मनोज सिन्हा ने कठुआ में नशीले पदार्थों के खिलाफ जन-आंदोलन की शुरुआत की
सारांश
Key Takeaways
- मनोज सिन्हा ने कठुआ में जन-आंदोलन की शुरुआत की।
- यह नशीले पदार्थों के खिलाफ है।
- अभियान का लक्ष्य जम्मू-कश्मीर को नशामुक्त बनाना है।
- अगले तीन महीने महत्वपूर्ण हैं।
- सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता है।
कठुआ, १३ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को कठुआ में नशीले पदार्थों के खिलाफ एक जन-आंदोलन की शुरुआत की।
एलजी मनोज सिन्हा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट के जरिए जानकारी दी कि आज, 'नशामुक्त जम्मू-कश्मीर' अभियान के अंतर्गत, मैंने कठुआ में एक जनसभा को संबोधित किया और नशीले पदार्थों के खिलाफ इस जन-आंदोलन की शुरुआत की। आइए, हम एक ऐसा जम्मू-कश्मीर बनाएँ, जहाँ हमारे युवाओं की ऊर्जा दुनिया को रोशन करे, न कि उन्हें ही तबाह कर दे। आइए, हम सभी मिलकर इस चुनौती का सामना करें।
उन्होंने कहा कि अगले तीन महीने न केवल एक अभियान का हिस्सा होंगे, बल्कि जम्मू-कश्मीर में स्थायी बदलाव की नींव भी रखेंगे। इस अभियान का मूल तत्व 'करुणापूर्ण पुनर्वास' है। हमें अपनी सोच में बदलाव लाना होगा। नशे के आदी लोग रोगी हैं और उन्हें हमारी सहायता की आवश्यकता है।
गौरतलब है कि उपराज्यपाल ने ११ अप्रैल को 'नशामुक्त जम्मू-कश्मीर' के लिए एक व्यापक जन आंदोलन का शुभारंभ किया था। यह पहल जम्मू के एम स्टेडियम से शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य केंद्र शासित प्रदेश के हर गांव, कस्बे, शहर और घर तक पहुंचना है, ताकि समाज के हर वर्ग को इस मुहिम में शामिल किया जा सके।
उपराज्यपाल कार्यालय ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा था कि जम्मू के एम स्टेडियम से 'नशामुक्त जम्मू-कश्मीर' के लिए एक ऐतिहासिक जन-आंदोलन की शुरुआत की गई। हमने एक ऐसे संकल्प को आवाज दी है, जो इस केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) के हर गांव, हर कस्बे, हर शहर, हर घर और हर दिल तक पहुंचेगा, और इस क्षेत्र को नशामुक्त बनाने के हमारे संकल्प को पूरा करेगा।
उपराज्यपाल ने संदेश में कहा कि अगले तीन महीने अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे। इस दौरान यह अभियान छह प्रमुख चरणों में आगे बढ़ेगा—जागरूकता का अभियान, युवाओं पर केंद्रित कार्यक्रम, सामुदायिक भागीदारी, कड़ा कानून-प्रवर्तन, पुनर्वास और मूल्यांकन। जम्मू-कश्मीर को नशे के इस खतरे से मुक्त कराने के लिए हम 'संपूर्ण-सरकारी दृष्टिकोण' के साथ आगे बढ़ेंगे।
'नशामुक्त जम्मू-कश्मीर' अभियान के लिए न केवल सहानुभूति, बल्कि सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता है, क्योंकि यह एक व्यक्ति की समस्या नहीं, बल्कि पूरे समाज की चुनौती है। हम सभी मिलकर, अटूट संकल्प के साथ, नशीले पदार्थों के दुरुपयोग की इस बुराई से लड़ेंगे और इसे परास्त करेंगे।