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राजौरी में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की पदयात्रा, नशामुक्त जम्मू-कश्मीर के लिए किया आह्वान

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राजौरी में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की पदयात्रा, नशामुक्त जम्मू-कश्मीर के लिए किया आह्वान

सारांश

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने राजौरी में 'नशामुक्त जम्मू-कश्मीर' अभियान के तहत पदयात्रा की, जिसमें नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने का प्रयास किया गया। यह अभियान नशे के खिलाफ समाज को एकजुट करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्य बातें

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का नशे के खिलाफ जंग में सक्रियता बढ़ाना राजौरी में नशामुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान का विस्तार नशे की समस्या को समाज में जागरूकता के माध्यम से समाप्त करना पुलिस और प्रशासन की सख्त कार्रवाई की आवश्यकता युवाओं में आत्मसम्मान और सही दिशा की भावना विकसित करना

श्रीनगर, 18 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने ‘नशामुक्त जम्मू-कश्मीर’ अभियान के अंतर्गत शनिवार को राजौरी में एक पदयात्रा में भाग लिया और लोगों से नशे के खिलाफ संगठित होने का संदेश दिया।

इस कार्यक्रम में उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सीमावर्ती जिला राजौरी अत्यंत संवेदनशील है, जहां सीमा पार से नशीले पदार्थों की तस्करी का खतरा हमेशा बना रहता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशासन इन चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और नशे के व्यापार को समाप्त कर समाज को इससे मुक्त कराया जाएगा।

उपराज्यपाल ने बताया कि 11 अप्रैल से जम्मू-कश्मीर पुलिस ने जम्मू संभाग में नशीले पदार्थों के खिलाफ एक विस्तृत अभियान आरंभ किया है। इस अभियान के तहत 11 से 15 अप्रैल के बीच 45 से अधिक एफआईआर दर्ज की गईं, 63 तस्करों को गिरफ्तार किया गया और बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ जब्त किए गए। उन्होंने कहा कि अब स्कूलों, दवा दुकानों और दवा एजेंसियों में नियमित जांच की जा रही है और यह अभियान निरंतर चलता रहेगा।

अपने संबोधन में मनोज सिन्हा ने कहा कि हर संघर्ष सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता, बल्कि कुछ संघर्ष समाज के भीतर भी होते हैं। उन्होंने बताया कि लंबे समय से जम्मू-कश्मीर के अनेक परिवार नशे की समस्या से जूझ रहे हैं और इस कारण कई लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है। उन्होंने नशे की लत को केवल व्यक्तिगत कमजोरी नहीं, बल्कि समाज के लिए एक गंभीर खतरा बताया।

उन्होंने यह भी कहा कि 11 अप्रैल को जम्मू के एमए स्टेडियम से 100 दिनों का विशेष अभियान आरंभ किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य नशीले पदार्थों के नेटवर्क को पूरी तरह से तोड़ना है। उन्होंने आरोप लगाया कि पड़ोसी देश नशीले पदार्थों के तस्करी के माध्यम से आतंकवाद को बढ़ावा देता है और भारत को कमजोर करने का प्रयास करता है। उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए समाज और प्रशासन दोनों को मिलकर कार्य करना होगा।

उपराज्यपाल ने जोर देकर कहा कि इस अभियान का सबसे अहम पहलू रोकथाम है। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को नशे से पहले ही जागरूक करना आवश्यक है। इसके लिए स्कूलों, कॉलेजों, खेल मैदानों और सामुदायिक केंद्रों में जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे, ताकि युवाओं में आत्मसम्मान और सही दिशा की भावना विकसित हो सके।

उन्होंने पुलिस और अन्य एजेंसियों से अपील की कि नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि यह दूसरों के लिए उदाहरण बन सके। उन्होंने कहा कि कोई भी अपराधी नहीं बचना चाहिए और जो लोग युवाओं का भविष्य खराब कर रहे हैं, उन्हें कड़ी सजा मिलनी चाहिए। इसके लिए प्रशासन ने एक मानक संचालन प्रक्रिया भी तैयार की है, जिससे मामलों में तेजी से कार्रवाई और न्याय सुनिश्चित किया जा सके।

इस अवसर पर उपराज्यपाल ने लोगों को नशा विरोधी शपथ भी दिलाई और ‘राजौरी प्रीमियर लीग’ तथा ‘राजौरी फुटबॉल क्लब’ की शुरुआत की। कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुति के माध्यम से नशे के दुष्प्रभावों के बारे में लोगों को जागरूक किया।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा उठाया गया है। उनकी पहल से न केवल प्रशासनिक कार्यवाही की जा रही है, बल्कि समाज में जागरूकता भी फैलाई जा रही है। यह अभियान न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए, बल्कि समाज की सामूहिक सुरक्षा के लिए भी जरूरी है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नशामुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान का उद्देश्य क्या है?
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकना और समाज को नशे से मुक्त कराना है।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने किस दिन पदयात्रा की?
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 18 अप्रैल को राजौरी में पदयात्रा की।
इस अभियान के तहत कितनी एफआईआर दर्ज की गईं?
11 से 15 अप्रैल के बीच 45 से अधिक एफआईआर दर्ज की गईं।
नशे के खिलाफ रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
बच्चों और युवाओं को जागरूक करने के लिए स्कूलों, कॉलेजों और सामुदायिक केंद्रों में जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।
राजौरी प्रीमियर लीग क्या है?
राजौरी प्रीमियर लीग एक खेल आयोजन है जिसकी शुरुआत उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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