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धार्मिक सद्भाव से बनेगा विकसित भारत: उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का बारामूला में संदेश

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धार्मिक सद्भाव से बनेगा विकसित भारत: उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का बारामूला में संदेश

सारांश

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बारामूला में अंतरधार्मिक संवाद को संबोधित करते हुए कहा कि धार्मिक सद्भाव ही विकसित भारत की असली नींव है। उन्होंने लाल डेड और शेख-उल-आलम की साझा विरासत का हवाला देते हुए युवाओं से इस परंपरा की रक्षा का आह्वान किया।

मुख्य बातें

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 19 जुलाई 2026 को बारामूला में अंतरधार्मिक संवाद कार्यक्रम को संबोधित किया।
कार्यक्रम 'सेव यूथ सेव फ्यूचर फाउंडेशन' द्वारा आयोजित; नशामुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान में फाउंडेशन की भूमिका की सराहना की गई।
सिन्हा ने लाल डेड और शेख-उल-आलम की शिक्षाओं को कश्मीर की साझा धरोहर बताया।
उन्होंने कहा कि धार्मिक सद्भाव ही सशक्त जम्मू-कश्मीर और विकसित भारत की आधारशिला है।
युवा स्वयंसेवकों के निस्वार्थ योगदान को समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया गया।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 19 जुलाई 2026 को बारामूला में आयोजित एक अंतरधार्मिक संवाद कार्यक्रम में कहा कि सामाजिक और धार्मिक सद्भाव ही वह आधारशिला है जिस पर एक सशक्त समाज, एक सशक्त जम्मू-कश्मीर और एक विकसित भारत का निर्माण संभव है। यह कार्यक्रम 'सेव यूथ सेव फ्यूचर फाउंडेशन' द्वारा आयोजित किया गया था।

कार्यक्रम और फाउंडेशन की सराहना

उपराज्यपाल सिन्हा ने 'सेव यूथ सेव फ्यूचर फाउंडेशन' के नशामुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान में योगदान की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि इस संगठन के युवा स्वयंसेवकों ने निस्वार्थ भाव से काम करते हुए जम्मू-कश्मीर के बेहतर भविष्य के निर्माण में एक बड़ी जिम्मेदारी निभाई है।

उन्होंने कहा कि इस अभियान के माध्यम से परिवारों और संस्थानों में विश्वास मजबूत हुआ है, युवाओं के भविष्य के प्रति आत्मविश्वास बढ़ा है, और पूरे देश को यह संदेश मिला है कि जब कोई समाज अपने दम पर आगे बढ़ता है, तो वह सबसे बड़ी चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होता है।

ऋषि-सूफी परंपरा और साझा विरासत

सिन्हा ने लाल डेड और शेख-उल-आलम की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कश्मीर की ऋषि-सूफी परंपरा ने कभी किसी एक धर्म की श्रेष्ठता का दावा नहीं किया। उन्होंने कहा कि लाल डेड की शिक्षाएं किसी एक धर्म तक सीमित नहीं थीं — उनका उपदेश सीधे मानव हृदय को छूता था और उन्होंने कभी लोगों को उनके धर्म के आधार पर नहीं आँका।

उन्होंने आगे कहा कि शेख-उल-आलम ने यह दिखाया कि सच्ची भक्ति संघर्ष या विभाजन में नहीं, बल्कि करुणा में और प्रत्येक मनुष्य की सेवा में पाई जाती है। उपराज्यपाल के अनुसार, यह साझा धरोहर केवल किसी एक समुदाय की नहीं, बल्कि इस पवित्र भूमि पर जन्म लेने वाले प्रत्येक नागरिक की विरासत है।

सद्भाव और एकता का आह्वान

सिन्हा ने जोर देकर कहा कि जम्मू-कश्मीर सदियों से सद्भाव और भाईचारे का प्रतीक रहा है। उन्होंने कहा, 'पीढ़ियों से, विभिन्न धर्मों के लोगों को सम्मान मिला है और उन्होंने आध्यात्मिक शांति का अनुभव किया है।' उनके अनुसार, इस धरोहर की रक्षा करना हमारा नैतिक और आध्यात्मिक कर्तव्य है — ठीक उसी तरह जैसे हम अपने परिवारों की रक्षा करते हैं।

युवाओं की भूमिका और आगे की राह

उपराज्यपाल ने युवाओं को इस सामाजिक बदलाव का वाहक बताया। यह कार्यक्रम ऐसे समय में आयोजित हुआ जब जम्मू-कश्मीर में नशे की समस्या और सामाजिक एकता को लेकर प्रशासन की ओर से विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। गौरतलब है कि 'सेव यूथ सेव फ्यूचर फाउंडेशन' जैसे नागरिक संगठन इस दिशा में जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं। आने वाले समय में ऐसे अंतरधार्मिक संवाद कार्यक्रमों की निरंतरता जम्मू-कश्मीर की सामाजिक बुनावट को और मजबूत कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह सद्भाव जमीनी स्तर पर नीतिगत समावेशन में भी परिलक्षित होता है। नशामुक्ति अभियान जैसे नागरिक प्रयासों को प्रशासनिक समर्थन एक सकारात्मक संकेत है, परंतु दीर्घकालिक सामाजिक एकता के लिए संवाद से आगे बढ़कर संस्थागत विश्वास निर्माण की आवश्यकता होगी।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बारामूला में क्या कहा?
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 19 जुलाई 2026 को बारामूला में कहा कि सामाजिक और धार्मिक सद्भाव ही एक सशक्त जम्मू-कश्मीर और विकसित भारत की आधारशिला है। उन्होंने लाल डेड और शेख-उल-आलम की शिक्षाओं को कश्मीर की साझा विरासत बताया।
'सेव यूथ सेव फ्यूचर फाउंडेशन' क्या है?
'सेव यूथ सेव फ्यूचर फाउंडेशन' एक नागरिक संगठन है जो जम्मू-कश्मीर में नशामुक्ति अभियान चला रहा है। उपराज्यपाल सिन्हा ने इसके युवा स्वयंसेवकों के निस्वार्थ योगदान की सराहना की।
कश्मीर की ऋषि-सूफी परंपरा का क्या महत्व है?
कश्मीर की ऋषि-सूफी परंपरा सदियों से प्रेम, करुणा और एकता का संदेश देती आई है। लाल डेड और शेख-उल-आलम जैसे संतों ने धर्म की सीमाओं से परे जाकर हर मनुष्य की सेवा को सर्वोच्च भक्ति बताया।
नशामुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान से क्या हासिल हुआ?
उपराज्यपाल सिन्हा के अनुसार, इस अभियान से परिवारों और संस्थानों में विश्वास मजबूत हुआ है और युवाओं के भविष्य के प्रति आत्मविश्वास बढ़ा है। यह अभियान यह भी दर्शाता है कि समाज अपने दम पर बड़ी चुनौतियों का सामना कर सकता है।
धार्मिक सद्भाव और भारत के विकास का क्या संबंध है?
उपराज्यपाल सिन्हा के अनुसार, सामाजिक और धार्मिक सद्भाव के बिना एक मजबूत समाज और विकसित राष्ट्र का निर्माण संभव नहीं है। उनका मानना है कि जब विभिन्न धर्मों के लोग मिलकर आगे बढ़ते हैं, तभी सच्चे विकास की नींव पड़ती है।
राष्ट्र प्रेस
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