23 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू-कश्मीर के सभी 20 जिलों में नशा-मुक्त पदयात्रा पूरी की, पुंछ से दिया कड़ा संदेश

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू-कश्मीर के सभी 20 जिलों में नशा-मुक्त पदयात्रा पूरी की, पुंछ से दिया कड़ा संदेश

सारांश

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने पुंछ में पदयात्रा पूरी कर जम्मू-कश्मीर के सभी 20 जिलों में 'नशा-मुक्त' अभियान का दायरा बंद किया। 57 दिनों में 1,130 से अधिक गिरफ्तारियाँ, 100 संपत्तियाँ जब्त — और अगले 43 दिन और तीखी मुहिम का ऐलान।

मुख्य बातें

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 7 जून 2026 को पुंछ में पदयात्रा पूरी कर जम्मू-कश्मीर के सभी 20 जिलों में 'नशा-मुक्त' पदयात्रा संपन्न की।
पिछले 57 दिनों में 1,038 एफआईआर दर्ज, 1,130 से अधिक तस्कर गिरफ्तार और 100 से अधिक संपत्तियाँ जब्त।
पीआईटी-एनडीपीएस के तहत 63 लोगों को हिरासत में लिया गया; 700 ड्राइविंग लाइसेंस रद्द और 130 पासपोर्ट निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू।
सिन्हा ने पुंछ को सीमावर्ती जिला बताते हुए कहा कि सीमापार तस्करी युवाओं की जिंदगी बर्बाद कर रही है और आतंकवाद को वित्त पोषित कर रही है।
अगले 43 दिनों में हर पंचायत, गली और घर तक अभियान पहुँचाने का लक्ष्य।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 7 जून 2026 को पुंछ जिले में 'नशा-मुक्त जम्मू-कश्मीर' अभियान की पदयात्रा में भाग लेकर केंद्र शासित प्रदेश के सभी 20 जिलों में यह यात्रा पूरी की। इस अवसर पर उन्होंने नशीले पदार्थों की तस्करी और उससे जुड़े आतंकवाद के विरुद्ध समाजव्यापी अभियान को और तेज करने का आह्वान किया।

पदयात्रा का उद्देश्य और दायरा

उपराज्यपाल सिन्हा ने कहा कि इस पदयात्रा का लक्ष्य स्पष्ट है — जम्मू-कश्मीर की धरती को नशे के प्रकोप से मुक्त करना और नशीले पदार्थों से वित्त पोषित आतंकवाद को जड़ से समाप्त करना। उन्होंने कहा कि पुंछ जैसे सीमावर्ती जिले में भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर तस्कर युवाओं की जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं और साथ ही आतंकी नेटवर्क को धन मुहैया करा रहे हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अगले 43 दिनों तक प्रत्येक नागरिक, पंचायत और वार्ड को तस्करों व दलालों के विरुद्ध एकजुट होकर जागरूकता फैलानी होगी और पुनर्वास कार्यक्रमों में तेजी लानी होगी।

पिछले 57 दिनों की कार्रवाई के आंकड़े

उपराज्यपाल ने बताया कि 57 दिनों के अभियान के दौरान जम्मू-कश्मीर में नशे के नेटवर्क पर व्यापक कार्रवाई की गई। 1,038 एफआईआर दर्ज कर 1,130 से अधिक तस्करों को गिरफ्तार किया गया। पीआईटी-एनडीपीएस (नशीले पदार्थों और मनोरोग पदार्थों की अवैध तस्करी की रोकथाम अधिनियम, 1988) के तहत 63 लोगों को हिरासत में लिया गया और 100 से अधिक संपत्तियाँ जब्त की गईं।

इसके अतिरिक्त, 700 ड्राइविंग लाइसेंस रद्द किए गए और 130 पासपोर्ट निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई, ताकि इन अपराधियों को पूरी तरह निष्क्रिय किया जा सके।

सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर

सिन्हा ने 'यह मेरी समस्या नहीं है' वाली मानसिकता को नशे के प्रसार का बड़ा कारण बताया। उनके अनुसार, जनता की चुप्पी तस्करों को अपना नेटवर्क विस्तार करने का अवसर देती है। उन्होंने कहा, "सच्चा बदलाव तभी आता है जब समुदाय एकजुट होते हैं — नशामुक्त समाज वे लोग बनाते हैं जो खुलकर बोलने और कार्रवाई करने का साहस दिखाते हैं।"

