17 अगस्त 2026
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अनंतनाग में एलजी मनोज सिन्हा ने हेरिटेज और सांस्कृतिक संरक्षण परियोजनाओं की रखी आधारशिला

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अनंतनाग में एलजी मनोज सिन्हा ने हेरिटेज और सांस्कृतिक संरक्षण परियोजनाओं की रखी आधारशिला

सारांश

जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने अनंतनाग में श्री रामकृष्ण महासम्मेलन आश्रम का दौरा कर हेरिटेज और सांस्कृतिक संरक्षण की नई परियोजनाओं की आधारशिला रखी। समाधि प्रतिष्ठा दिवस और नाग पंचमी महोत्सव के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में स्वामी विवेकानंद के संदेश और प्रकृति संरक्षण पर विशेष बल दिया गया।

मुख्य बातें

एलजी मनोज सिन्हा ने 17 अगस्त 2026 को अनंतनाग में हेरिटेज और सांस्कृतिक संरक्षण परियोजनाओं की आधारशिला रखी।
कार्यक्रम समाधि प्रतिष्ठा दिवस , नाग पंचमी महोत्सव और यज्ञ की पूर्णाहुति के अवसर पर आयोजित हुआ।
श्री रामकृष्ण महासम्मेलन आश्रम की स्थापना 1937 में स्वामी अशोकानंद जी महाराज के दूरदर्शी संकल्प से हुई थी।
एलजी ने युवाओं से स्वामी विवेकानंद के आत्मविश्वास और निस्वार्थ सेवा के संदेश से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
उन्होंने ईशोपनिषद और भगवद् गीता का संदर्भ देते हुए आध्यात्मिकता और प्रकृति संरक्षण को अविभाज्य बताया।

जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार, 17 अगस्त 2026 को अनंतनाग जिले में हेरिटेज संरक्षण और सांस्कृतिक पुनरुद्धार से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण पहलों की आधारशिला रखी। यह अवसर समाधि प्रतिष्ठा दिवस, नाग पंचमी महोत्सव और यज्ञ की पूर्णाहुति के संयोग पर आयोजित किया गया था।

आश्रम दौरा और श्रद्धांजलि

उप-राज्यपाल सिन्हा ने अनंतनाग स्थित श्री रामकृष्ण महासम्मेलन आश्रम का दौरा किया और आश्रम के संस्थापक स्वामी अशोकानंद जी महाराज को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने आश्रम की उस भूमिका की सराहना की, जिसके माध्यम से ऋषियों-मुनियों की ज्ञान परंपरा को पीढ़ियों तक संजोकर रखा गया है।

1937 में स्वामी अशोकानंद जी महाराज के दूरदर्शी संकल्प को स्मरण करते हुए सिन्हा ने कहा कि यह आश्रम एक जीवंत आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ, जिसने समाज की वास्तविक आवश्यकताओं को पूरा करते हुए सनातन धर्म के शाश्वत संदेश को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि 1971 में जब स्वामी जी ने अपना नश्वर शरीर त्यागा, तो वे सेवा, साधना और समर्पण की एक जीवंत परंपरा छोड़ गए, जो आज भी आश्रम की प्रत्येक गतिविधि में प्रवाहित होती है।

आध्यात्मिकता और प्रकृति का संदेश

उप-राज्यपाल ने इस बात पर विशेष बल दिया कि भारतीय सभ्यता ने सदैव आध्यात्मिकता और प्रकृति को अविभाज्य माना है। उन्होंने ईशोपनिषद का संदर्भ देते हुए कहा कि ईश्वर समस्त सृष्टि में व्याप्त हैं और इसीलिए प्रकृति का संरक्षण एक आध्यात्मिक दायित्व है।

वैश्विक जलवायु संकट के परिप्रेक्ष्य में उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे नदियों, वनों, पशुओं और समस्त जीवित प्राणियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएँ, ताकि प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए सतत विकास का मार्ग प्रशस्त हो सके।

