10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ईसीओआर नेटवर्क के 631 किमी पर ₹270 करोड़ से 'कवच' की मंजूरी, ओडिशा CM माझी ने किया स्वागत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ईसीओआर नेटवर्क के 631 किमी पर ₹270 करोड़ से 'कवच' की मंजूरी, ओडिशा CM माझी ने किया स्वागत

सारांश

ईस्ट कोस्ट रेलवे के 631 किमी पर ₹270 करोड़ की लागत से 'कवच' ATP सिस्टम लगाने की मंजूरी मिली है। ओडिशा CM माझी ने इसे रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ऐतिहासिक कदम बताया। छह प्रमुख सेक्शन कवर होंगे — जिससे यात्री और मालगाड़ी दोनों को सुरक्षा और विश्वसनीयता का लाभ मिलेगा।

मुख्य बातें

भारतीय रेलवे ने ईस्ट कोस्ट रेलवे (ईसीओआर) के 631 रूट किलोमीटर पर ₹270 करोड़ की लागत से 'कवच' सिस्टम लगाने की मंजूरी दी।
परियोजना में छह रेलवे सेक्शन शामिल हैं — बागुआपाल-बुधापंक, हरिदासपुर-पारादीप, खुर्दा रोड-बलंगीर, नौपाडा-गुनुपुर, लांजीगढ़ रोड-जूनागढ़ और बोब्बिली-सालुर।
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 23 जून 2026 को एक्स पर इस मंजूरी का स्वागत किया और इसे रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बड़ी उपलब्धि बताया।
'कवच' एक स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) सिस्टम है, जो SPAD, ओवर-स्पीडिंग और टक्कर जैसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
यह परियोजना एलटीई-आधारित कम्युनिकेशन बैकबोन के साथ पूरे भारतीय रेल नेटवर्क पर 'कवच' विस्तार के राष्ट्रीय मिशन का हिस्सा है।

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मंगलवार, 23 जून 2026 को ईस्ट कोस्ट रेलवे (ईसीओआर) नेटवर्क के 631 रूट किलोमीटर पर ₹270 करोड़ की लागत से स्वदेशी 'कवच' ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम लगाने की केंद्र सरकार की मंजूरी का स्वागत किया। उन्होंने इसे ओडिशा के रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक निर्णायक उपलब्धि करार दिया।

मुख्यमंत्री माझी की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री माझी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'ईस्ट कोस्ट रेलवे के 631 रूट किमी पर कवच लगाने की मंजूरी हमारे रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।' उन्होंने कहा कि यह आधुनिक, स्वदेशी तकनीक कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी, आर्थिक विकास में सहयोग देगी और ओडिशा के नागरिकों के लिए एक सुरक्षित तथा अधिक कुशल रेलवे प्रणाली बनाने में योगदान देगी।

माझी ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को रेल सुरक्षा को प्राथमिकता देने और भारत के रेलवे नेटवर्क को आधुनिक बनाने की प्रतिबद्धता के लिए धन्यवाद दिया।

परियोजना का दायरा और शामिल सेक्शन

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस परियोजना के तहत ईस्ट कोस्ट रेलवे के छह प्रमुख रेलवे सेक्शन को कवर किया जाएगा — बागुआपाल-बुधापंक, हरिदासपुर-पारादीप, खुर्दा रोड (केयूआर)-बलंगीर, नौपाडा-गुनुपुर, लांजीगढ़ रोड-जूनागढ़ और बोब्बिली-सालुर। ये सभी रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण तथा अधिक यातायात वाले मार्ग हैं।

यह परियोजना भारतीय रेलवे के उस व्यापक राष्ट्रीय कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत पूरे रेल नेटवर्क पर एलटीई-आधारित कम्युनिकेशन बैकबोन के साथ 'कवच' का विस्तार किया जा रहा है।

क्या है 'कवच' सिस्टम

'कवच' भारत का स्वदेशी रूप से विकसित ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) सिस्टम है, जिसे सिग्नल पासिंग एट डेंजर (SPAD), ओवर-स्पीडिंग और ट्रेनों की आमने-सामने टक्कर जैसी दुर्घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से डिज़ाइन किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, 'यह सिस्टम लगातार ट्रेन की आवाजाही पर नज़र रखता है और आवश्यकता पड़ने पर स्वचालित रूप से ब्रेक लगाता है, जिससे परिचालन सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार होता है।'

