ओडिशा सरकार का ईंधन संरक्षण अभियान: CM माझी ने जारी किए 8 सूत्रीय निर्देश, 10% कटौती का लक्ष्य

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ओडिशा सरकार का ईंधन संरक्षण अभियान: CM माझी ने जारी किए 8 सूत्रीय निर्देश, 10% कटौती का लक्ष्य

सारांश

पश्चिम एशिया संकट के बीच ओडिशा के CM माझी ने सरकारी ईंधन खपत में 10% मासिक कटौती का लक्ष्य तय किया है। 1 जून से सभी नए सरकारी वाहन इलेक्ट्रिक होंगे, वर्चुअल बैठकें अनिवार्य होंगी और वरिष्ठ अधिकारियों का ईंधन आवंटन आधा किया जाएगा — यह राज्य का अब तक का सबसे व्यापक ईंधन संरक्षण कदम है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 21 मई 2026 को सरकारी विभागों के लिए 8 सूत्रीय ईंधन संरक्षण निर्देश जारी किए।
सभी सरकारी कार्यालयों में पेट्रोल-डीजल खपत में प्रतिमाह कम से कम 10 प्रतिशत कटौती का लक्ष्य।
1 जून 2026 से सरकारी खरीद के सभी नए दोपहिया और चारपहिया वाहन अनिवार्यतः इलेक्ट्रिक होंगे।
वरिष्ठ अधिकारियों के लिए कारपूलिंग अनिवार्य; सरकारी वाहनों का ईंधन आवंटन आधा किया जाएगा।
वित्त विभाग को 15 दिनों में वाहन श्रेणी और निजी ईवी उपयोग के दिशा-निर्देश तैयार करने के आदेश।
निर्देश राज्य सचिवालय, सार्वजनिक उपक्रमों, विश्वविद्यालयों सहित सभी सरकारी संस्थाओं पर लागू।

पश्चिम एशिया संकट की पृष्ठभूमि में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 21 मई 2026 को राज्य के समस्त सरकारी विभागों और कार्यालयों के लिए 8 सूत्रीय ईंधन संरक्षण निर्देश जारी किए, जिनका उद्देश्य पेट्रोल और डीजल की खपत में प्रतिमाह कम से कम 10 प्रतिशत की कटौती करना है। यह निर्देश राज्य सचिवालय से लेकर ब्लॉक कार्यालयों तक सभी सरकारी संस्थाओं पर लागू होंगे।

पहल की पृष्ठभूमि

मुख्यमंत्री माझी ने इससे पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ईंधन संरक्षण के विषय पर विचार-विमर्श किया था। उस चर्चा के बाद उन्होंने अपने आधिकारिक काफिले में वाहनों की संख्या स्वयं घटाई थी और नागरिकों से भी ईंधन बचत की अपील की थी। गुरुवार को उन्होंने मुख्य सचिव को निर्देशित किया कि सरकारी कामकाज में ईंधन खपत घटाने के लिए ठोस और समयबद्ध कदम उठाए जाएं।

8 सूत्रीय निर्देशों का विवरण

सरकार द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, सरकारी बैठकें, समीक्षा बैठकें, प्रशिक्षण कार्यक्रम और वर्कशॉप अधिकतम वर्चुअल मोड में आयोजित किए जाएंगे — केवल अनिवार्य अधिकारियों की भौतिक उपस्थिति की अनुमति होगी। 1 जून 2026 से सरकारी कार्यालयों द्वारा खरीदे जाने वाले सभी नए दोपहिया और चारपहिया वाहन अनिवार्यतः इलेक्ट्रिक होंगे; विशेष परिस्थितियों में ही पेट्रोल या डीजल वाहन की अनुमति मिलेगी।

सरकारी वाहन सुविधा प्राप्त वरिष्ठ अधिकारियों को कारपूलिंग अपनाने के निर्देश दिए गए हैं और ऐसे वाहनों का ईंधन आवंटन आधा कर दिया जाएगा। वित्त विभाग को 15 दिनों के भीतर यह निर्धारित करने को कहा गया है कि किन श्रेणी के अधिकारियों को निजी उपयोग हेतु सरकारी वाहन मिलेंगे।

लंबी दूरी की आधिकारिक यात्राओं में अधिकारियों और कर्मचारियों को बस और ट्रेन को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है। सरकारी कार्यों में अधिकारियों के निजी इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग के लिए भी वित्त विभाग को अलग दिशा-निर्देश तैयार करने को कहा गया है। जहाँ कर्मचारियों की संख्या अधिक है, वहाँ इलेक्ट्रिक बस या मिनी बस सेवा शुरू की जाएगी।

