मनोज सिन्हा ने पुरमंडल-उत्तरवाहिनी विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया, ₹14 करोड़ होंगे खर्च
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 20 सितंबर 2026 को सांबा जिले के पुरमंडल और उत्तरवाहिनी के प्राचीन धार्मिक व सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण, पुनर्स्थापन और विकास से जुड़ी परियोजनाओं का शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं पर कुल ₹14 करोड़ खर्च किए जाएंगे — पुरमंडल के लिए ₹7.15 करोड़ और उत्तरवाहिनी के लिए ₹6.85 करोड़। इस अवसर पर उपराज्यपाल ने कहा कि इतिहास, पवित्र ज्ञान और धर्म आधारित मूल्यों का संरक्षण किसी भी राष्ट्र की जीवनरेखा होता है।
परियोजनाओं का दायरा और उद्देश्य
उपराज्यपाल सिन्हा ने स्पष्ट किया कि यह पहल केवल ईंट-पत्थरों की मरम्मत तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के गौरवशाली अतीत को उज्ज्वल भविष्य से जोड़ने का व्यापक प्रयास है। पुरमंडल स्थित प्राचीन लक्ष्मी नारायण मंदिर, शिव मंदिर, राम मंदिर तथा उत्तरवाहिनी के ऐतिहासिक मंदिर समूहों का संरक्षण आधुनिक तकनीकों और पारंपरिक वास्तुशिल्प शैली के समन्वय से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पवित्र देविका नदी के तट पर स्थित पुरमंडल सदियों से संतों, ऋषियों और आध्यात्मिक साधकों का केंद्र रहा है और यहाँ की पत्थर की नक्काशी, पवित्र कुंड व ऐतिहासिक संरचनाएँ उत्कृष्ट स्थापत्य कला की मिसाल हैं।
पर्यटन और रोज़गार पर असर
उपराज्यपाल ने रेखांकित किया कि इन परियोजनाओं से जम्मू-कश्मीर आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित होगा। बेहतर सड़क, प्रकाश व्यवस्था और आधारभूत सुविधाओं से माता वैष्णो देवी, शिवखोड़ी, रघुनाथ मंदिर और बाबा अमरनाथ आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पुरमंडल और उत्तरवाहिनी तक पहुँच सुगम होगी। उन्होंने यह भी कहा कि विरासत पर्यटन स्थानीय हस्तशिल्प, आतिथ्य, होमस्टे, परिवहन और खाद्य व्यवसायों को प्रोत्साहन देगा, जिससे युवाओं को रोज़गार और छोटे उद्यमियों को नए अवसर मिलेंगे।
वेद पाठशाला और अन्य घोषणाएँ
सिन्हा ने पुरमंडल में माता देविका वेद पाठशाला की स्थापना के लिए भूमि उपलब्ध कराने पर सांबा जिला प्रशासन की सराहना की। उन्होंने बताया कि इसके निर्माण के लिए श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के माध्यम से शीघ्र धनराशि स्वीकृत की जाएगी। कार्यक्रम के दौरान उपराज्यपाल ने जीसीसी गुरहा सलाथिया पत्रिका का भी लोकार्पण किया।
विकास और सांस्कृतिक पहचान का संतुलन
उपराज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण विकसित भारत की यात्रा में उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना राजमार्ग, डिजिटल नेटवर्क और औद्योगिक गलियारों का निर्माण। उनके अनुसार, भौतिक विकास क्षेत्र को गति देता है, जबकि सांस्कृतिक विरासत समाज को दिशा और आत्मा प्रदान करती है। उन्होंने पुरमंडल और उत्तरवाहिनी तक सड़क संपर्क को और मज़बूत करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
समारोह में उपस्थित प्रमुख हस्तियाँ
इस अवसर पर विधायक चंद्र प्रकाश गंगा, संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव बृज मोहन शर्मा, संभागीय आयुक्त रमेश कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, धार्मिक प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। गौरतलब है कि यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब जम्मू-कश्मीर में धार्मिक व सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में प्रशासन की ओर से लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। आने वाले महीनों में इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन की गति इस क्षेत्र के सांस्कृतिक पर्यटन परिदृश्य को नई दिशा दे सकती है।