गौरतलब है कि 'कवच' घने कोहरे जैसी प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों में भी ट्रेनों की सुरक्षित और भरोसेमंद आवाजाही सुनिश्चित करता है, जिससे सेवा की विश्वसनीयता और समय-पालन में सुधार होता है।

ओडिशा और क्षेत्र पर असर

इस परियोजना से ओडिशा और आसपास के क्षेत्रों में ईस्ट कोस्ट रेलवे के माध्यम से संचालित यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों दोनों को लाभ मिलने की उम्मीद है। यात्रियों को बेहतर सुरक्षा, दुर्घटनाओं का कम जोखिम, उन्नत ट्रेन संचालन और अधिक विश्वसनीय रेल सेवाएँ मिलेंगी। यह कदम ओडिशा में रेल सुरक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है — यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में पिछले कुछ वर्षों में बड़े रेल हादसों की स्मृति अभी भी ताज़ा है। आने वाले समय में 'कवच' की व्यापक तैनाती से भारतीय रेलवे के सुरक्षा मानकों को वैश्विक स्तर पर लाने की दिशा में ठोस प्रगति होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे उस व्यापक संदर्भ में देखना ज़रूरी है जिसमें जून 2023 का बालासोर ट्रेन हादसा — जिसमें 290 से अधिक लोगों की जान गई — ओडिशा की धरती पर हुआ था, और उस समय 'कवच' की अनुपस्थिति पर गंभीर सवाल उठे थे। 631 किमी की यह तैनाती निश्चित रूप से एक कदम आगे है, परंतु ईसीओआर का कुल नेटवर्क इससे कहीं अधिक विस्तृत है — यानी बड़े हिस्से पर अभी भी सुरक्षा कवच का इंतज़ार है। असली कसौटी यह होगी कि यह परियोजना तय समयसीमा में पूरी होती है या नहीं, और क्या इसका सत्यापन-योग्य सुरक्षा डेटा सार्वजनिक किया जाएगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईसीओआर नेटवर्क पर 'कवच' सिस्टम लगाने की मंजूरी क्या है?
भारतीय रेलवे ने ईस्ट कोस्ट रेलवे (ईसीओआर) के 631 रूट किलोमीटर पर ₹270 करोड़ की लागत से स्वदेशी 'कवच' ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम लगाने की मंजूरी दी है। इस परियोजना में ओडिशा और आसपास के क्षेत्रों में फैले छह प्रमुख रेलवे सेक्शन शामिल हैं।
'कवच' सिस्टम क्या है और यह कैसे काम करता है?
'कवच' भारत का स्वदेशी रूप से विकसित ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) सिस्टम है, जो सिग्नल उल्लंघन, ओवर-स्पीडिंग और ट्रेनों की आमने-सामने टक्कर को रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह लगातार ट्रेन की गति और स्थिति पर नज़र रखता है और खतरे की स्थिति में स्वचालित रूप से ब्रेक लगाता है।
इस परियोजना में कौन-से रेलवे सेक्शन शामिल हैं?
परियोजना में ईस्ट कोस्ट रेलवे के छह सेक्शन शामिल हैं — बागुआपाल-बुधापंक, हरिदासपुर-पारादीप, खुर्दा रोड (केयूआर)-बलंगीर, नौपाडा-गुनुपुर, लांजीगढ़ रोड-जूनागढ़ और बोब्बिली-सालुर। ये सभी रणनीतिक और अधिक यातायात वाले मार्ग हैं।
ओडिशा को इस परियोजना से क्या फायदा होगा?
इस परियोजना से ओडिशा में यात्रियों को बेहतर सुरक्षा, दुर्घटनाओं का कम जोखिम और अधिक विश्वसनीय ट्रेन सेवाएँ मिलेंगी। घने कोहरे जैसी प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों में भी ट्रेनों का सुरक्षित संचालन सुनिश्चित होगा और मालगाड़ियों की आवाजाही भी अधिक कुशल बनेगी।
ओडिशा CM माझी ने इस मंजूरी पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 23 जून 2026 को एक्स पर पोस्ट कर इस मंजूरी को रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को रेल सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए धन्यवाद दिया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले