उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान की समीक्षा की, 78 दिनों में परिणाम देने के निर्देश

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उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान की समीक्षा की, 78 दिनों में परिणाम देने के निर्देश

सारांश

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रीनगर में नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान की उच्च स्तरीय समीक्षा करते हुए 78 दिनों में ठोस परिणाम देने के निर्देश दिए। तस्करों की संपत्ति जब्ती, फर्जी नशामुक्ति केंद्रों पर कार्रवाई और युवाओं को खेल से जोड़ने की पहल — यह अभियान अब जन आंदोलन का रूप लेने की दिशा में है।

Key Takeaways

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 3 मई 2025 को श्रीनगर के लोक भवन में नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। सभी जिला प्रशासनों को अगले 78 दिनों में केंद्रित, समयबद्ध और परिणाम-उन्मुख रणनीति लागू करने के निर्देश दिए गए। नशे के तस्करों के ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट रद्द करने और उनकी संपत्तियों की जब्ती के लिए एसओपी पर त्वरित कार्रवाई का निर्देश। फर्जी या अनधिकृत नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्रों की पहचान कर उन पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए। सभी पंचायतों में खेल के मैदान विकसित करने और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए खेल गतिविधियाँ आयोजित करने का निर्देश। श्री अमरनाथजी यात्रा और मुहर्रम सहित आगामी धार्मिक आयोजनों के लिए अग्रिम व्यापक तैयारी के निर्देश।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 3 मई 2025 को श्रीनगर के लोक भवन में नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान की प्रगति की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में मादक पदार्थों के दुरुपयोग और नार्को-आतंकवाद को समाप्त करने के लिए जिला-वार कार्य योजनाओं का आकलन किया गया। उपराज्यपाल ने सभी जिला प्रशासनों को अगले 78 दिनों में केंद्रित, समयबद्ध और परिणाम-उन्मुख रणनीति लागू करने के स्पष्ट निर्देश दिए।

मुख्य निर्देश और कार्ययोजना

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मादक पदार्थों के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने और नार्को नेटवर्क को नष्ट करने के लिए सभी स्तरों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने पंचायत और वार्ड स्तर पर जमीनी भागीदारी का आह्वान करते हुए धार्मिक नेताओं, शिक्षाविदों, व्यापारियों, युवा समूहों और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं को इस अभियान से जोड़ने पर बल दिया। यह अभियान एक सतत जन आंदोलन में परिवर्तित हो सके, इसके लिए समुदाय की सक्रिय भागीदारी को अनिवार्य बताया गया।

तस्करों पर सख्त कार्रवाई और संपत्ति जब्ती

नशीले पदार्थों के प्रति प्रशासन की शून्य-सहिष्णुता नीति को दोहराते हुए उपराज्यपाल ने मादक पदार्थों की तस्करी में संलिप्त व्यक्तियों के ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट और अन्य दस्तावेजों को रद्द या निलंबित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) पर त्वरित कार्रवाई का निर्देश दिया। उन्होंने नार्को-टेरर और तस्करों से जुड़ी संपत्तियों की शीघ्र पहचान और जब्ती का भी आह्वान किया। इसके साथ ही नुस्खे वाली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए दवा दुकानों के गहन निरीक्षण और शैक्षणिक संस्थानों व संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए गए।

युवाओं को खेल से जोड़ने की पहल

उपराज्यपाल ने उपायुक्तों को सभी पंचायतों में खेल के मैदानों का विकास करने और जिलों में खेल अवसंरचना को मजबूत बनाने का निर्देश दिया। नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान के बैनर तले नियमित खेल प्रतियोगिताओं और युवा भागीदारी गतिविधियों के आयोजन का भी निर्देश दिया गया, ताकि युवा अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाएँ और मादक पदार्थों से दूर रहें। यह पहल ऐसे समय में आई है जब जम्मू-कश्मीर में युवाओं में नशे की लत एक गंभीर सामाजिक चिंता बनी हुई है।

फर्जी नशामुक्ति केंद्रों पर कार्रवाई

उपराज्यपाल ने उपायुक्तों को फर्जी या अनधिकृत नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्रों की पहचान कर उनके विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल प्रमाणित संस्थान ही स्थापित नियामक ढाँचे के भीतर संचालित हों। महिला समितियों और युवा क्लबों को इस लड़ाई में महत्वपूर्ण सामुदायिक संस्थाओं के रूप में मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।

आगामी धार्मिक आयोजनों की तैयारी

उपराज्यपाल ने अधिकारियों को वार्षिक श्री अमरनाथजी यात्रा और मुहर्रम सहित आगामी प्रमुख धार्मिक आयोजनों के सुचारू संचालन के लिए अग्रिम और व्यापक उपाय करने का निर्देश दिया। ब्लॉक दिवस और थाना दिवस को जन शिकायतों के समाधान और नागरिकों व प्रशासन के बीच विश्वास मजबूत करने के मंच के रूप में उपयोग करने पर भी जोर दिया गया। इस समीक्षा बैठक से स्पष्ट है कि प्रशासन नशे के विरुद्ध अभियान को महज़ कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखकर जमीनी स्तर पर परिणाम सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

Point of View

लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या इन निर्देशों की पालना की निगरानी के लिए कोई पारदर्शी तंत्र स्थापित किया जाएगा। फर्जी नशामुक्ति केंद्रों पर कार्रवाई का निर्देश स्वागतयोग्य है, परंतु यह प्रश्न भी उठता है कि इतने समय तक ये केंद्र बिना नियामकीय निगरानी के क्यों चलते रहे। बिना सत्यापन-योग्य परिणाम संकेतकों के, यह अभियान पिछले ऐसे कई घोषणाओं की तरह केवल प्रशासनिक कवायद बनकर रह सकता है।
NationPress
03/05/2026

Frequently Asked Questions

नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान क्या है?
नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान जम्मू-कश्मीर प्रशासन की एक पहल है जिसका उद्देश्य मादक पदार्थों के दुरुपयोग और नार्को-आतंकवाद को समाप्त करना है। इसमें जिला-वार कार्य योजनाएँ, सामुदायिक भागीदारी और तस्करों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई शामिल है।
उपराज्यपाल ने 78 दिनों की समयसीमा क्यों तय की?
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सभी जिला प्रशासनों को अगले 78 दिनों में केंद्रित और परिणाम-उन्मुख रणनीति लागू करने के निर्देश दिए, ताकि अभियान को ठोस जमीनी परिणामों से जोड़ा जा सके। यह समयसीमा प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित की गई है।
नशे के तस्करों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?
तस्करों के ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज रद्द या निलंबित किए जाएंगे। इसके अलावा नार्को-टेरर और तस्करों से जुड़ी संपत्तियों की शीघ्र पहचान और जब्ती का भी निर्देश दिया गया है।
फर्जी नशामुक्ति केंद्रों पर क्या कदम उठाए जाएंगे?
उपायुक्तों को फर्जी या अनधिकृत नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्रों की पहचान कर उनके विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। केवल प्रमाणित संस्थान ही स्थापित नियामक ढाँचे के भीतर संचालित हो सकेंगे।
युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए क्या योजना है?
सभी पंचायतों में खेल के मैदान विकसित करने और नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान के तहत नियमित खेल प्रतियोगिताएँ व युवा गतिविधियाँ आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। महिला समितियों और युवा क्लबों को भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका दी जाएगी।
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