22 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान के 100 दिन: एलजी सिन्हा बोले — 'ड्रग्स के खिलाफ जंग अभी जारी है'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान के 100 दिन: एलजी सिन्हा बोले — 'ड्रग्स के खिलाफ जंग अभी जारी है'

सारांश

100 दिन, 20 जिलों में पदयात्रा, 2,581 गिरफ्तारियाँ और ₹188.89 करोड़ की जब्ती — एलजी मनोज सिन्हा ने साफ कहा कि नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर का सफर अभी पूरा नहीं हुआ। नार्को-टेरर नेटवर्क के खिलाफ यह लड़ाई अब और तेज होगी।

मुख्य बातें

उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने 21 जुलाई 2026 को 'नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान' के 100 दिन पूरे होने पर श्रीनगर में कार्यक्रम को संबोधित किया।
100 दिनों में 2,581 ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया गया और लगभग 1,431 किलोग्राम नारकोटिक्स जब्त किए गए, जिनमें 23.29 किलोग्राम हेरोइन शामिल है।
नार्को-टेरर फाइनेंसिंग रोकने के लिए ₹188.89 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त की गई।
एलजी ने सभी 20 जिलों में पदयात्रा कर समुदायों से सीधा संवाद किया।
एलजी सिन्हा ने कहा — ड्रग कार्टेल और नार्को-टेरर नेटवर्क को समाप्त करने का संकल्प पहले से अधिक मजबूत है।

उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार, 21 जुलाई को श्रीनगर में सामाजिक कल्याण विभाग के एक कार्यक्रम में स्पष्ट किया कि 'नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान' के 100 दिन पूरे होना एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, परंतु नशीले पदार्थों के विरुद्ध यह लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि नार्को-टेरर नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने का संकल्प पहले से कहीं अधिक दृढ़ है।

अभियान की मुख्य उपलब्धियाँ

उप-राज्यपाल सिन्हा ने बताया कि बीते 100 दिनों में प्रशासन ने ठोस कार्रवाई की। उन्होंने कहा, 'पिछले 100 दिनों में हमने पक्के एक्शन के साथ अपने इरादे को साबित किया।' इस दौरान 2,581 ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया गया, 23.29 किलोग्राम हेरोइन सहित कुल लगभग 1,431 किलोग्राम नारकोटिक्स जब्त किए गए। इसके अलावा, नार्को-टेरर फाइनेंसिंग को रोकने के लिए ₹188.89 करोड़ से अधिक की संपत्ति भी जब्त की गई।

एलजी की पदयात्रा और जमीनी अनुभव

उप-राज्यपाल ने बताया कि इस अभियान के दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर के सभी 20 जिलों में पदयात्रा के माध्यम से समुदायों से सीधा संवाद किया। उन्होंने कहा, 'परिवारों के सबसे बुरे पलों में उनके साथ खड़े होने से मुझे उनके दुख की गहराई को सच में समझने का मौका मिला। फिर भी उस दर्द के बीच, मैंने एक पक्की उम्मीद देखी कि हमारे युवा नशे की लत से आजाद हो सकते हैं।'

उन्होंने स्वीकार किया कि पदयात्रा के दौरान उन्हें निराशा और उम्मीद दोनों के दर्शन हुए, और यह भी कहा कि इस अभियान को मिला जन-समर्थन जम्मू-कश्मीर के इतिहास में अभूतपूर्व है।

नार्को-टेरर नेटवर्क पर कड़ा रुख

एलजी सिन्हा ने कहा, 'हम उन ड्रग कार्टेल और नार्को-टेरर नेटवर्क को खत्म करने के लिए पक्के इरादे वाले हैं जो हमारे युवाओं को निशाना बनाते हैं।' उन्होंने गैरकानूनी तस्करी के पूरे तंत्र को ध्वस्त करने, जागरूकता बढ़ाने और प्रभावित व्यक्तियों के पुनर्वास को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में नशे की समस्या और सीमा-पार तस्करी के बीच संबंध को लेकर सुरक्षा एजेंसियाँ पहले से सतर्क हैं।

आगे की राह

उप-राज्यपाल ने माना कि 'आगे का रास्ता जरूर मुश्किल होगा', लेकिन नार्को-टेररिज्म को पूरी तरह समाप्त करने का प्रशासन का संकल्प अटल है। गौरतलब है कि यह अभियान केवल कानून-प्रवर्तन तक सीमित नहीं है — पुनर्वास और सामाजिक पुनर्एकीकरण को भी इसका अनिवार्य हिस्सा बनाया गया है। आने वाले दिनों में अभियान के अगले चरण की रूपरेखा सामने आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

581 गिरफ्तारियाँ और ₹188.89 करोड़ की जब्ती प्रभावशाली आँकड़े हैं, लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या ये कार्रवाइयाँ आपूर्ति-श्रृंखला को स्थायी रूप से तोड़ती हैं या केवल तात्कालिक दबाव बनाती हैं। जम्मू-कश्मीर में नशे की समस्या सीमा-पार तस्करी और स्थानीय वितरण नेटवर्क दोनों से जुड़ी है — जिसमें से एक पर प्रशासन का नियंत्रण सीमित है। पुनर्वास को अभियान का हिस्सा बनाना सही दिशा है, किंतु इसके लिए दीर्घकालिक बजट और संस्थागत क्षमता की जरूरत होगी, जिसका अभी कोई सार्वजनिक ब्यौरा सामने नहीं आया है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान क्या है?
यह जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा शुरू किया गया एक व्यापक नशा-विरोधी अभियान है, जिसमें ड्रग तस्करों की गिरफ्तारी, नारकोटिक्स की जब्ती, जागरूकता पदयात्रा और पुनर्वास कार्यक्रम शामिल हैं। 21 जुलाई 2026 को इस अभियान के 100 दिन पूरे हुए।
100 दिनों में अभियान के क्या परिणाम रहे?
100 दिनों में 2,581 ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया गया, लगभग 1,431 किलोग्राम नारकोटिक्स (जिनमें 23.29 किलोग्राम हेरोइन शामिल) जब्त किए गए, और नार्को-टेरर फाइनेंसिंग रोकने के लिए ₹188.89 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त की गई।
एलजी मनोज सिन्हा ने अभियान के दौरान क्या किया?
उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू-कश्मीर के सभी 20 जिलों में पदयात्रा की और समुदायों से सीधे संवाद किया। उन्होंने नशे से प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी पीड़ा को समझा।
क्या यह अभियान आगे भी जारी रहेगा?
हाँ, एलजी सिन्हा ने स्पष्ट किया कि यह अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है। प्रशासन ड्रग कार्टेल और नार्को-टेरर नेटवर्क को खत्म करने, जागरूकता बढ़ाने और पुनर्वास को सुदृढ़ करने की दिशा में काम जारी रखेगा।
नार्को-टेररिज्म और जम्मू-कश्मीर में नशे की समस्या का क्या संबंध है?
अधिकारियों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में नशीले पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद की फंडिंग के बीच सीधा संबंध है। इसीलिए इस अभियान में नारकोटिक्स जब्ती के साथ-साथ नार्को-टेरर फाइनेंसिंग से जुड़ी संपत्तियों को भी निशाना बनाया गया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले