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नांदेड़ डिवीजन में ₹163 करोड़ की इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन अपग्रेड को मंजूरी, परभणी-मुदखेड़ सेक्शन होगा आधुनिक

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नांदेड़ डिवीजन में ₹163 करोड़ की इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन अपग्रेड को मंजूरी, परभणी-मुदखेड़ सेक्शन होगा आधुनिक

सारांश

भारतीय रेलवे ने नांदेड़ डिवीजन के परभणी-मुदखेड़ सेक्शन में ₹163 करोड़ की 2×25 केवी ट्रैक्शन अपग्रेड को मंजूरी दी है। यह HUN रूट-9 का हिस्सा है और 2029-30 तक 3,000 मिलियन टन माल ढुलाई के लक्ष्य को बल देगा।

मुख्य बातें

भारतीय रेलवे ने 28 जुलाई 2026 को ₹163 करोड़ की इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन अपग्रेड परियोजना को मंजूरी दी।
परभणी-मुदखेड़ सेक्शन के 164 ट्रैक किलोमीटर पर 1×25 केवी से 2×25 केवी प्रणाली में बदलाव होगा।
यह सेक्शन HUN रूट-9 का हिस्सा है, जो अजमेर से धोन तक कई प्रमुख शहरों को जोड़ता है।
अपग्रेड से वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी तेज़ ट्रेनों का संचालन बेहतर होगा और माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी।
भारत का ब्रॉड गेज नेटवर्क 99.6% विद्युतीकृत; 2014-2026 के बीच 48,072 रूट किमी का विद्युतीकरण हुआ।

भारतीय रेलवे ने 28 जुलाई 2026 को दक्षिण मध्य रेलवे के नांदेड़ डिवीजन के परभणी-मुदखेड़ डबल लाइन सेक्शन में इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम के आधुनिकीकरण को औपचारिक मंजूरी दे दी है। ₹163 करोड़ की इस परियोजना के तहत 164 ट्रैक किलोमीटर के दायरे में मौजूदा 1×25 केवी प्रणाली को उन्नत 2×25 केवी ट्रैक्शन सिस्टम में बदला जाएगा। रेल मंत्रालय ने मंगलवार को जारी आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी।

परियोजना में क्या बदलेगा

नई 2×25 केवी प्रणाली मौजूदा 1×25 केवी व्यवस्था की तुलना में कहीं अधिक विद्युत क्षमता प्रदान करती है। इसके साथ-साथ बढ़ते विद्युत भार को संभालने के लिए पावर सप्लाई से जुड़े बुनियादी ढाँचे को भी पूरी तरह आधुनिक बनाया जाएगा। यह तकनीकी उन्नयन ट्रेन संचालन के लिए बिजली आपूर्ति को अधिक स्थिर और भरोसेमंद बनाएगा।

रणनीतिक महत्व

परभणी-मुदखेड़ रेलखंड देश के हाईली यूटिलाइज्ड नेटवर्क (HUN) रूट-9 का अभिन्न हिस्सा है। यह मार्ग अजमेर, इंदौर, खंडवा, अकोला, पूर्णा, मुदखेड़, सिकंदराबाद, महबूबनगर और धोन को आपस में जोड़ता है। यह रूट यात्री और मालगाड़ी — दोनों श्रेणियों के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

परिचालन और माल ढुलाई पर असर

रेल मंत्रालय के अनुसार, उन्नत ट्रैक्शन प्रणाली से इस सेक्शन पर फ्रेट (माल ढुलाई) क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इसके अलावा वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी अर्ध-तीव्र गति वाली ट्रेनों का संचालन भी अधिक सुगम होगा। यह परियोजना भारतीय रेलवे के 2029-30 तक 3,000 मिलियन टन माल ढुलाई के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक ठोस कदम है।

भारत का विद्युतीकरण में वैश्विक स्थान

इस महीने की शुरुआत में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में बताया था कि भारत अब दुनिया का सबसे बड़ा विद्युतीकृत रेलवे नेटवर्क वाला देश बन चुका है। देश के ब्रॉड गेज नेटवर्क का 99.6 प्रतिशत हिस्सा विद्युतीकृत हो चुका है — इस मामले में भारत केवल स्विट्जरलैंड (100%) से पीछे है, जिसका रेल नेटवर्क भारत की तुलना में काफी छोटा है।

वैष्णव ने यह भी बताया कि भारत इस मामले में चीन (82%), स्पेन (67%), जापान (64%), फ्रांस (60%) और यूनाइटेड किंगडम (39%) से काफी आगे निकल चुका है। गौरतलब है कि 2014 से 2026 के बीच 48,072 रूट किलोमीटर रेल मार्ग का विद्युतीकरण किया गया, जबकि इससे पहले के लगभग 60 वर्षों में केवल 21,801 रूट किलोमीटर का विद्युतीकरण हो पाया था।

व्यापक आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह परियोजना देश के व्यस्त रेल मार्गों पर विद्युत बुनियादी ढाँचे को आधुनिक बनाने और परिचालन दक्षता बढ़ाने की भारतीय रेलवे की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। आने वाले वर्षों में ऐसे और सेक्शनों पर इसी तर्ज पर काम किए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन की गति का है — भारतीय रेलवे की कई बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ स्वीकृति के बाद वर्षों तक लटकी रहती हैं। HUN रूट-9 पर यात्री और मालगाड़ियों का दबाव लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में यह अपग्रेड देर से आया है। 2029-30 का 3,000 मिलियन टन माल ढुलाई का लक्ष्य तभी हासिल होगा जब ऐसी परियोजनाएँ समयसीमा में पूरी हों — जो अभी तक रेलवे की कमज़ोर कड़ी रही है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नांदेड़ डिवीजन में ₹163 करोड़ की इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन परियोजना क्या है?
यह परियोजना दक्षिण मध्य रेलवे के नांदेड़ डिवीजन के परभणी-मुदखेड़ डबल लाइन सेक्शन पर 164 ट्रैक किलोमीटर में मौजूदा 1×25 केवी ट्रैक्शन सिस्टम को 2×25 केवी प्रणाली में बदलने की योजना है। इसे 28 जुलाई 2026 को रेल मंत्रालय ने मंजूरी दी।
2×25 केवी ट्रैक्शन सिस्टम 1×25 केवी से बेहतर क्यों है?
2×25 केवी प्रणाली अधिक विद्युत क्षमता और स्थिर बिजली आपूर्ति प्रदान करती है, जिससे भारी मालगाड़ियाँ और वंदे भारत जैसी तेज़ ट्रेनें अधिक दक्षता से चल सकती हैं। यह प्रणाली विद्युत हानि को भी कम करती है।
परभणी-मुदखेड़ सेक्शन रणनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?
यह सेक्शन HUN रूट-9 का हिस्सा है, जो अजमेर, इंदौर, खंडवा, अकोला, पूर्णा, मुदखेड़, सिकंदराबाद, महबूबनगर और धोन जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ता है। यह मार्ग यात्री और माल — दोनों यातायात के लिए अत्यंत व्यस्त है।
इस अपग्रेड से माल ढुलाई पर क्या असर पड़ेगा?
उन्नत ट्रैक्शन प्रणाली से इस सेक्शन पर माल ढुलाई (फ्रेट) क्षमता बढ़ेगी, जो भारतीय रेलवे के 2029-30 तक 3,000 मिलियन टन माल ढुलाई के लक्ष्य में सहायक होगी। अधिक शक्तिशाली बिजली आपूर्ति भारी मालगाड़ियों के संचालन को सुगम बनाएगी।
भारत के रेलवे विद्युतीकरण की वैश्विक स्थिति क्या है?
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार भारत का ब्रॉड गेज नेटवर्क 99.6% विद्युतीकृत हो चुका है और वह दुनिया का सबसे बड़ा विद्युतीकृत रेलवे नेटवर्क वाला देश है। भारत इस मामले में चीन (82%), स्पेन (67%), जापान (64%), फ्रांस (60%) और यूके (39%) से आगे है।
राष्ट्र प्रेस
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