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ओडिशा CM माझी की 'गो ईस्ट' पहल: पूर्वी भारत के निवेशकों को ओडिशा में बुलावा, बनेगा हाई-लेवल टास्क फोर्स

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ओडिशा CM माझी की 'गो ईस्ट' पहल: पूर्वी भारत के निवेशकों को ओडिशा में बुलावा, बनेगा हाई-लेवल टास्क फोर्स

सारांश

'गो ईस्ट' सिर्फ एक नारा नहीं — यह ओडिशा की उस रणनीतिक महत्वाकांक्षा का ऐलान है जो पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के निवेश को अपनी ओर मोड़ना चाहती है। IPICOL में समर्पित सेल, हाई-लेवल टास्क फोर्स और 'गो स्विफ्ट' डिजिटल मॉड्यूल के साथ माझी सरकार ने अगले पाँच साल में पूर्वी भारत की औद्योगिक राजधानी बनने का दावा ठोका है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने CII पूर्वी क्षेत्रीय परिषद बैठक 2026 में ' गो ईस्ट ' पहल की घोषणा की।
पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों के निवेशकों को ओडिशा में निवेश के लिए आमंत्रित किया गया; निवेश परियोजनाओं के लिए उच्च स्तरीय विशेष कार्य बल बनेगा।
IPICOL के भीतर समर्पित ' गो ईस्ट सेल ' और वास्तविक समय निगरानी के लिए ' गो स्विफ्ट मॉड्यूल ' विकसित होगा।
IPR-2022 संशोधन के तहत बालांगीर, कालाहांडी, नुआपड़ा, कंधमाल, बौध, गजपति सहित 15 जिलों को ' प्रमुख क्षेत्र ' का दर्जा मिलेगा।
माझी का लक्ष्य — अगले पाँच वर्षों में ओडिशा को पूर्वी भारत का अग्रणी औद्योगिक राज्य बनाना।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 27 जून 2026 को भुवनेश्वर में आयोजित CII पूर्वी क्षेत्रीय परिषद बैठक 2026 में 'गो ईस्ट' नामक एक नई औद्योगिक पहल की घोषणा की, जिसका उद्देश्य पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों के निवेशकों को ओडिशा में पूंजी लगाने के लिए आकर्षित करना है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के आधिकारिक बयान के अनुसार, यह मंच ओडिशा और समूचे पूर्वी क्षेत्र में औद्योगीकरण को नई गति देने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है।

क्या है 'गो ईस्ट' पहल

माझी ने स्पष्ट किया कि 'गो ईस्ट' मंच पूर्वी और उत्तरपूर्वी राज्यों के औद्योगिक समूहों को यह सुविधा देगा कि वे अपने गृह राज्यों में अपने मौजूदा आधार और बाज़ार सुरक्षित रखते हुए ओडिशा में समानांतर निवेश कर सकें। इस पहल के तहत निवेश परियोजनाओं को त्वरित गति देने के लिए एक उच्च स्तरीय विशेष कार्य बल (हाई-लेवल टास्क फोर्स) गठित किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, IPICOL (ओडिशा औद्योगिक संवर्धन एवं निवेश निगम) के भीतर एक समर्पित 'गो ईस्ट सेल' की स्थापना की जाएगी। निवेश अनुमोदन और प्रक्रियाओं की वास्तविक समय में निगरानी सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष 'गो स्विफ्ट मॉड्यूल' भी विकसित किया जाएगा।

IPR-2022 में बड़े संशोधन

मुख्यमंत्री ने औद्योगिक नीति संकल्प 2022 (IPR-2022) में किए गए प्रमुख संशोधनों की भी जानकारी दी। इन संशोधनों के तहत बालांगीर, कालाहांडी, नुआपड़ा, कंधमाल, बौध और गजपति सहित 15 चिन्हित जिलों में गैर-खनिज आधारित उद्योगों की स्थापना के लिए विशेष अवसर तैयार किए जाएंगे। ये जिले आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्र माने जाते हैं।

इन जिलों को 'प्रमुख क्षेत्र' का दर्जा दिया जाएगा, जिससे संतुलित क्षेत्रीय विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। यह कदम ओडिशा के सीमावर्ती और वंचित इलाकों में नए औद्योगिक विकास केंद्र स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पूर्वी भारत के उभरते विकास की दलील

