निर्जला एकादशी पर एलजी मनोज सिन्हा ने श्रीनगर में किया रुद्राभिषेक, शांति-समृद्धि की प्रार्थना
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गुरुवार, 25 जून 2026 को श्रीनगर के मैसूमा स्थित श्री आनंदीश्वर भैरव नाथ जी महाराज अस्थापन में निर्जला एकादशी और शिवाचार्य अभिनवगुप्त जयंती के पावन अवसर पर आयोजित रुद्राभिषेक समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने जम्मू-कश्मीर के सभी निवासियों की शांति, भलाई और समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
समारोह में क्या हुआ
उपराज्यपाल सिन्हा ने रुद्राभिषेक में विधिवत भाग लेने के साथ-साथ उपस्थित श्रद्धालुओं से बातचीत की और उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर श्री आनंदीश्वर भैरव नाथ स्थापन ट्रस्ट की आयोजन एवं प्रबंधन समिति के सदस्यों के अलावा वरिष्ठ सिविल और पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे।
एलजी सिन्हा का संदेश
एलजी मनोज सिन्हा ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर लिखा, 'आज श्रीनगर के मैसूमा स्थित श्री आनंदीश्वर भैरव नाथ जी महाराज अस्थापन में शिवाचार्य अभिनवगुप्त जयंती और निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर आयोजित रुद्राभिषेक समारोह में शामिल हुआ।'
उन्होंने कहा, 'कश्मीर शैव दर्शन के प्रमुख प्रवर्तक शिवाचार्य अभिनवगुप्त का जीवन और उनकी शिक्षाएं आज भी भारत की आध्यात्मिक विरासत को आलोकित कर रही हैं। सौंदर्यशास्त्र से लेकर आत्म-प्रत्यभिज्ञा के गहन दर्शन तक, उनकी दृष्टि अद्वैत चेतना की एक कालातीत प्रेरणा बनी हुई है।' उन्होंने यह भी कहा कि महान ऋषियों की सोच हमें याद दिलाती है कि सामूहिक विकास और आपसी तालमेल खूबसूरती से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
सिन्हा ने श्री आनंदीश्वर भैरव नाथ जी महाराज अस्थापन को जम्मू-कश्मीर के लोगों की सामूहिक चेतना में विशेष स्थान रखने वाला धार्मिक केंद्र बताया।
आचार्य अभिनवगुप्त: कश्मीर की आध्यात्मिक विरासत
आचार्य अभिनवगुप्त (950–1025 ईस्वी) कश्मीर के 10वीं सदी के महान दार्शनिक, रहस्यवादी और बहुज्ञ विद्वान थे। उन्हें कश्मीर शैव मत का सबसे प्रमुख व्याख्याता माना जाता है — यह एक अद्वैतवादी परंपरा है जो पूरे ब्रह्मांड को शिव-चेतना की दिव्य अभिव्यक्ति के रूप में देखती है।
अभिनवगुप्त ने सिखाया कि यह ब्रह्मांड कोई भ्रम नहीं, बल्कि भगवान शिव की शक्ति का वास्तविक और आनंदमय विस्तार है। उन्होंने 'प्रत्यभिज्ञा' — आत्म-साक्षात्कार के मार्ग — पर विशेष बल दिया, जिसके अनुसार व्यक्तिगत आत्मा और भगवान शिव मूलतः एक ही हैं।
उनकी ज्ञान-कोश जैसी महान रचना 'तंत्रलोक' जटिल तांत्रिक और शैव परंपराओं को एकीकृत कर एक व्यापक आध्यात्मिक मार्गदर्शिका प्रस्तुत करती है। भारतीय साहित्य में सौंदर्यशास्त्र पर उनकी टीका 'अभिनवभारती' — जो भरत के नाट्यशास्त्र पर आधारित है — भी उतनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती है।
गौरतलब है कि अभिनवगुप्त ने मठों की सख्त परंपराओं से हटकर यह सिखाया कि सच्ची जिज्ञासा रखने वाला कोई भी व्यक्ति — चाहे उसका सामाजिक दर्जा या लिंग कुछ भी हो — आध्यात्मिक मुक्ति पा सकता है। क्षेत्रीय लोककथाओं के अनुसार, उन्होंने कश्मीर की पवित्र भैरव गुफा में अपने 1,200 शिष्यों के साथ प्रवेश कर अंतिम मोक्ष प्राप्त किया।
आगे की दिशा
यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब जम्मू-कश्मीर में सांस्कृतिक और धार्मिक पुनरुद्धार की गतिविधियाँ निरंतर बढ़ रही हैं। उपराज्यपाल की इस भागीदारी को क्षेत्र की साझा आध्यात्मिक विरासत को प्रोत्साहन देने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।