नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर: सांबा में LG मनोज सिन्हा ने संभाली अभियान की कमान, 85 दिनों का रोडमैप तैयार

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नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर: सांबा में LG मनोज सिन्हा ने संभाली अभियान की कमान, 85 दिनों का रोडमैप तैयार

सारांश

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सांबा में 'नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर' अभियान की अगुवाई की। 100 दिवसीय मुहिम में 85 दिनों का रोडमैप तैयार — हर पंचायत नशामुक्त हो, तस्करों पर सख्त कार्रवाई हो। पड़ोसी देश की साजिश को बेनकाब करते हुए LG ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बताया।

Key Takeaways

  • उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 25 अप्रैल 2025 को सांबा जिले में 100 दिवसीय 'नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर' अभियान की जनसभा को संबोधित किया।
  • अगले 85 दिनों के लिए ठोस रोडमैप तैयार — साप्ताहिक ऑडिट, तस्करों पर मुकदमा और महिला समितियों का गठन।
  • प्रत्येक पंचायत और प्रत्येक पुलिस स्टेशन को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया गया।
  • पड़ोसी देश पर आरोप — नशे के जरिए आतंकवाद की फंडिंग और सामाजिक विघटन की साजिश।
  • उपायुक्तों और एसएसपी को साप्ताहिक समीक्षा के निर्देश — परिणाम नारों से नहीं, जमीनी कार्रवाई से मापे जाएंगे।
  • अभियान में पहचान, परामर्श, उपचार और पुनर्वास की पूरी श्रृंखला शामिल होगी।

जम्मू, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार, 25 अप्रैल को सांबा जिले में 'नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर' अभियान की कमान खुद संभाली और एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मादक पदार्थों के नेटवर्क के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई का संकल्प दोहराया। यह 100 दिवसीय अभियान का हिस्सा है जो जम्मू-कश्मीर को नशे की जड़ों से मुक्त करने के लिए शुरू किया गया है।

उपराज्यपाल का संकल्प — कानून और समाज मिलकर लड़ेंगे

जनसभा को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा, "हम मादक पदार्थों के नेटवर्क के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे, लेकिन यह लड़ाई केवल कानून से नहीं जीती जा सकती।" उन्होंने स्पष्ट किया कि इस जंग को जीतने के लिए समाज के भीतर जागरूकता, सहयोग और सामूहिक प्रयास अनिवार्य हैं।

उन्होंने कहा कि "हम एक ऐसे जम्मू-कश्मीर का निर्माण कर रहे हैं जहां मादक पदार्थों का कोई स्थान नहीं है।" उनके इस बयान ने जनसभा में उपस्थित हजारों नागरिकों में नई ऊर्जा का संचार किया।

85 दिनों का रोडमैप — परिणाम रैलियों से नहीं, जमीन पर मापे जाएंगे

उपराज्यपाल ने अगले 85 दिनों के लिए एक स्पष्ट कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि सफलता का पैमाना नारे या रैलियां नहीं होंगी, बल्कि ठोस परिणाम होंगे। साप्ताहिक आधार पर यह देखा जाएगा कि कितने नशेड़ियों का पुनर्वास हुआ, कितने तस्करों पर मुकदमा चला, कितने फर्जी नशा उपचार केंद्र बंद किए गए, कितना प्रतिबंधित सामान जब्त हुआ और पंचायतों एवं शहरी वार्डों में कितनी महिला समितियां गठित की गईं।

उन्होंने उपायुक्तों और एसएसपी को निर्देश दिया कि वे साप्ताहिक रैलियों और कार्यक्रमों की नियमित समीक्षा करें। अभियान को पहचान और परामर्श से लेकर उपचार, स्वास्थ्य लाभ और पुनर्वास तक देखभाल की पूरी श्रृंखला बनानी होगी।

पड़ोसी देश की साजिश — नशे के जरिए आतंक और सामाजिक विघटन

उपराज्यपाल सिन्हा ने एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक पहलू उठाते हुए कहा कि पड़ोसी देश सुनियोजित तरीके से मादक पदार्थों के संकट को हवा दे रहा है ताकि आतंकवाद को वित्तपोषित किया जा सके और समाज में विघटन पैदा किया जा सके। यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि नशे की समस्या केवल सामाजिक नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौती भी है।