माझी ने अपने संबोधन में रेखांकित किया कि दशकों से भारत की आर्थिक वृद्धि मुख्यतः पश्चिमी और दक्षिणी क्षेत्रों पर केंद्रित रही है। उन्होंने कहा कि भारत के विकास का अगला महत्वपूर्ण अध्याय अब पूर्वी भारत में लिखा जा रहा है। उनके अनुसार, प्रचुर खनिज संसाधन, मज़बूत कृषि क्षमता, लंबी तटरेखा और युवा कार्यबल इस क्षेत्र को तीव्र विकास के लिए अनुकूल बनाते हैं।

पाँच वर्षों में अग्रणी राज्य बनने का लक्ष्य

पिछले दो वर्षों में राज्य की औद्योगिक प्रगति का उल्लेख करते हुए माझी ने विश्वास व्यक्त किया कि ओडिशा अगले पाँच वर्षों में औद्योगीकरण और विकास के मामले में पूर्वी भारत का अग्रणी राज्य बनकर उभरेगा। यह पहल राज्य के सीमावर्ती जिलों में महत्वपूर्ण निवेश आकर्षित करने और वहाँ के आर्थिक परिदृश्य को बदलने की उम्मीद रखती है। 'गो ईस्ट' की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि टास्क फोर्स और 'गो स्विफ्ट मॉड्यूल' कितनी तेज़ी से ज़मीन पर उतरते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो ओडिशा उस कथा का नेतृत्व करने की होड़ में है। लेकिन असली सवाल यह है कि IPICOL जैसी संस्था, जो अतीत में निवेश मंज़ूरी की सुस्त रफ्तार के लिए आलोचना झेल चुकी है, 'गो स्विफ्ट मॉड्यूल' से वाकई कितनी तेज़ होगी। बालांगीर और कालाहांडी जैसे जिलों को 'प्रमुख क्षेत्र' का दर्जा देना सराहनीय है, पर गैर-खनिज उद्योगों के लिए कुशल श्रमबल और आधारभूत ढाँचे की उपलब्धता बिना सत्यापित किए यह दर्जा महज़ कागज़ी रह सकता है। पाँच साल में पूर्वी भारत का अग्रणी राज्य बनने का दावा महत्वाकांक्षी है — इसे मापने का पैमाना अभी तय होना बाकी है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा की 'गो ईस्ट' पहल क्या है?
'गो ईस्ट' ओडिशा सरकार का एक नया औद्योगिक मंच है, जिसकी घोषणा मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने CII पूर्वी क्षेत्रीय परिषद बैठक 2026 में की। इसका उद्देश्य पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों के निवेशकों को ओडिशा में पूंजी लगाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
'गो ईस्ट सेल' और 'गो स्विफ्ट मॉड्यूल' क्या हैं?
'गो ईस्ट सेल' IPICOL के भीतर स्थापित होने वाली एक समर्पित इकाई है जो इस पहल के तहत निवेश प्रस्तावों का प्रबंधन करेगी। 'गो स्विफ्ट मॉड्यूल' एक डिजिटल प्रणाली है जो निवेश अनुमोदन और प्रक्रियाओं की वास्तविक समय में निगरानी और ट्रैकिंग सुनिश्चित करेगी।
IPR-2022 संशोधन से ओडिशा के किन जिलों को फायदा होगा?
संशोधित IPR-2022 के तहत बालांगीर, कालाहांडी, नुआपड़ा, कंधमाल, बौध और गजपति सहित 15 चिन्हित आर्थिक रूप से पिछड़े जिलों को 'प्रमुख क्षेत्र' का दर्जा दिया जाएगा। इन जिलों में गैर-खनिज आधारित उद्योगों की स्थापना के लिए विशेष अवसर तैयार किए जाएंगे।
ओडिशा को पूर्वी भारत का अग्रणी औद्योगिक राज्य बनने में कितना समय लगेगा?
मुख्यमंत्री माझी ने अगले पाँच वर्षों में ओडिशा को पूर्वी भारत का अग्रणी औद्योगिक राज्य बनाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने पिछले दो वर्षों की औद्योगिक प्रगति को इस दिशा में सकारात्मक संकेत बताया।
'गो ईस्ट' पहल से ओडिशा के सीमावर्ती जिलों पर क्या असर पड़ेगा?
सरकार के अनुसार इस पहल से राज्य के सीमावर्ती जिलों में महत्वपूर्ण निवेश आएगा और नए औद्योगिक विकास केंद्र स्थापित होंगे। इससे इन क्षेत्रों का आर्थिक परिदृश्य बदलने की उम्मीद जताई गई है, हालाँकि ठोस निवेश आँकड़े अभी सामने नहीं आए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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