भारतीय रेलवे का ₹2.93 लाख करोड़ कैपेक्स: जुलाई तक 39% खर्च, कवच 2,633 रूट किमी पर सक्रिय
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित ₹2,93,030 करोड़ के पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) बजट में से जुलाई 2026 तक ₹1,14,973 करोड़ — यानी करीब 39 प्रतिशत — खर्च कर लिए हैं। यह जानकारी केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 5 अगस्त 2026 को लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से दी। इस अवधि में रेलवे ने स्वदेशी टक्कर-रोधी प्रणाली 'कवच' के विस्तार और उच्च गति संचालन के लिए ट्रैक आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है।
कवच 4.0 का विस्तार
रेल मंत्री वैष्णव ने बताया कि स्वदेशी ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम कवच संस्करण 4.0 को 31 जुलाई 2026 तक 2,633 रूट किलोमीटर पर चालू किया जा चुका है। इसमें दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे उच्च घनत्व वाले प्रमुख कॉरिडोर शामिल हैं।
कवच 4.0 में लोकेशन की अधिक सटीक पहचान, बड़े यार्डों में बेहतर सिग्नल सूचना, ऑप्टिकल फाइबर आधारित स्टेशन-टू-स्टेशन इंटरफेस और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम के साथ सीधे एकीकरण जैसी आधुनिक सुविधाएँ जोड़ी गई हैं। इससे पूरे नेटवर्क में इस प्रणाली का बड़े पैमाने पर विस्तार सुगम होगा।
ट्रैक किनारे कवच का कार्य 21,794 रूट किलोमीटर पर प्रारंभ किया गया है — जिसमें गोल्डन क्वाड्रिलेटरल, गोल्डन डायगोनल, हाई-डेंसिटी नेटवर्क और अन्य चिन्हित रेलखंड शामिल हैं। अब तक 6,290 लोकोमोटिव में कवच स्थापित की जा चुकी है, जबकि 7,190 और लोकोमोटिव तथा 1,200 ईएमयू और मेमू रेक को भी इस प्रणाली से लैस करने का काम जारी है। जून 2026 तक कवच परियोजना पर ₹3,875 करोड़ खर्च हो चुके हैं और वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इसका बजट प्रावधान ₹2,066 करोड़ है।
सुरक्षा व्यय में ऐतिहासिक वृद्धि
रेल मंत्री ने बताया कि सुरक्षा मद पर होने वाला खर्च पिछले एक दशक में कई गुना बढ़ा है। 2013-14 में जहाँ सुरक्षा पर ₹39,200 करोड़ खर्च हुए थे, वहीं 2026-27 में यह राशि बढ़कर ₹1,20,389 करोड़ हो गई है — यानी लगभग तीन गुना वृद्धि। यह ऐसे समय में आया है जब रेल दुर्घटनाओं पर सार्वजनिक और संसदीय दबाव लगातार बना रहा है।
गति उन्नयन: मिशन रफ्तार
ट्रैक आधुनिकीकरण के मोर्चे पर भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। 2014 में केवल 5,036 किलोमीटर रेल मार्ग पर 130 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे अधिक गति की ट्रेनें चल सकती थीं, जो 2026 में बढ़कर 24,173 किलोमीटर हो गई है। वर्तमान में रेलवे नेटवर्क का लगभग 81 प्रतिशत हिस्सा 110 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे अधिक गति के लिए सक्षम है, जबकि 2014 में यह आँकड़ा केवल 40 प्रतिशत था।
मिशन रफ्तार के तहत गोल्डन क्वाड्रिलेटरल के नई दिल्ली-मुंबई और नई दिल्ली-हावड़ा कॉरिडोर को 160 किलोमीटर प्रति घंटा तक की गति के लिए अपग्रेड किया जा रहा है।
बुनियादी ढाँचे का विस्तार
2014 से 2026 के बीच भारतीय रेलवे ने 36,429 किलोमीटर नई रेल लाइनों का निर्माण किया है — औसतन 8.32 किलोमीटर प्रतिदिन, जो 2009-14 के दौरान दर्ज 4.2 किलोमीटर प्रतिदिन की तुलना में लगभग दोगुनी रफ्तार है।
1 अप्रैल 2026 तक रेलवे की 514 आधारभूत संरचना परियोजनाएँ कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं — जिनमें 169 नई लाइनें, 29 गेज परिवर्तन परियोजनाएँ और 316 दोहरीकरण परियोजनाएँ शामिल हैं। ये परियोजनाएँ करीब 40,000 किलोमीटर रेल मार्ग को कवर करती हैं और इनकी अनुमानित लागत लगभग ₹8.31 लाख करोड़ है। इनमें से अब तक 12,583 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है, जिस पर ₹3.05 लाख करोड़ खर्च किए गए हैं।
कौशल विकास और आगे की राह
रेल मंत्री ने यह भी बताया कि भारतीय रेलवे अपने विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से हर साल लगभग 6 लाख कर्मचारियों को प्रशिक्षित करता है। कौशल विकास कार्यक्रमों में डिजिटल तकनीक, लॉजिस्टिक्स और आधुनिक माल परिवहन संचालन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। कैपेक्स उपयोग की मौजूदा गति और चल रही परियोजनाओं को देखते हुए, शेष वित्त वर्ष में रेलवे के बुनियादी ढाँचे में और तेज़ी से बदलाव आने की संभावना है।