व्यापक दायरा और अनुपालन

मुख्यमंत्री माझी ने स्पष्ट किया है कि ये निर्देश राज्य सचिवालय, सरकारी विभागों, उपखंड कार्यालयों, तहसील कार्यालयों, ब्लॉक कार्यालयों, सार्वजनिक उपक्रमों, विश्वविद्यालयों और अन्य सरकारी संस्थानों में सख्ती से लागू किए जाएंगे। यह पहल ऐसे समय में आई है जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर पश्चिम एशिया के हालात का सीधा असर पड़ रहा है।

आम जनता और कर्मचारियों पर असर

इन निर्देशों से राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों की दैनिक आवाजाही प्रभावित होगी। इलेक्ट्रिक बस सेवा और कारपूलिंग से जहाँ सरकारी खर्च घटने की उम्मीद है, वहीं 1 जून से लागू होने वाली इलेक्ट्रिक वाहन खरीद नीति राज्य के ईवी बाज़ार को भी गति दे सकती है। गौरतलब है कि यह ओडिशा की ओर से ईंधन संरक्षण के क्षेत्र में अब तक का सबसे व्यापक संस्थागत प्रयास है।

आगे की राह

वित्त विभाग को वाहन श्रेणी और निजी ईवी उपयोग के दिशा-निर्देश 15 दिनों में सौंपने हैं। सभी सरकारी कार्यालयों में मासिक ईंधन खपत की निगरानी की व्यवस्था भी अपेक्षित है। यदि यह मॉडल सफल रहा, तो अन्य राज्य भी ऐसी नीतियाँ अपनाने पर विचार कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा अनुपालन की होगी — भारत में सरकारी वाहन नीतियाँ अक्सर कागज़ पर मज़बूत और ज़मीन पर कमज़ोर रहती हैं। 10% मासिक कटौती का लक्ष्य तभी सार्थक होगा जब मासिक ईंधन खपत की पारदर्शी निगरानी और सार्वजनिक रिपोर्टिंग की व्यवस्था हो। यह भी विचारणीय है कि 1 जून की इलेक्ट्रिक वाहन अनिवार्यता राज्य के दूरदराज़ ज़िलों में व्यावहारिक है या नहीं, जहाँ चार्जिंग अवसंरचना अभी भी अपर्याप्त है। पश्चिम एशिया संकट ने एक राजनीतिक अवसर दिया है — इसे दीर्घकालिक नीति में बदलना होगा, न कि महज़ एक प्रतीकात्मक घोषणा में।
RashtraPress
22 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा सरकार के 8 सूत्रीय ईंधन संरक्षण निर्देश क्या हैं?
ये निर्देश मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी द्वारा 21 मई 2026 को जारी किए गए हैं, जिनमें वर्चुअल बैठकें, इलेक्ट्रिक वाहन खरीद, कारपूलिंग, सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता, इलेक्ट्रिक बस सेवा और 10% मासिक ईंधन कटौती का लक्ष्य शामिल है। ये सभी सरकारी विभागों, उपक्रमों और विश्वविद्यालयों पर लागू होंगे।
ओडिशा में सरकारी वाहनों के लिए इलेक्ट्रिक नीति कब से लागू होगी?
1 जून 2026 से ओडिशा सरकार के सभी नए सरकारी दोपहिया और चारपहिया वाहन अनिवार्यतः इलेक्ट्रिक होंगे। केवल विशेष परिस्थितियों में ही पेट्रोल या डीजल वाहन खरीदने की अनुमति दी जाएगी।
ओडिशा के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए कारपूलिंग नियम क्या हैं?
सरकारी वाहन सुविधा प्राप्त वरिष्ठ अधिकारियों को कारपूलिंग अपनानी होगी और उनके वाहनों का ईंधन आवंटन आधा कर दिया जाएगा। वित्त विभाग को 15 दिनों में यह तय करना है कि किन श्रेणी के अधिकारियों को निजी उपयोग के लिए सरकारी वाहन मिलेंगे।
ये निर्देश किन-किन सरकारी संस्थाओं पर लागू होंगे?
ये निर्देश राज्य सचिवालय, सभी सरकारी विभागों, उपखंड कार्यालयों, तहसील कार्यालयों, ब्लॉक कार्यालयों, सार्वजनिक उपक्रमों, विश्वविद्यालयों और अन्य सरकारी संस्थानों पर सख्ती से लागू होंगे।
पश्चिम एशिया संकट का ओडिशा की ईंधन नीति से क्या संबंध है?
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बढ़ा है, जिससे भारत में ईंधन खपत को लेकर चिंताएँ गहरी हुई हैं। इसी पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री माझी ने प्रधानमंत्री मोदी से चर्चा के बाद यह संस्थागत ईंधन संरक्षण अभियान शुरू किया।
राष्ट्र प्रेस
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