नशा तस्करी और आतंकवाद एक ही दुश्मन के दो हाथ: LG मनोज सिन्हा ने बडगाम में किया बड़ा ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार, 5 मई 2026 को बडगाम में नशामुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान के एक बड़े जन आंदोलन को संबोधित करते हुए कहा कि नशे की लत से टूटा हुआ हर परिवार समाज की नींव में एक दरार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नशीले पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद का वित्तपोषण अब अलग-अलग मुद्दे नहीं रह गए — ये एक ही दुश्मन के दो हाथ हैं।
बडगाम में जन आंदोलन और प्रशासन का संकल्प
उपराज्यपाल सिन्हा ने बडगाम जिले के नागरिकों को आश्वासन दिया कि प्रशासन का हर अंग इस समस्या से निपटने के लिए दृढ़ संकल्प और एकता के साथ काम करेगा। उन्होंने बडगाम के हर परिवार, सामाजिक संगठन, आध्यात्मिक नेता और राजनीतिक प्रतिनिधि से अपील की कि वे जिले भर में नशामुक्त अभियान को और तेज करें। उनके अनुसार, प्रशासन पूरी ताकत से नशा उन्मूलन के लिए प्रतिबद्ध है।
'अभिभावक ब्रिगेड' की घोषणा
उपराज्यपाल ने प्रत्येक गाँव और शहर में एक अनौपचारिक 'अभिभावक ब्रिगेड' बनाने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि इसका उद्देश्य माता-पिता, महिलाओं और युवाओं का एक स्वैच्छिक नेटवर्क तैयार करना है, जिन्हें गाँवों या वार्डों में नशीली दवाओं के उपयोग के शुरुआती लक्षणों की पहचान करने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। इस नेटवर्क का काम पीड़ित परिवारों को तुरंत संसाधनों और सहायता से जोड़ना भी होगा।
युवाओं को पीड़ित माना, अपराधी नहीं
सिन्हा ने कहा कि नशे की लत में खोया हुआ प्रत्येक युवा भावी कार्यबल के लिए एक शक्ति की हानि है और पुलिस व सेना के लिए एक सैनिक की हानि है। उन्होंने समाज से आग्रह किया कि नशे से पीड़ित बच्चों को अपराधी नहीं बल्कि पीड़ित माना जाए और उन्हें स्नेह, सहानुभूति तथा देखभाल की ज़रूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि इस कलंक को मिटाना होगा ताकि पीड़ित परिवार चुपचाप दर्द सहन करने की बजाय मदद माँग सकें।
नशा तस्करी और आतंकवाद का संबंध
उपराज्यपाल सिन्हा ने कहा कि नशे का प्रवेश न केवल युवाओं की आकांक्षाओं को खोखला करता है, बल्कि नशा व्यापार आतंकवाद और कट्टरपंथ को भी बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया जानती है कि पड़ोसी देश आतंकवाद का बड़ा संरक्षक है और जम्मू-कश्मीर में नशीले पदार्थों की तस्करी करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब नागरिक नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ते हैं, तो वे आतंकवाद के खिलाफ भी लड़ते हैं।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में नशीले पदार्थों की तस्करी के मामलों में चिंताजनक वृद्धि दर्ज की जा रही है। गौरतलब है कि नशामुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान अब बडगाम जैसे जिलों में जमीनी स्तर पर सामुदायिक भागीदारी के साथ विस्तार पा रहा है। अभिभावक ब्रिगेड जैसी पहल यदि प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो यह नशा उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण सामुदायिक कदम साबित हो सकती है।