24 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ईस्ट कोस्ट रेलवे के 631 रूट किलोमीटर पर 'कवच' सिस्टम को मंजूरी, ₹270 करोड़ होंगे खर्च

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ईस्ट कोस्ट रेलवे के 631 रूट किलोमीटर पर 'कवच' सिस्टम को मंजूरी, ₹270 करोड़ होंगे खर्च

सारांश

रेल मंत्रालय ने ईस्ट कोस्ट रेलवे के 631 रूट किलोमीटर पर ₹270 करोड़ की लागत से स्वदेशी 'कवच' ATP प्रणाली लगाने की मंजूरी दी। छह अहम रेल सेक्शन इस सुरक्षा कवच में आएंगे — यह भारतीय रेलवे के राष्ट्रव्यापी आधुनिकीकरण अभियान का ताज़ा कदम है।

मुख्य बातें

रेल मंत्रालय ने 22 जून 2026 को ईस्ट कोस्ट रेलवे के 631 रूट किलोमीटर पर 'कवच' प्रणाली लगाने की मंजूरी दी।
परियोजना की अनुमानित लागत ₹270 करोड़ है।
छह सेक्शन शामिल: बाघुआपाल-बुढ़ापंक , हरिदासपुर-पारादीप , खुर्दा रोड-बलांगीर , नौपाड़ा-गुनुपुर , लांजीगढ़ रोड-जूनागढ़ , बोब्बिली-सलूर ।
'कवच' स्वदेशी ATP प्रणाली है जो सिग्नल उल्लंघन, अत्यधिक गति और टक्कर रोकने में सक्षम है।
इसी माह पूर्वी रेलवे के 32 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग के लिए ₹405 करोड़ भी स्वीकृत किए गए।

रेल मंत्रालय ने 22 जून 2026 को घोषणा की कि केंद्र सरकार ने ईस्ट कोस्ट रेलवे नेटवर्क के 631 रूट किलोमीटर (आरकेएम) मार्ग पर स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रणाली 'कवच' की तैनाती को स्वीकृति दे दी है। इस परियोजना पर ₹270 करोड़ की लागत आने का अनुमान है और यह भारतीय रेलवे के राष्ट्रव्यापी सुरक्षा आधुनिकीकरण अभियान का अहम हिस्सा है।

कौन-से रेल सेक्शन होंगे शामिल

स्वीकृत परियोजना ईस्ट कोस्ट रेलवे के छह महत्वपूर्ण रेल सेक्शन्स को कवर करेगी। इनमें बाघुआपाल-बुढ़ापंक, हरिदासपुर-पारादीप, खुर्दा रोड-बलांगीर, नौपाड़ा-गुनुपुर, लांजीगढ़ रोड-जूनागढ़ और बोब्बिली-सलूर रेल सेक्शन शामिल हैं। ये सभी मार्ग ओडिशा और आसपास के क्षेत्रों में यात्री एवं मालगाड़ी यातायात की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

'कवच' प्रणाली क्या है और कैसे काम करती है

'कवच' भारत में स्वदेशी रूप से विकसित ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) प्रणाली है, जिसे सिग्नल उल्लंघन (SPAD), अत्यधिक गति और ट्रेनों के आमने-सामने टकराव जैसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए तैयार किया गया है। यह प्रणाली LTE-आधारित संचार नेटवर्क के ज़रिए ट्रेनों की गतिविधियों पर निरंतर निगरानी रखती है और खतरे की स्थिति में स्वतः ब्रेक लगा देती है।

रेल मंत्रालय के अनुसार, 'कवच' घने कोहरे जैसी प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों में भी ट्रेनों के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करने में सक्षम है — जो उत्तर और पूर्वी भारत के रेल नेटवर्क के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है।

परियोजना का व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि यह स्वीकृति भारतीय रेलवे के उस बृहद कार्यक्रम का हिस्सा है जिसके तहत पूरे रेल नेटवर्क पर 'कवच' को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। यह ऐसे समय में आई है जब रेल दुर्घटनाओं को लेकर जनता और संसद दोनों स्तरों पर सुरक्षा सुधार की माँग तेज़ हो रही है।