उन्होंने कहा कि "मादक पदार्थों के आतंकवादी" युवाओं की कमजोरियों का फायदा उठाकर उन्हें निशाना बना रहे हैं। अब समय आ गया है कि समाज के खिलाफ साजिश रचने वालों पर सख्त से सख्त कानून लागू किए जाएं।

प्रत्येक पंचायत नशामुक्त हो — जन-जागरण का आह्वान

उपराज्यपाल ने जोर देकर कहा कि प्रत्येक पंचायत नशामुक्त होनी चाहिए और प्रत्येक पुलिस स्टेशन नशीले पदार्थों के तस्करों से मुक्त होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 100 दिनों का यह आंदोलन आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा और यह साबित करेगा कि जब जनता एकजुट होती है तो इतिहास बदला जा सकता है।

उन्होंने भागीदारी, गति और ऊर्जा को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि "नशे की लत किसी एक व्यक्ति की समस्या नहीं है — यह एक सामाजिक संकट है।" अगले 85 दिनों तक केंद्र शासित प्रदेश के हर घर तक पहुंचकर मादक पदार्थों के खतरों के प्रति आगाह करना होगा।

गहरा संदर्भ — जम्मू-कश्मीर में नशे की बढ़ती चुनौती

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ वर्षों में नशीले पदार्थों की तस्करी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। पाकिस्तान सीमा से सटे होने के कारण यह क्षेत्र ड्रग तस्करी के लिए एक संवेदनशील गलियारा बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि हेरोइन और सिंथेटिक ड्रग्स की आपूर्ति सीमा पार से होती है और इसका सीधा संबंध आतंकी फंडिंग से है।

यह अभियान ऐसे समय में शुरू हुआ है जब पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान तनाव अपने चरम पर है। इस पृष्ठभूमि में नशे के खिलाफ यह मुहिम केवल सामाजिक नहीं, बल्कि एक रणनीतिक कदम के रूप में भी देखी जा रही है। आने वाले हफ्तों में इस अभियान के परिणाम और साप्ताहिक ऑडिट रिपोर्टें यह तय करेंगी कि यह मुहिम जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है।

Point of View

जो एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव है। हालांकि सवाल यह है कि 100 दिनों के बाद साप्ताहिक ऑडिट के परिणाम सार्वजनिक होंगे या नहीं — क्योंकि अतीत में ऐसे अभियान जोश के साथ शुरू होकर कागजों में दफन हो जाते हैं। जमीनी जवाबदेही और पारदर्शी डेटा ही इस अभियान की असली परीक्षा होगी।
NationPress
25/04/2026

Frequently Asked Questions

नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान क्या है और इसकी शुरुआत कब हुई?
'नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर' एक 100 दिवसीय अभियान है जिसे उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के नेतृत्व में शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर की हर पंचायत और शहरी वार्ड को मादक पदार्थों से मुक्त करना है।
LG मनोज सिन्हा ने सांबा में क्या घोषणाएं कीं?
उपराज्यपाल ने अगले 85 दिनों के लिए ठोस रोडमैप घोषित किया जिसमें साप्ताहिक ऑडिट, तस्करों पर मुकदमा, फर्जी केंद्र बंद करना और महिला समितियों का गठन शामिल है। उन्होंने हर पंचायत और पुलिस स्टेशन को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया।
क्या पड़ोसी देश जम्मू-कश्मीर में नशे की तस्करी में शामिल है?
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने स्पष्ट रूप से कहा कि पड़ोसी देश सुनियोजित तरीके से मादक पदार्थों के संकट को हवा दे रहा है ताकि आतंकवाद को वित्तपोषित किया जा सके और समाज में विघटन पैदा हो। यह एक राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
इस अभियान में सफलता कैसे मापी जाएगी?
सफलता रैलियों या नारों से नहीं, बल्कि साप्ताहिक ठोस परिणामों से मापी जाएगी — जैसे पुनर्वासित लोगों की संख्या, गिरफ्तार तस्कर, जब्त सामान और बंद फर्जी केंद्र। उपायुक्त और एसएसपी हर सप्ताह समीक्षा करेंगे।
इस अभियान में आम जनता की क्या भूमिका होगी?
उपराज्यपाल ने कहा कि नशे की लत एक सामाजिक संकट है, इसलिए जनता की भागीदारी अनिवार्य है। पंचायतों में महिला समितियां गठित की जाएंगी और हर घर तक जागरूकता पहुंचाई जाएगी।
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