दुर्घटनाओं ने ATP प्रणालियों की तात्कालिकता को रेखांकित किया है। संचार बैकबोन और फाइबर नेटवर्क के साथ एकीकृत यह दृष्टिकोण सही दिशा में है, परंतु घोषणाओं से ज़मीनी सुरक्षा तक की यात्रा पर कड़ी निगरानी ज़रूरी है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंबाला मंडल में 'कवच' प्रणाली क्या है और यह कैसे काम करती है?
'कवच' एक स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) प्रणाली है जो खतरे की स्थिति में ट्रेन को स्वतः रोकती है, गति नियंत्रित करती है और टकराव की आशंका को काफी हद तक कम करती है। अंबाला मंडल के 811 किमी ब्रॉड गेज सेक्शन पर इसे ₹201 करोड़ की लागत से लगाया जाएगा।
अंबाला मंडल में 'कवच' किन रेल मार्गों पर लगाई जाएगी?
अंबाला कैंट–लुधियाना, कालका–चंडीगढ़–न्यू मोरिंडा–साहनेवाल, सरहिंद–दौलतपुर चौक, राजपुरा–बठिंडा–श्रीगंगानगर और लुधियाना–धुरी–जाखल सेक्शन पर यह प्रणाली स्थापित होगी। ये सभी मार्ग हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश को जोड़ते हैं।
भारतीय रेलवे की कुल कितनी सुरक्षा परियोजनाओं को मंजूरी मिली है?
रेलवे ने कुल ₹1,364.45 करोड़ की सुरक्षा, सिग्नलिंग और संचार परियोजनाओं को स्वीकृति दी है। ये सभी कार्य ₹4,871 करोड़ के एक व्यापक राष्ट्रीय कार्यक्रम के अंतर्गत आते हैं।
उत्तरी रेलवे में ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का विस्तार कहाँ-कहाँ होगा?
उत्तरी रेलवे को ₹871 करोड़ के उप-प्रावधान के तहत अंबाला मंडल में 926.05 रूट किमी, दिल्ली मंडल में 1,204 रूट किमी और लखनऊ मंडल में 1,074 रूट किमी में ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जाएगी। यह नेटवर्क 'कवच' और आधुनिक सिग्नलिंग के लिए आवश्यक संचार आधार तैयार करेगा।
'कवच' प्रणाली से आम यात्रियों को क्या फायदा होगा?
'कवच' लगने से हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के इन व्यस्त रेल कॉरिडोर पर यात्रा अधिक सुरक्षित होगी, क्योंकि यह प्रणाली सिग्नल उल्लंघन और ट्रेन टकराव जैसी दुर्घटनाओं को स्वतः रोकने में सक्षम है। इससे इन मार्गों पर भारी यात्री और माल यातायात की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।
राष्ट्र प्रेस
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