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ओडिशा को ₹66,392 करोड़ के निवेश प्रस्ताव, माझी के दिल्ली दौरे में 38 MOU हस्ताक्षरित

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ओडिशा को ₹66,392 करोड़ के निवेश प्रस्ताव, माझी के दिल्ली दौरे में 38 MOU हस्ताक्षरित

सारांश

ओडिशा के मुख्यमंत्री माझी का दिल्ली-एनसीआर दौरा महज़ शिष्टाचार भेंट नहीं था — यह राज्य की औद्योगिक महत्वाकांक्षा का खुला एलान था। ₹66,392 करोड़ के प्रस्ताव और 38 MOU के साथ, ओडिशा पूर्वी भारत की मैन्युफैक्चरिंग राजधानी बनने की दिशा में बड़ा दांव खेल रहा है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के दो दिवसीय दिल्ली-एनसीआर दौरे में ओडिशा को ₹66,392 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले।
38 MOU हस्ताक्षरित; इनसे ₹64,703 करोड़ का निवेश और 46,071 लोगों को रोज़गार मिलने की संभावना।
कुल 54,135 रोज़गार अवसर सृजित होने का अनुमान, विभिन्न क्षेत्रों में।
दो दिनों में 46 उच्चस्तरीय बैठकें और 208 से अधिक उद्योग संवाद आयोजित।
इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल, एल्यूमीनियम डाउनस्ट्रीम और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों पर विशेष ध्यान।
नोएडा स्थित हायर के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का दौरा; इलेक्ट्रॉनिक्स व सप्लाई चेन निवेश पर चर्चा।

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी का दो दिवसीय दिल्ली-एनसीआर निवेश संपर्क अभियान 9 अगस्त 2025 को सफलतापूर्वक समाप्त हुआ, जिसमें राज्य को ₹66,392 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए और 54,135 रोज़गार अवसर सृजित होने की संभावना जताई गई है। इस अभियान के दौरान 38 समझौता ज्ञापनों (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए, जो ₹64,703 करोड़ के निवेश और 46,071 लोगों को रोज़गार देने की क्षमता रखते हैं।

अभियान का स्वरूप और उद्देश्य

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में आयोजित इस अभियान में देश की प्रमुख कंपनियों और उद्योग प्रतिनिधियों के साथ उच्चस्तरीय बैठकें, क्षेत्रवार गोलमेज चर्चाएँ और नोएडा स्थित हायर के विनिर्माण संयंत्र का दौरा शामिल रहा। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, दो दिनों में 46 उच्चस्तरीय बैठकें और 208 से अधिक उद्योग संवाद आयोजित किए गए। अभियान का केंद्रीय लक्ष्य उद्योगों की रुचि को ठोस निवेश में बदलना, विनिर्माण क्षेत्र को सुदृढ़ करना और राज्य में रोज़गार के नए द्वार खोलना था।

हायर संयंत्र का दौरा और क्षेत्रीय चर्चाएँ

दौरे के दूसरे दिन मुख्यमंत्री माझी ने नोएडा स्थित हायर के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का निरीक्षण किया और कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों व तकनीकी विशेषज्ञों से मुलाकात की। इलेक्ट्रॉनिक्स, उपभोक्ता उत्पाद, सप्लाई चेन और सहायक उद्योगों में ओडिशा में निवेश की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।

इसके अतिरिक्त तीन प्रमुख क्षेत्रीय गोलमेज बैठकें आयोजित की गईं — इंजीनियरिंग गुड्स मैन्युफैक्चरिंग राउंडटेबल में औद्योगिक बुनियादी ढाँचे और सप्लाई चेन विकास पर विचार-विमर्श हुआ; टेक्सटाइल एवं परिधान क्षेत्र की बैठक में निर्यात, कुशल कार्यबल और रोज़गार-आधारित निवेश के अवसरों पर चर्चा हुई; और एल्यूमीनियम डाउनस्ट्रीम राउंडटेबल में मूल्य संवर्धन व एमएसएमई की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया।

मुख्यमंत्री और उद्योग मंत्री की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री माझी ने कहा, 'ओडिशा ऐसा औद्योगिक वातावरण तैयार कर रहा है जहाँ उद्योग बढ़ें, रोज़गार पैदा करें और दीर्घकालिक मूल्य सृजित करें। हमारा लक्ष्य सिर्फ निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करना है।' उन्होंने यह भी कहा कि 'ओडिशा 'पूर्वोदय' के लिए पूरी तरह तैयार है।'

राज्य के उद्योग मंत्री संपद चंद्र स्वाईं ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में उद्योग जगत की प्रतिक्रिया ओडिशा के निवेश माहौल में बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। उन्होंने कहा, 'हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि निवेश की यह रुचि वास्तविक परियोजनाओं में बदले।'

आम जनता और अर्थव्यवस्था पर संभावित असर

यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा पूर्वी भारत के प्रमुख औद्योगिक गंतव्य के रूप में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि राज्य में एल्यूमीनियम, इस्पात और खनिज क्षेत्र पहले से मजबूत आधार रखते हैं, और नए MOU इन्हीं क्षेत्रों में डाउनस्ट्रीम उद्योगों को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं। इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, एल्यूमीनियम और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों में प्रस्तावित निवेश से राज्य के युवाओं को प्रत्यक्ष रोज़गार मिलने की उम्मीद है।

आगे की राह

अब सरकार के सामने असली चुनौती इन प्रस्तावों और MOU को ज़मीनी परियोजनाओं में बदलने की है। उद्योग मंत्री स्वाईं ने संकेत दिया है कि निवेशकों को सहयोग देने और क्षेत्रीय मूल्य श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ओडिशा सरकार का अगला बड़ा निवेश सम्मेलन 'उत्कर्ष ओडिशा' के तहत राज्य में आयोजित होने की संभावना है, जहाँ इन प्रस्तावों को औपचारिक रूप दिया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

392 करोड़ के प्रस्ताव प्रभावशाली दिखते हैं, लेकिन असली कसौटी यह है कि इनमें से कितने वास्तविक परियोजनाओं में तब्दील होते हैं — भारत में निवेश सम्मेलनों और MOU की लंबी परंपरा रही है जो अक्सर ज़मीन पर उतरने से पहले ही ठंडी पड़ जाती है। ओडिशा की एल्यूमीनियम और खनिज संपदा एक ठोस आधार ज़रूर देती है, लेकिन टेक्सटाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में गुजरात, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे राज्यों से कड़ी टक्कर है। सरकार को MOU के क्रियान्वयन की समयसीमा और स्वतंत्र रोज़गार सत्यापन तंत्र सार्वजनिक करना होगा, अन्यथा 'पूर्वोदय' का नारा केवल चुनावी भाषण तक सीमित रह सकता है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा को दिल्ली-एनसीआर दौरे में कितने निवेश प्रस्ताव मिले?
दो दिवसीय दौरे में ओडिशा को ₹66,392 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनसे 54,135 रोज़गार अवसर सृजित होने की संभावना है। इसके अलावा 38 MOU पर हस्ताक्षर किए गए, जो ₹64,703 करोड़ के निवेश और 46,071 लोगों को रोज़गार देने की क्षमता रखते हैं।
मुख्यमंत्री माझी के दिल्ली दौरे में किन क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया?
दौरे में इंजीनियरिंग गुड्स मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल एवं परिधान, एल्यूमीनियम डाउनस्ट्रीम उद्योग और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया। नोएडा स्थित हायर के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का दौरा भी किया गया, जहाँ सप्लाई चेन और उपभोक्ता उत्पाद निवेश पर चर्चा हुई।
दिल्ली-एनसीआर दौरे में कितनी बैठकें हुईं?
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, दो दिनों में 46 उच्चस्तरीय बैठकें और 208 से अधिक उद्योग संवाद आयोजित किए गए। इनमें व्यक्तिगत बैठकों के साथ-साथ तीन प्रमुख क्षेत्रीय गोलमेज चर्चाएँ भी शामिल थीं।
ओडिशा 'पूर्वोदय' योजना क्या है?
'पूर्वोदय' पूर्वी भारत के विकास की एक व्यापक पहल है जिसके तहत ओडिशा औद्योगिक निवेश आकर्षित कर रोज़गार और आर्थिक विकास को गति देना चाहता है। मुख्यमंत्री माझी ने इसी ढाँचे के अंतर्गत दिल्ली-एनसीआर निवेश अभियान को संदर्भित किया।
MOU से वास्तविक निवेश कब तक आने की उम्मीद है?
सरकार ने अभी तक MOU के क्रियान्वयन की कोई स्पष्ट समयसीमा सार्वजनिक नहीं की है। उद्योग मंत्री संपद चंद्र स्वाईं ने संकेत दिया है कि निवेशकों को सहयोग देकर इन प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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