नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान के 100 दिन: एलजी सिन्हा बोले — 'ड्रग्स के खिलाफ जंग अभी जारी है'
सारांश
मुख्य बातें
उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार, 21 जुलाई को श्रीनगर में सामाजिक कल्याण विभाग के एक कार्यक्रम में स्पष्ट किया कि 'नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान' के 100 दिन पूरे होना एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, परंतु नशीले पदार्थों के विरुद्ध यह लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि नार्को-टेरर नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने का संकल्प पहले से कहीं अधिक दृढ़ है।
अभियान की मुख्य उपलब्धियाँ
उप-राज्यपाल सिन्हा ने बताया कि बीते 100 दिनों में प्रशासन ने ठोस कार्रवाई की। उन्होंने कहा, 'पिछले 100 दिनों में हमने पक्के एक्शन के साथ अपने इरादे को साबित किया।' इस दौरान 2,581 ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया गया, 23.29 किलोग्राम हेरोइन सहित कुल लगभग 1,431 किलोग्राम नारकोटिक्स जब्त किए गए। इसके अलावा, नार्को-टेरर फाइनेंसिंग को रोकने के लिए ₹188.89 करोड़ से अधिक की संपत्ति भी जब्त की गई।
एलजी की पदयात्रा और जमीनी अनुभव
उप-राज्यपाल ने बताया कि इस अभियान के दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर के सभी 20 जिलों में पदयात्रा के माध्यम से समुदायों से सीधा संवाद किया। उन्होंने कहा, 'परिवारों के सबसे बुरे पलों में उनके साथ खड़े होने से मुझे उनके दुख की गहराई को सच में समझने का मौका मिला। फिर भी उस दर्द के बीच, मैंने एक पक्की उम्मीद देखी कि हमारे युवा नशे की लत से आजाद हो सकते हैं।'
उन्होंने स्वीकार किया कि पदयात्रा के दौरान उन्हें निराशा और उम्मीद दोनों के दर्शन हुए, और यह भी कहा कि इस अभियान को मिला जन-समर्थन जम्मू-कश्मीर के इतिहास में अभूतपूर्व है।
नार्को-टेरर नेटवर्क पर कड़ा रुख
एलजी सिन्हा ने कहा, 'हम उन ड्रग कार्टेल और नार्को-टेरर नेटवर्क को खत्म करने के लिए पक्के इरादे वाले हैं जो हमारे युवाओं को निशाना बनाते हैं।' उन्होंने गैरकानूनी तस्करी के पूरे तंत्र को ध्वस्त करने, जागरूकता बढ़ाने और प्रभावित व्यक्तियों के पुनर्वास को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में नशे की समस्या और सीमा-पार तस्करी के बीच संबंध को लेकर सुरक्षा एजेंसियाँ पहले से सतर्क हैं।
आगे की राह
उप-राज्यपाल ने माना कि 'आगे का रास्ता जरूर मुश्किल होगा', लेकिन नार्को-टेररिज्म को पूरी तरह समाप्त करने का प्रशासन का संकल्प अटल है। गौरतलब है कि यह अभियान केवल कानून-प्रवर्तन तक सीमित नहीं है — पुनर्वास और सामाजिक पुनर्एकीकरण को भी इसका अनिवार्य हिस्सा बनाया गया है। आने वाले दिनों में अभियान के अगले चरण की रूपरेखा सामने आने की उम्मीद है।