जम्मू-कश्मीर: LG मनोज सिन्हा का नशामुक्ति अभियान, 21 दिनों में 481 FIR और 518 तस्कर गिरफ्तार
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सारांश
श्रीनगर के टीआरसी मैदान से उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने नशामुक्ति की जंग का बिगुल फूंका — सिर्फ भाषण नहीं, बल्कि 21 दिनों में 481 FIR और 518 तस्करों की गिरफ्तारी के आंकड़ों के साथ। यह अभियान नार्को-आतंकवाद को सीधी चुनौती है।
Key Takeaways
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 3 मई 2026 को श्रीनगर में मादक पदार्थों के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान का शुभारंभ किया। 11 अप्रैल से 2 मई 2026 के बीच 21 दिनों में 481 FIR दर्ज की गईं। 518 तस्करों और विक्रेताओं को जेल भेजा गया; 24 मकान ध्वस्त और करोड़ों की संपत्ति जब्त। अकेले कश्मीर में 26 कुर्कियां की गईं; 300 से अधिक ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश। सिन्हा ने युवाओं से आह्वान किया कि नशा आज़ादी नहीं, बल्कि जंजीरें हैं।
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 3 मई 2026 को श्रीनगर के टीआरसी फुटबॉल मैदान में मादक पदार्थों के दुरुपयोग और नार्को-आतंकवाद के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान का शुभारंभ करते हुए जनता से एकजुट होकर नशामुक्त जम्मू-कश्मीर बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस लड़ाई में हर कदम, हर प्रयास और हर योगदान जीत को करीब लाता है।
अभियान का उद्देश्य और उपराज्यपाल का संदेश
सिन्हा ने इस अवसर पर दो किलोमीटर की पदयात्रा का नेतृत्व किया और समाज के सभी वर्गों से मादक पदार्थों के खिलाफ पूरी तरह समर्पित होने का आग्रह किया। उन्होंने कहा,
Point of View
लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या ये गिरफ्तारियां बड़े तस्करी नेटवर्क को तोड़ती हैं या केवल छोटे विक्रेताओं तक सीमित हैं। नार्को-आतंकवाद की समस्या सीमापार आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी है, जिसे केवल स्थानीय कार्रवाई से नहीं तोड़ा जा सकता। हस्ताक्षर अभियान जागरूकता के लिए उपयोगी है, लेकिन पुनर्वास और मांग में कमी के बिना आपूर्ति-पक्ष की कार्रवाई अधूरी रहती है। जम्मू-कश्मीर में नशे की समस्या की जड़ें बेरोजगारी और सामाजिक अस्थिरता में भी हैं, जिन पर दीर्घकालिक नीतिगत ध्यान आवश्यक है।
NationPress
03/05/2026
Frequently Asked Questions
जम्मू-कश्मीर में नशामुक्ति हस्ताक्षर अभियान क्या है?
यह 3 मई 2026 को श्रीनगर के टीआरसी फुटबॉल मैदान में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा शुरू किया गया जन-जागरूकता अभियान है, जिसका उद्देश्य मादक पदार्थों के दुरुपयोग और नार्को-आतंकवाद के खिलाफ समाज के हर वर्ग को एकजुट करना है। इसमें नागरिकों से हस्ताक्षर लेकर उनकी प्रतिबद्धता दर्ज की जा रही है।
21 दिनों में जम्मू-कश्मीर में ड्रग तस्करों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?
नई SOP के तहत 11 अप्रैल से 2 मई 2026 के बीच 481 FIR दर्ज की गईं, 518 तस्करों को जेल भेजा गया, 24 मकान ध्वस्त किए गए और करोड़ों की संपत्ति जब्त की गई। 300 से अधिक ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश भी की गई है।
नार्को-आतंकवाद क्या है और यह जम्मू-कश्मीर को कैसे प्रभावित करता है?
नार्को-आतंकवाद वह स्थिति है जहां आतंकवादी संगठन नशीले पदार्थों की तस्करी से फंडिंग जुटाते हैं और युवाओं को नशे का आदी बनाकर सामाजिक अस्थिरता फैलाते हैं। जम्मू-कश्मीर में सीमापार से नशीले पदार्थों की तस्करी इस समस्या को और गंभीर बनाती है।
उपराज्यपाल सिन्हा ने युवाओं को क्या संदेश दिया?
सिन्हा ने युवाओं से कहा कि नशा 'कूल' नहीं बल्कि ऐसी जंजीरें हैं जो आज़ादी छीन लेती हैं। उन्होंने युवाओं की ऊर्जा को खेल, कौशल विकास और उज्ज्वल भविष्य निर्माण में लगाने का आग्रह किया।
जम्मू-कश्मीर में नशामुक्ति अभियान आगे कैसे बढ़ेगा?
प्रशासन नई SOP के तहत कार्रवाई जारी रखेगा और आने वाले हफ्तों में और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने की संभावना है। हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से समाज के हर वर्ग को इस मुहिम से जोड़ा जाएगा।