उन्होंने पुंछ के नागरिकों से अपील की कि अभियान हर घर तक पहुँचे और जन-चेतना का स्थायी हिस्सा बने। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि समाज को नुकसान पहुँचाने वाले अपराधियों को कानूनी सजा अवश्य मिलेगी।

आगे की राह

अगले 43 दिनों में पुंछ सहित पूरे केंद्र शासित प्रदेश में एक व्यापक अभियान चलाया जाएगा, जो हर पंचायत, हर गली और हर घर को नशामुक्त बनाने पर केंद्रित होगा। यह अभियान ऐसे समय में तेज हो रहा है जब सीमापार से नशीले पदार्थों की तस्करी और उससे जुड़े आतंकी वित्तपोषण को लेकर सुरक्षा एजेंसियाँ पहले से सतर्क हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

130 गिरफ्तारियाँ और 100 संपत्तियाँ जब्त — आँकड़े प्रभावशाली हैं, लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या ये कार्रवाइयाँ नशे की आपूर्ति श्रृंखला को स्थायी रूप से तोड़ पाती हैं या सिर्फ अस्थायी दबाव बनाती हैं। पुंछ जैसे सीमावर्ती जिलों में नशा-आतंक का गठजोड़ सालों पुराना है और केवल जन-जागरण से नहीं टूटेगा — इसके लिए सीमा पर खुफिया तंत्र और पड़ोसी देश के साथ कूटनीतिक दबाव भी उतना ही ज़रूरी है। 43 दिनों की समयसीमा राजनीतिक संकल्प दिखाती है, पर बिना दीर्घकालिक पुनर्वास ढाँचे और न्यायिक त्वरण के, गिरफ्तारियाँ नेटवर्क को खत्म नहीं करतीं।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की नशा-मुक्त पदयात्रा क्या है?
'नशा-मुक्त जम्मू-कश्मीर' अभियान के तहत उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने केंद्र शासित प्रदेश के सभी 20 जिलों में पदयात्रा की, जिसे 7 जून 2026 को पुंछ में पूरा किया गया। इस अभियान का उद्देश्य नशे के नेटवर्क को तोड़ना, जागरूकता फैलाना और पुनर्वास में तेजी लाना है।
57 दिनों के अभियान में जम्मू-कश्मीर में कितनी गिरफ्तारियाँ हुईं?
अधिकारियों के अनुसार, 57 दिनों में 1,038 एफआईआर दर्ज कर 1,130 से अधिक तस्करों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा पीआईटी-एनडीपीएस के तहत 63 लोगों को हिरासत में लिया गया और 100 से अधिक संपत्तियाँ जब्त की गईं।
पुंछ में नशा तस्करी की समस्या इतनी गंभीर क्यों है?
पुंछ एक सीमावर्ती जिला है, जहाँ तस्कर भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर सीमापार से नशीले पदार्थ लाते हैं। उपराज्यपाल सिन्हा के अनुसार, यह तस्करी न केवल युवाओं की जिंदगी बर्बाद कर रही है, बल्कि आतंकी नेटवर्क को वित्त पोषित भी कर रही है।
अगले 43 दिनों में क्या कदम उठाए जाएंगे?
उपराज्यपाल ने घोषणा की कि अगले 43 दिनों में पुंछ सहित पूरे जम्मू-कश्मीर में एक व्यापक अभियान चलाया जाएगा, जो हर पंचायत, हर गली और हर घर तक पहुँचेगा। इसमें जागरूकता, तस्करों की पहचान और पुनर्वास कार्यक्रम शामिल होंगे।
पीआईटी-एनडीपीएस के तहत हिरासत का क्या मतलब है?
पीआईटी-एनडीपीएस (नशीले पदार्थों और मनोरोग पदार्थों की अवैध तस्करी की रोकथाम अधिनियम, 1988) एक निवारक हिरासत कानून है, जिसके तहत संदिग्ध तस्करों को बिना मुकदमे के हिरासत में रखा जा सकता है। इस अभियान में 63 लोगों को इसी कानून के तहत हिरासत में लिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले