दुर्ग-तरोकी रेल सेक्शन पर ₹226 करोड़ की सिग्नलिंग क्रांति, 13 स्टेशनों पर लगेगी इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रेलवे ने 1 जुलाई 2026 को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के रायपुर डिवीजन के अंतर्गत दुर्ग-तरोकी सेक्शन पर सिग्नलिंग ढाँचे के आधुनिकीकरण के लिए ₹226 करोड़ की परियोजना को मंज़ूरी दे दी। रेल मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, इस परियोजना के तहत सेक्शन के 13 स्टेशनों पर पुरानी पैनल इंटरलॉकिंग (PI) प्रणाली को हटाकर अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (EI) प्रणाली स्थापित की जाएगी।
मुख्य घटनाक्रम
रेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह परियोजना देशभर में रेलवे सिग्नलिंग को आधुनिक तकनीक से लैस करने के व्यापक राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा है। दुर्ग-तरोकी यह रेलखंड छत्तीसगढ़ में यात्री और माल परिवहन दोनों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है, और इस सेक्शन पर यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
परियोजना में जिन 13 स्टेशनों को शामिल किया गया है, वे हैं — मरौदा, रिसामा, गुंडरदेही, लाटाबोड़, बालोद, कुसुमकसा, दल्ली राजहरा, गुदुम, भानुप्रतापपुर, केवटी, अंतागढ़, तरोकी और रायपुर स्टोर डिपो।
इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग क्यों है ज़रूरी
इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग एक उन्नत सिग्नलिंग तकनीक है जो ट्रेनों के मार्ग निर्धारण (रूट सेटिंग) और सिग्नल संचालन को स्वचालित रूप से नियंत्रित करती है। इसमें कई अतिरिक्त सुरक्षा परतें होती हैं जो मानवीय त्रुटि की संभावना को न्यूनतम करती हैं।
पारंपरिक पैनल इंटरलॉकिंग की तुलना में यह प्रणाली अधिक विश्वसनीय, लचीली और तकनीकी रूप से सक्षम मानी जाती है। किसी भी तकनीकी व्यवधान की स्थिति में सेवाएँ तेज़ी से बहाल करने में भी EI प्रणाली अधिक प्रभावी होती है।
आम यात्रियों और माल परिवहन पर असर
रेल मंत्रालय के अनुसार, नई प्रणाली लागू होने के बाद इस रेलखंड पर सिग्नलिंग संबंधी तकनीकी खराबियाँ उल्लेखनीय रूप से घटेंगी। इससे ट्रेनों की समयपालन (पंक्चुअलिटी) में सुधार होगा और यात्री एवं माल यातायात की बढ़ती माँग को अधिक कुशलता से पूरा किया जा सकेगा।
गौरतलब है कि दल्ली राजहरा और भानुप्रतापपुर जैसे स्टेशन खनिज और औद्योगिक माल ढुलाई के लिहाज़ से भी महत्वपूर्ण हैं। इन स्टेशनों पर सिग्नलिंग आधुनिकीकरण से माल गाड़ियों की आवाजाही भी सुगम होगी।
राष्ट्रीय रेलवे आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा
यह परियोजना ऐसे समय में आई है जब भारतीय रेलवे पूरे नेटवर्क पर सिग्नलिंग प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से उन्नत कर रहा है। कवच (KAVACH) स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली के समानांतर, EI जैसी परियोजनाएँ नेटवर्क की मूलभूत सुरक्षा परत को मज़बूत करती हैं।
रेल मंत्रालय का कहना है कि परिचालन में लचीलापन और प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ाना इस अभियान के दो प्रमुख उद्देश्य हैं। आने वाले वर्षों में SECR नेटवर्क पर यातायात और बढ़ने का अनुमान है, जिसे देखते हुए यह निवेश दीर्घकालिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।