नई परियोजनाओं का महत्व

आश्रम में आरंभ की गई नई पहलों को रेखांकित करते हुए सिन्हा ने कहा कि ये परियोजनाएँ आस्था को कर्म में परिवर्तित करने का प्रतीक हैं। उन्होंने भगवद् गीता से उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया कि जब कर्म सेवा बन जाता है और सेवा समर्पण बन जाती है, तो साधारण कार्य भी साधना का रूप ले लेता है।

उन्होंने यह भी जोर दिया कि भारतीय संस्कृति में आध्यात्मिकता का अर्थ केवल व्यक्तिगत मुक्ति नहीं, बल्कि निस्वार्थ सेवा के माध्यम से विश्व के प्रति उत्तरदायित्व निभाना है।

युवाओं को स्वामी विवेकानंद का संदेश

उप-राज्यपाल ने युवाओं को स्वामी विवेकानंद के आत्मविश्वास, निर्भीकता और निस्वार्थ सेवा के संदेश से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सच्ची शक्ति भीतर ही निहित है और प्रत्येक व्यक्ति अपने भाग्य का स्वयं निर्माता है।

विविधता में एकता के भारत के चिरंतन दर्शन को दोहराते हुए सिन्हा ने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति विविधता का सम्मान करते हुए एकजुट होकर आगे बढ़ने में निहित है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से अनंतनाग क्षेत्र में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

असली कसौटी यह होगी कि ये परियोजनाएँ स्थानीय समुदाय की भागीदारी और रोज़गार से कितनी जुड़ती हैं — केवल आधारशिला से सांस्कृतिक पुनरुद्धार नहीं होता, उसके लिए निरंतर संसाधन और स्थानीय स्वामित्व आवश्यक है।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एलजी मनोज सिन्हा ने अनंतनाग में किन परियोजनाओं की आधारशिला रखी?
उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने 17 अगस्त 2026 को अनंतनाग जिले में हेरिटेज संरक्षण और सांस्कृतिक पुनरुद्धार से जुड़ी अनेक पहलों की आधारशिला रखी। ये परियोजनाएँ श्री रामकृष्ण महासम्मेलन आश्रम से संबद्ध हैं और आस्था को कर्म में परिवर्तित करने का प्रतीक बताई गई हैं।
श्री रामकृष्ण महासम्मेलन आश्रम अनंतनाग की स्थापना कब हुई?
इस आश्रम की स्थापना 1937 में स्वामी अशोकानंद जी महाराज के दूरदर्शी संकल्प से हुई थी। स्वामी जी ने 1971 में देह त्यागी और अपने पीछे सेवा, साधना और समर्पण की जीवंत परंपरा छोड़ गए।
एलजी सिन्हा ने युवाओं को क्या संदेश दिया?
उप-राज्यपाल सिन्हा ने युवाओं से स्वामी विवेकानंद के आत्मविश्वास, निर्भीकता और निस्वार्थ सेवा के संदेश से प्रेरणा लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सच्ची शक्ति भीतर निहित है और प्रत्येक व्यक्ति अपने भाग्य का स्वयं निर्माता है।
कार्यक्रम किस अवसर पर आयोजित किया गया था?
यह कार्यक्रम समाधि प्रतिष्ठा दिवस, नाग पंचमी महोत्सव और यज्ञ की पूर्णाहुति के संयोग पर आयोजित किया गया था। तीनों अवसरों का एक साथ आना इस आयोजन को विशेष महत्व देता है।
एलजी ने प्रकृति संरक्षण पर क्या कहा?
वैश्विक जलवायु चुनौतियों का उल्लेख करते हुए एलजी सिन्हा ने युवाओं से नदियों, वनों, पशुओं और समस्त जीवित प्राणियों के प्रति जिम्मेदारी निभाने का आग्रह किया। उन्होंने ईशोपनिषद का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय सभ्यता में आध्यात्मिकता और प्रकृति सदैव एक-दूसरे से जुड़े रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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