इसी महीने की शुरुआत में सरकार ने पूर्वी रेलवे के हाई डेंसिटी नेटवर्क (HDN) और हाईली यूटिलाइज्ड नेटवर्क (HUN) मार्गों पर स्थित 32 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (EI) प्रणाली लगाने के लिए ₹405 करोड़ की मंजूरी दी थी। दोनों स्वीकृतियाँ मिलकर यह संकेत देती हैं कि केंद्र सिग्नलिंग और सुरक्षा अवसंरचना में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है।

यात्रियों और परिचालन पर असर

रेल अधिकारियों के अनुसार, इन छह सेक्शन्स पर 'कवच' लागू होने से ओडिशा और ईस्ट कोस्ट रेलवे के अधीन आने वाले क्षेत्रों में यात्री एवं मालगाड़ी दोनों सेवाओं को सीधा लाभ मिलेगा। प्रणाली के सक्रिय होने से न केवल टक्कर-रोधी सुरक्षा मिलेगी, बल्कि ट्रेनों की समयपालन क्षमता और परिचालन दक्षता में भी सुधार अपेक्षित है।

आने वाले महीनों में परियोजना के क्रियान्वयन की समयसीमा और निविदा प्रक्रिया पर रेल मंत्रालय की ओर से विस्तृत दिशानिर्देश जारी होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन की गति का है — अब तक देश के विशाल रेल नेटवर्क के मुकाबले 'कवच' की कवरेज सीमित रही है। ओडिशा के बालासोर जैसी दुर्घटनाओं के बाद सुरक्षा प्रणालियों में निवेश की राजनीतिक इच्छाशक्ति तो दिखती है, पर ₹270 करोड़ की यह परियोजना उस विशाल अंतर को पाटने में महज़ एक छोटा कदम है। रेलवे के लिए ज़रूरी है कि 'कवच' की तैनाती की समयसीमा और गुणवत्ता जाँच के लिए स्वतंत्र ऑडिट तंत्र स्थापित हो, ताकि बजट आवंटन केवल घोषणाओं तक न सिमटे।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईस्ट कोस्ट रेलवे पर 'कवच' परियोजना क्या है?
यह रेल मंत्रालय द्वारा 22 जून 2026 को स्वीकृत ₹270 करोड़ की परियोजना है, जिसके तहत ईस्ट कोस्ट रेलवे के 631 रूट किलोमीटर पर स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रणाली 'कवच' लगाई जाएगी। इसमें ओडिशा और आसपास के क्षेत्रों के छह प्रमुख रेल सेक्शन शामिल हैं।
'कवच' प्रणाली कैसे काम करती है?
'कवच' एक स्वदेशी ATP प्रणाली है जो LTE-आधारित संचार के ज़रिए ट्रेनों की गतिविधियों पर निरंतर नज़र रखती है और खतरे की स्थिति में स्वतः ब्रेक लगा देती है। यह सिग्नल उल्लंघन, अत्यधिक गति और ट्रेनों की आमने-सामने टक्कर जैसी दुर्घटनाओं को रोकने में सक्षम है।
इस परियोजना से कौन-से रेल सेक्शन प्रभावित होंगे?
परियोजना में बाघुआपाल-बुढ़ापंक, हरिदासपुर-पारादीप, खुर्दा रोड-बलांगीर, नौपाड़ा-गुनुपुर, लांजीगढ़ रोड-जूनागढ़ और बोब्बिली-सलूर — कुल छह रेल सेक्शन शामिल हैं। ये सभी ईस्ट कोस्ट रेलवे के अंतर्गत ओडिशा और आसपास के राज्यों में स्थित हैं।
क्या इसी तरह की कोई और रेलवे सुरक्षा परियोजना हाल ही में मंजूर हुई है?
हाँ, जून 2026 की शुरुआत में सरकार ने पूर्वी रेलवे के HDN और HUN मार्गों पर 32 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (EI) प्रणाली के लिए ₹405 करोड़ की मंजूरी दी थी। दोनों परियोजनाएँ भारतीय रेलवे के व्यापक सिग्नलिंग और सुरक्षा आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा हैं।
'कवच' से यात्रियों को क्या फायदा होगा?
रेल अधिकारियों के अनुसार, इन सेक्शन्स पर 'कवच' लागू होने से यात्री और मालगाड़ी दोनों सेवाओं को टक्कर-रोधी सुरक्षा मिलेगी। इसके अलावा घने कोहरे जैसी प्रतिकूल मौसम स्थितियों में भी ट्रेनों का सुरक्षित संचालन सुनिश्चित होगा और समयपालन में सुधार अपेक्षित है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 दिन पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले